पेपर लीक मामलों के लिए गठित होंगे फास्ट ट्रैक कोर्ट : प्रधानमंत्री
वीआईपी रोड अवैध निर्माण मामले में हाईकोर्ट सख्त, डीएम को होना पड़ा पेश
कोलकाता। कोलकाता के व्यस्ततम वीआईपी रोड के दोनों ओर लंबे समय से जारी अवैध निर्माणों और अतिक्रमण के मुद्दे पर हाईकोर्ट ने कड़ा और सख्त रुख अपनाया है। अदालत के कड़े निर्देशों का पालन करते हुए उत्तर 24 परगना के जिलाधिकारी (डीएम) को व्यक्तिगत रूप से हाईकोर्ट में उपस्थित होना पड़ा। कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश तपोब्रत चक्रवर्ती और न्यायमूर्ति पार्थसारथी चट्टोपाध्याय की खंडपीठ ने सुनवाई के दौरान राज्य प्रशासन को दोटूक चेतावनी दी कि अवैध निर्माण हटाने के बाद उस स्थान पर दोबारा कब्जा न होने देने की पूरी और नैतिक जिम्मेदारी राज्य सरकार व स्थानीय प्रशासन की होगी।
खंडपीठ ने बेहद सख्त लहजे में कहा कि अक्सर यह देखने में आता है कि प्रशासन अदालत में कागजी रिपोर्ट दाखिल करके अतिक्रमण हटाने का दावा तो कर देता है, लेकिन कुछ ही दिनों के भीतर वही लोग फिर से उसी जगह काबिज हो जाते हैं। अदालत ने स्पष्ट किया कि यदि अतिक्रमण हटाए जाने के हफ्ते-दस दिन के भीतर दोबारा अवैध कब्जा होता है, तो इसे अदालत की अवमानना माना जाएगा और संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कठोरतम कार्रवाई की जाएगी। यह जनहित याचिका अर्धेंदु नाग द्वारा दायर की गई है, जिसमें उल्टाडांगा तक वीआईपी रोड के दोनों ओर बने अवैध निर्माणों और अतिक्रमण को तुरंत हटाने की गुहार लगाई गई थी।
सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता के वकील ने सनसनीखेज दावा करते हुए कहा कि केस्टोपुर से दमदम पार्क तक सिंचाई विभाग की कीमती जमीन पर अवैध बस्तियां बसा दी गई हैं, जहां बड़ी संख्या में संदिग्ध लोग रह रहे हैं। इसके अलावा लेकटाउन इलाके में सड़क किनारे अवैध पार्किंग का कारोबार धड़ल्ले से जारी है। उन्होंने आरोप लगाया कि धरातल पर अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। हालांकि, राज्य के महाधिवक्ता सुरजीत नाथ मित्र ने इन दावों का खंडन करते हुए पीठ को बताया कि चिन्हित 24 अवैध निर्माणों में से 10 को ध्वस्त कर दिया गया है और शेष को हटाने का काम तेजी से जारी है।
महाधिवक्ता ने अदालत को आश्वस्त करते हुए कहा कि यह केवल कोई राजनीतिक बयानबाज़ी नहीं, बल्कि प्रशासनिक प्रतिबद्धता है कि इस बार हटाए गए स्थानों पर दोबारा किसी भी कीमत पर अवैध कब्जा नहीं होने दिया जाएगा। खंडपीठ ने माना कि याचिकाकर्ता की इस जनहित पहल से लंबे समय से लटकी व्यवस्था में सकारात्मक बदलाव की शुरुआत हुई है। अदालत ने मामले की अगली सुनवाई 18 अगस्त तय की है, जिस दिन उत्तर 24 परगना के जिलाधिकारी को नई प्रगति रिपोर्ट के साथ पुन: अदालत के समक्ष व्यक्तिगत रूप से उपस्थित रहना होगा।