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जब चुनाव प्रचार के बीच आमने-सामने आए तापस और सुप्ति
कोलकाता। विधानसभा चुनाव की बढ़ती तपिश के बीच रविवार को उत्तर कोलकाता के मानिकतला में राजनीति की एक ऐसी तस्वीर दिखी, जिसने कड़वाहट भरे चुनावी माहौल में सियासी शालीनता की मिसाल पेश की। मानिकतला विधानसभा क्षेत्र से भाजपा उम्मीदवार तापस रॉय और इसी क्षेत्र की निर्वतमान विधायक सुप्ति पांडे के बीच हुई अचानक मुलाकात और गर्मजोशी ने सबका ध्यान अपनी ओर खींच लिया। वाकया रविवार सुबह का है, जब भाजपा प्रत्याशी तापस रॉय मानिकतला के कांकरगाछी इलाके में जनसंपर्क अभियान चला रहे थे। उसी समय दिवंगत नेता साधन पांडे की पत्नी सुप्ति पांडे भी अपनी बेटी और तृणमूल की उम्मीदवार श्रेया पांडे के पक्ष में प्रचार करने निकली थीं। दोनों का सामना होते ही राजनीति के अलग-अलग ध्रुव एक मानवीय धरातल पर मिल गए। कभी तृणमूल में लंबे समय तक सहयोगी रहे इन दोनों नेताओं के बीच व्यक्तिगत संबंधों की गर्माहट स्पष्ट नजर आई। मुलाकात के दौरान सुप्ति पांडे ने उस पुराने दिन को याद किया जब तापस रॉय ने तृणमूल छोड़कर भाजपा का दामन थामा था। उन्होंने बताया कि उस दिन तापस ने उन्हें हाथ जोड़कर नमस्कार किया था और अपने जाने की सूचना दी थी। सुप्ति ने कहा कि राजनीति अपनी जगह है, लेकिन निजी रिश्ते अपनी जगह। आज जब वह प्रचार करते मिले तो मैंने हंसी-मजाक में उनसे कहा कि तू ऐसे दिन (वोट मांगने) आया कि मैं तुझे कचौड़ी भी नहीं खिला पाई। वहीं, तापस रॉय ने भी इस मुलाकात को बंगाल की समृद्ध राजनीतिक परंपरा और सौजन्य का प्रतीक बताया। उन्होंने कहा कि उत्तर कोलकाता की राजनीति में साधन पांडे और उनके बीच भले ही कभी वर्चस्व की लड़ाई रही हो, लेकिन व्यक्तिगत सम्मान हमेशा बना रहा। उन्होंने स्वीकार किया कि आजकल की राजनीति में ऐसा आपसी सम्मान और सौजन्य कम होता जा रहा है, जिसे बचाए रखना जरूरी है।
गौरतलब है कि मानिकतला सीट साधन पांडे का अभेद्य किला रही है। उनके निधन के बाद हुए उपचुनाव में सुप्ति पांडे यहाँ से विधायक चुनी गई थीं। अब 2026 के इस संग्राम में तृणमूल ने उनकी बेटी श्रेया पांडे को विरासत संभालने के लिए मैदान में उतारा है, वहीं भाजपा ने पुराने कद्दावर नेता तापस रॉय पर दांव खेला है। चुनावी जंग अपनी जगह है, लेकिन रविवार की इस मुलाकात ने यह संदेश जरूर दिया कि वैचारिक मतभेद व्यक्तिगत रिश्तों की कचौड़ी में कड़वाहट नहीं घोल सकते।