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नपे कसबा थाने के ओसी, लापरवाही पर गिरी निलंबन की गाज
कोलकाता। विधानसभा चुनाव की आहट के साथ ही भारत निर्वाचन आयोग पूरी तरह एक्शन मोड में नजर आ रहा है। राज्य की कानून-व्यवस्था को लेकर अपनी जीरो टॉलरेंस नीति को स्पष्ट करते हुए आयोग ने एक बेहद सख्त कदम उठाया है। कोलकाता के कसबा थाने के ओसी को उनके पद से निलंबित कर दिया गया है। इस कड़ी कार्रवाई के पीछे की मुख्य वजह कुख्यात अपराधी 'सोना पप्पू' उर्फ विश्वजीत पोद्दार का नाम सक्रिय अपराधियों की सूची में शामिल न होना बताया जा रहा है। आयोग ने इसे सीधे तौर पर चुनावी निर्देशों की अवहेलना और कर्तव्य के प्रति गंभीर लापरवाही माना है। निर्वाचन आयोग ने चुनाव की घोषणा से पहले ही राज्य और कोलकाता पुलिस को स्पष्ट गाइडलाइन जारी की थी, जिसमें हर थाने के प्रभारी को अपने क्षेत्र के फरार और घोषित अपराधियों का पूरा कच्चा चि_ा तैयार करने की जिम्मेदारी सौंपी गई थी।
आयोग का स्पष्ट निर्देश था कि पिछले चुनावों में अशांति फैलाने वाले और आपराधिक रिकॉर्ड वाले चेहरों की पहचान कर उन पर नकेल कसी जाए। कसबा थाने के ओसी पर आरोप है कि उन्होंने इन महत्वपूर्ण निर्देशों को ठंडे बस्ते में डाल दिया और सोना पप्पू जैसे रसूखदार अपराधी को सूची से बाहर रखकर सुरक्षा व्यवस्था में सेंध लगाने का मौका दिया। आयोग की इस सख्ती का दायरा केवल सूची बनाने तक सीमित नहीं है, बल्कि उसने गैर-जमानती वारंटों को तत्काल तामील करने और किसी भी लंबित मामले को दस दिनों के भीतर निपटाने का अल्टीमेटम भी दिया था। इसके साथ ही फरार आरोपियों की धरपकड़ के लिए विशेष अभियान चलाने और जिला पुलिस के बीच बेहतर तालमेल बिठाने की बात कही गई थी। संवेदनशील इलाकों की पहचान और 16 बिंदुओं पर आधारित विशेष कार्ययोजना को लागू करने में बरती गई सुस्ती अब पुलिस अधिकारियों के लिए गले की फांस बनती जा रही है। 'सोना पप्पूÓ के आपराधिक इतिहास की बात करें तो उसका नाम हाल ही में रवींद्र सरोवर क्षेत्र में हुई हिंसक घटनाओं में प्रमुखता से उभरा था। हालांकि वह अब तक पुलिस की पकड़ से बाहर है, लेकिन प्रवर्तन निदेशालय की हालिया कार्रवाई ने उसके सिंडिकेट की कमर तोड़ दी है।
छापेमारी के दौरान उसके ठिकानों से दो करोड़ रुपये की नकदी, लग्जरी गाडिय़ां और बेनामी संपत्तियों के दस्तावेज बरामद हुए हैं। तौलाबाजी, धमकी और सिंडिकेट राज चलाने वाले इस अपराधी पर नकेल न कस पाना पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवालिया निशान लगा रहा था, जिसे देखते हुए आयोग ने ओसी को सस्पेंड कर पूरे विभाग को चेतावनी दी है।
चुनाव आयोग के इस कड़े रुख ने स्पष्ट कर दिया है कि चुनाव के दौरान किसी भी प्रकार की कोताही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। ओसी के निलंबन ने पूरे पुलिस महकमे में हलचल मचा दी है और यह संदेश भी दिया है कि यदि चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता और शांति में कोई भी बाधा आई, तो जिम्मेदार अधिकारी को बख्शा नहीं जाएगा। अब पुलिस प्रशासन पर दबाव है कि वे जल्द से जल्द फरार अपराधियों को सलाखों के पीछे भेजें और आयोग के मानकों पर खरे उतरें।