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12 साल पुराने जब्त विदेशी मुद्रा कांड की फाइल फिर खुली, अपनों पर ही घूम रही शक की सुई
कोलकाता। कोलकाता के नेताजी सुभाष चंद्र बोस अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे का वह कमरा, जहां कस्टम्स विभाग की सबसे गुप्त और सुरक्षित विंग एयर इंटेलिजेंस यूनिट का लोहे का भारी-भरकम लॉकर रखा है, इन दिनों जांच एजेंसियों के लिए एक अनसुलझी पहेली बन चुका है। आम तौर पर जहां परिंदा भी पर नहीं मार सकता, उस अभेद्य तिजोरी से करीब 55 लाख रुपये मूल्य की विदेशी मुद्रा (50 हजार यूरो) रहस्यमयी तरीके से हवा में गायब हो गई है। विभागीय लॉकर से इस भारी-भरकम रकम के गायब होने की खबर ने पूरे प्रशासनिक महकमे में हड़कंप मचा दिया है। जब कडिय़ों को जोडऩे की कोशिशें नाकाम रहीं और कस्टम्स की आंतरिक जांच के सारे रास्ते बंद हो गए, तो आखिरकार इस हाई-प्रोफाइल इनसाइडर जॉब की गुत्थी को सुलझाने की जिम्मेदारी कोलकाता पुलिस के हवाले कर दी गई।
इस सनसनीखेज वारदात की जड़ें आज से ठीक 12 साल पहले, यानी साल 2014 के एक धुंधले घटनाक्रम से जुड़ी हैं। उस वक्त उत्तर 24 परगना का रहने वाला राजकुमार दास नाम का एक शख्स बैंकॉक जाने की फिराक में हवाई अड्डे पर बोर्डिंग पास की कतार में खड़ा था। उसकी संदिग्ध हरकतों ने सुरक्षाकर्मियों को चौंकाया और जब उसके सामान की सघन तलाशी ली गई, तो अधिकारियों की आंखें फटी की फटी रह गईं। उसके पास से 50 हजार यूरो के कड़कड़ाते नोट बरामद हुए, जिन्हें वह बिना किसी वैध घोषणा के देश से बाहर तस्करी करने की कोशिश कर रहा था। पूछताछ की कड़कती कडिय़ों के बीच राजकुमार ने कुबूल किया था कि वह महज 10 हजार रु. के लालच में इस काली कमाई को किसी तीसरे शख्स तक पहुंचाने के लिए एक मोहरे के तौर पर इस्तेमाल हो रहा था। कस्टम्स ने उस वक्त की कीमत के हिसाब से करीब 41.52 लाख रु. मूल्य के उन यूरो नोटों को तुरंत जब्त कर लिया और साल 2021 में बारासात अदालत को इसकी आधिकारिक जब्ती की रिपोर्ट सौंप दी।
लेकिन असली खेल तो पर्दे के पीछे चल रहा था, जिसका खुलासा पिछले साल यानी 2023 में तब हुआ जब विभागीय नियमों के तहत इस जब्त विदेशी मुद्रा को हवाई अड्डे के लॉकर से निकालकर सुरक्षित बैंक कस्टडी में भेजने की कागजी प्रक्रिया शुरू हुई। जिम्मेदार अधिकारी जब चाबियों का गुच्छा लेकर उस लोहे की तिजोरी को खोलने पहुंचे, तो उनके होश उड़ गए; अंदर सन्नाटा पसरा था और 50 हजार यूरो का वह पैकेट गायब था। इस बड़े झटके के बाद विभाग ने आनन-फानन में आंतरिक जांच की गुप्त कमेटी बिठाई। जांच में जो सच सामने आया, उसने अधिकारियों के भी कान खड़े कर दिए। लॉकर को खोलने और बंद करने से जुड़े सरकारी लॉग-बुक और आधिकारिक दस्तावेजों के साथ बकायदा छेड़छाड़ की गई थी और कई महत्वपूर्ण कडिय़ों व सबूतों को जानबूझकर नष्ट कर दिया गया था।
क्राइम इनवेस्टिगेशन के जानकारों का साफ कहना है कि देश के सबसे सुरक्षित हवाई अड्डों में से एक के भीतर, कस्टम्स के सबसे गोपनीय लॉकर तक किसी बाहरी अपराधी या चोर का पहुंचना नामुमकिन के बराबर है। इसका सीधा और साफ मतलब यह है कि इस सस्पेंस थ्रिलर का असली विलेन विभाग के ही भीतर बैठा कोई विभीषण है, जिसे लॉकर की चाबियों और सुरक्षा खामियों की पल-पल की खबर थी। आंतरिक जांच में जब चोर का चेहरा बेनकाब नहीं हो सका, तो एयर इंटेलिजेंस यूनिट के सहायक आयुक्त अनिल कुमार दास ने 5 जून को एयरपोर्ट थाने में एक लिखित तहरीर दी, जिसके आधार पर पुलिस ने 11 जून को भारतीय न्याय संहिता की संगीन धाराओं में एफआईआर दर्ज कर ली। 12 साल पुराने इस मामले के दस्तावेज अब धूल झाड़कर बाहर निकाले जा रहे हैं, लेकिन डिजिटल दौर में फाइलों और पुराने रिकॉर्ड्स में की गई छेड़छाड़ की परतों को खोलना पुलिस के लिए भी लोहे के चने चबाने जैसा साबित हो रहा है। फिलहाल, इस रहस्यमयी गायब खजाने ने कोलकाता पुलिस की रातों की नींद उड़ा रखी है।