'वो भूल गये है' ये बाबर की सरकार नहीं है: पूर्णिमा चक्रवर्ती
कोलकाता। नीट आंदोलन के दौरान कोलकाता के धर्मतल्ला में हुई कथित हिंसा, पत्रकारों पर हमले और देशविरोधी नारेबाजी के खिलाफ सोमवार को पश्चिम बंगाल भाजपा ने राजधानी की सड़कों पर प्रचंड विरोध मार्च निकाला। पार्टी ने इस प्रदर्शन में अपने संगठनात्मक झंडे के बजाय हाथों में तिरंगा थामकर अपना प्रतिवाद दर्ज कराया। शहर के दो अलग-अलग हिस्सों में निकाले गए इन विरोध जुलूसों के जरिए भाजपा नेताओं और कार्यकर्ताओं ने उपद्रवियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की मांग उठाई।
भाजपा का पहला मुख्य मार्च सियालदह से धर्मतल्ला तक निकाला गया, जबकि दूसरा जुलूस गोलपार्क से जादवपुर तक पहुंचा। इन रैलियों में पार्टी नेताओं और समर्थकों का भारी हुजूम उमड़ा। नेताओं का आरोप था कि बीते शुक्रवार वामपंथी छात्र संगठनों के प्रदर्शन की आड़ में शहर की शांति भंग की गई, उपद्रव मचाया गया और मीडियाकर्मियों को निशाना बनाया गया। सियालदह से शुरू हुए जुलूस में राज्य सरकार के मंत्री तापस राय, भाजपा विधायक सजल घोष, शंकुदेव पंडा और तमोघ्न घोष समेत कई प्रमुख चेहरे शामिल रहे।
प्रदर्शन के दौरान भाजपा नेताओं ने कड़े तेवर दिखाए। राज्य की मंत्री पूर्णिमा चक्रवर्ती ने कहा कि शुक्रवार के दिन को चुनकर रैली निकालने वाले यह न भूलें कि यह बाबर की सरकार नहीं है और किसी भी उपद्रवी को बख्शा नहीं जाएगा। विधायक रितेश तिवारी ने भी हमला बोलते हुए कहा कि शुक्रवार का दिन, विशेष रूट और देश विरोधी नारे यह साफ करते हैं कि प्रदर्शनकारियों की नीयत क्या थी। वहीं विधायक सजल घोष ने तीखा प्रहार करते हुए कहा कि कोने-कोने में छिपे उपद्रवियों को खोजकर निकाला जा रहा है और 16 आरोपी पकड़े जा चुके हैं, बाकी बचे लोगों पर भी सख्त कार्रवाई होगी।
इसके अलावा, भाजपा विधायक विजय ओझा ने कहा कि विपक्षी ताकतें घबराकर अपनी ताकत दिखाने की कोशिश कर रही हैं, लेकिन सनातनी समाज भी उन्हें करारा जवाब देगा। वहीं मंत्री अग्निमित्रा पाल और तापस राय ने स्पष्ट किया कि लोकतांत्रिक विरोध का अधिकार सभी को है, लेकिन आंदोलन की आड़ में हिंसा, पत्रकारों से मारपीट और देशविरोधी गतिविधियों को कतई स्वीकार नहीं किया जाएगा। भाजपा ने मांग की है कि पुलिस पूरे मामले में बिना किसी दबाव के कड़ी से कड़ी कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित करे।