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पूर्व राज्यपाल बोस ने लिखकर जताई आत्मीयता
कोलकाता। निवर्तमान राज्यपाल डॉ. सीवी आनंद बोस ने राजभवन से अपनी विदाई को एक भावुक मोड़ देते हुए बंगाल की जनता के नाम एक खुला पत्र (ओपन लेटर) जारी किया है। बुधवार को जारी इस पत्र में उन्होंने बंगाल को अपना दूसरा घर बताते हुए स्पष्ट किया कि भले ही बतौर राज्यपाल उनकी पारी समाप्त हो रही है, लेकिन इस माटी से उनका जुड़ाव सदैव बना रहेगा। दूसरी ओर, सीएम ममता ने राज्यपाल के अचानक हुए इस इस्तीफे और केंद्र की भूमिका पर तीखे सवाल दागते हुए इसे चुनाव से पहले की एक सोची-समझी रणनीति करार दिया है। डॉ. सीवी आनंद बोस ने अपने पत्र में बंगाल की जनता से मिले स्नेह को याद करते हुए लिखा कि कोलकाता के लोक भवन (राजभवन) में उनका कार्यकाल भले ही समाप्त हो रहा है, लेकिन बंगाल के भाइयों और बहनों के साथ उनका रिश्ता अटूट है।
उन्होंने महात्मा गांधी के उन शब्दों को उद्धृत किया जिसमें बापू ने कहा था कि मैं बंगाल को छोड़ नहीं पा रहा हूं और बंगाल मुझे जाने नहीं दे रहा। बोस ने लिखा कि वह भी आज वैसा ही अनुभव कर रहे हैं। उन्होंने प्रदेश की जनता द्वारा मिले सम्मान, आत्मीयता और यहाँ की महान विरासत को नमन करते हुए कहा कि वे इस पवित्र भूमि का अभिन्न हिस्सा बने रहेंगे। बता दें कि बोस ने 5 मार्च 2026 को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को अपना त्यागपत्र सौंपा था। अपने इस्तीफे को सचेत फैसला बताते हुए उन्होंने क्रिकेट की भाषा में कहा कि 1200 दिनों की पारी पर्याप्त है और अब यह पिच से हटने का सही समय है। हालांकि, इस्तीफे के मूल कारणों को उन्होंने फिलहाल गोपनीय ही रखा है। इधर, राज्यपाल के पदत्याग और नई नियुक्तियों को लेकर राज्य में सियासी पारा चढ़ गया है। मुख्यमंत्री ममता ने धर्मतला में अपने धरने के अंतिम दिन इस मुद्दे पर केंद्र सरकार को जमकर घेरा।
मुख्यमंत्री ने सवाल उठाया कि आखिर चुनाव से महज एक महीने पहले राज्यपाल को बदलने की इतनी जल्दबाजी क्यों दिखाई गई? उन्होंने इसे संदिग्ध बताते हुए आरोप लगाया कि केंद्र सरकार बंगाल को बांटने और लोगों के बीच विभाजन पैदा करने का खेल खेल रही है। ममता बनर्जी ने जैन, बौद्ध, आदिवासी, मुस्लिम और सिख सहित सभी समुदायों का आह्वान करते हुए कहा कि जनता को इस बदलाव के पीछे की मंशा पर विचार करना चाहिए।
राजभवन और राज्य सरकार के बीच लंबे समय से जारी तल्खियों के बीच डॉ. बोस का यह भावुक प्रस्थान और मुख्यमंत्री का हमलावर रुख आने वाले दिनों में बंगाल की राजनीति को एक नई दिशा दे सकता है। जहाँ पूर्व राज्यपाल अपनी विदाई को एक ग्रेसफुल एग्जिट के रूप में देख रहे हैं, वहीं सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस इसे केंद्र की प्रशासनिक बिसात का हिस्सा मान रही है। अब सबकी नजरें इस पर टिकी हैं कि डॉ. बोस के जाने के बाद राजभवन और नवान्न के रिश्तों में क्या बदलाव आता है और आने वाले चुनावों पर इसका क्या प्रभाव पड़ता है।