राज्य सचिवालय नवान्न में बैठक को लेकर अभी भी अनिश्चितता बरकरार है। जूनियर डॉक्टरों के ई मेल के बाद नवान्न में स्वास्थराज्य मंत्री चंद्रिमा भट्टाचार्य, डीजी राजीव कुमार और मुख्य सचिव मनोज पंत ने कहा, दुर्भाग्यवश, वे अब तक नहीं आए हैं। उन्हें चर्चा के लिए आना चाहिए था।
कोलकाता। अभया की मौत को 33 दिन हो गये। न्याय की मांग पर सुबह से शाम कोलकाता की सडक़ों पर रैलियों का रेला जारी है। सुप्रीम कोर्ट के डेडलाईन की समय सीमा मंगलवार शाम 5 बजे समाप्त हो गई पर जूनियर डॉक्टर काम पर लौटने की बजाय स्वास्थ्य भवन को घेरकर बैठ गये हैं। इसके बाद से सरकार की तरफ से लगातार उनसे बातचीत की पेशकश की जा रही है। जूनियर डॉक्टर भी बातचीत का रास्ता खुला रखना चाहते हैं पर दोनों तरफ से शर्तें और ईमेल की भाषा को लेकर रार बढ़ रही है। आज नबान्न के प्रस्ताव पर जूनियर डॉक्टरों ने जवाबी ईमेल भेज दिया। बैठक में नहीं गये। इस पर आज पश्चिम बंगाल सरकार ने जूनियर डॉक्टरों से खुले मन से चर्चा में शामिल होने का आग्रह किया है, साथ ही उन्हें पूरी सुरक्षा देने का आश्वासन भी दिया है।
राज्य सचिवालय नवान्न में बैठक को लेकर अभी भी अनिश्चितता बरकरार है। जूनियर डॉक्टरों के ई मेल के बाद नवान्न में स्वास्थराज्य मंत्री चंद्रिमा भट्टाचार्य, डीजी राजीव कुमार और मुख्य सचिव मनोज पंत ने कहा, दुर्भाग्यवश, वे अब तक नहीं आए हैं। उन्हें चर्चा के लिए आना चाहिए था। हमने जूनियर डॉक्टरों से अनुरोध किया था कि वे काम पर लौटें। लोगों को सेवा देना उनका कर्तव्य है। मैंने उन्हें सुप्रीम कोर्ट के आदेश का पालन करने के लिए भी कहा था।
आंदोलन के पीछे राजनीति : चंद्रिमा
स्वास्थ्य राज्य मंत्री चंद्रिमा भट्टाचार्य ने जूनियर डॉक्टरों के तडक़े 3.49 बजे भेजे गये ईमेल पर सवाल उठाते हुए कहा कि क्या यह स्वाभाविक प्रक्रिया है कि इतनी सुबह बैठक के लिए मेल किया जाये। क्या इसके पीछे कोई राजनीति है? हमने आज अपरान्ह फिर उन्हें ईमेल किया और शाम 6 बजे बैठक के लिए आमंत्रित किया। हम खुले मन से हर मुद्दे पर बातचीत करना चाहते हैं। पर दो घंटे बाद उनका ईमेल आया जिसमें कई शर्तें थी। सशर्ते कोई भी बातचीत खुले मन से नहीं हो सकती। सीएम कल शाम उनका इंतजार कर चली गई। हमने सुप्रीम कोर्ट के दिशानिर्देश के अनुसार अस्पतालों में सुरक्षा के लिए कई कदम उठाये हैं। पर जूनियर डॉक्टरों के रवैये से लगता है कि वे राजनीति के उकसावे में घिर गए हैं। हम चाहते हैं कि जूनियर डॉक्टर सुप्रीम कोर्ट के आदेशानुसार काम पर लौटें और रोगियों को चिकित्सा मुहैया कराने का अपना कर्तव्य पूरा करें।
यह पूछे जाने पर कि क्या सरकार जूनियर डॉक्टरों के काम पर नहीं लौटने की स्थिति में सख्त कदम उठायेगी। इस पर चंद्रिमा ने कहा कि यह सरकार के बातचीत के बाद तय किया जायेगा।