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तापस राय ने पाठ्यक्रम में इतिहास के 'भूले अध्याय' शामिल करने की मांग
कोलकाता। पश्चिम बंगाल दिवस के अवसर पर राज्य की नई सरकार के मंत्रियों ने इतिहास के शैक्षणिक पाठ्यक्रम को लेकर एक नई बहस छेड़ दी है। राज्य के उद्योग मंत्री तापस रॉय ने स्कूलों की पाठ्यपुस्तकों में बंगाल के विभाजन, विभाजनकालीन सांप्रदायिक हिंसा और डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की भूमिका से जुड़े अध्यायों को शामिल करने की पुरजोर वकालत की है। विधानसभा में चर्चा के दौरान उन्होंने कहा कि नई पीढ़ी को पश्चिम बंगाल के गठन और उस दौर की ऐतिहासिक घटनाओं की समग्र व वास्तविक जानकारी मिलना बेहद जरूरी है।
उद्योग मंत्री तापस रॉय ने रेखांकित किया कि विभाजन के समय बंगाल में हुई भीषण हिंसा तथा नोआखाली और ढाका जैसी ऐतिहासिक त्रासदियों का वर्तमान पाठ्यक्रम में पर्याप्त उल्लेख नहीं मिलता। उन्होंने विधानसभा अध्यक्ष के माध्यम से मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी से आग्रह किया कि इन घटनाओं को स्कूली पाठ्यक्रम का हिस्सा बनाया जाए ताकि छात्र राज्य के निर्माण की सही पृष्ठभूमि को समझ सकें। उनके अनुसार, पिछले आठ दशकों में इतिहास के कई महत्वपूर्ण अध्याय और संघर्ष राजनीतिक कारणों से शैक्षणिक अध्ययन से दूर कर दिए गए थे।
इसी सुर में सुर मिलाते हुए राज्य के मंत्री शंकर घोष और केंद्रीय मंत्री सुकांत मजूमदार ने भी इस मांग का समर्थन किया। सुकांत मजूमदार ने कहा कि पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के कार्यकाल के बाद अब समय आ गया है कि डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के योगदान को शैक्षणिक स्तर पर उचित स्थान मिले। उन्होंने राज्य सरकार से पाठ्यपुस्तकों में एक अलग अध्याय जोडऩे की अपील की। राज्य में नई सरकार के आने के बाद से ही शिक्षा नीति में बदलाव के संकेत मिल रहे हैं, ऐसे में मंत्रियों का यह रुख आने वाले समय में पाठ्यक्रम संशोधन की विशेषज्ञ समितियों के लिए एक बड़ा एजेंडा बन सकता है।