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'8 लाख वोटों से जीतने वाले सांसद अब पीसी के घर में छिपे हैं'

फलता में अभिषेक की गुमशुदगी पर सुजन का करारा तंज

19 May 2026

'8 लाख वोटों से जीतने वाले सांसद अब पीसी के घर में छिपे हैं'

कोलकाता। फलता विधानसभा उपचुनाव के हाई-प्रोफाइल दंगल में प्रचार के अंतिम दिन मंगलवार को राजनीतिक सरगर्मियां और व्यक्तिगत हमले अपने चरम पर पहुंच गए। एक तरफ जहाँ भाजपा और वामपंथी दलों ने समूचे निर्वाचन क्षेत्र में अपनी पूरी ताकत झोंकते हुए आक्रामक चुनाव प्रचार किया, वहीं दूसरी तरफ मैदान में सत्ताधारी रही तृणमूल का झंडा और प्रचार तंत्र पूरी तरह से नदारद दिखाई दिया। टीएमसी की इस अप्रत्याशित खामोशी और निष्क्रियता का फायदा उठाते हुए माकपा के वरिष्ठ नेता सुजन चक्रवर्ती ने अभिषेक बनर्जी पर अब तक का सबसे बड़ा और तीखा हमला बोला है। सुजन ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक बेहद व्यंग्यात्मक पोस्ट साझा करते हुए लिखा कि जो सांसद पिछले चुनाव में आठ लाख वोटों के रिकॉर्ड अंतर से जीतकर खुद को अजेय समझ रहे थे, वे आज राजनीतिक संकट के समय मैदान छोड़कर अपनी पीसी यानी ममता के घर में शरण लिए बैठे हैं। इस विस्फोटक बयान के सामने आते ही बंगाल की सियासी बिसात पर एक नई और तीखी बहस छिड़ गई है। 
दरअसल, फलता विधानसभा क्षेत्र में आगामी गुरुवार को पुनर्मतदान होना है, लेकिन राज्य में हुए ऐतिहासिक सत्ता परिवर्तन के बाद से ही अभिषेक बनर्जी को अपने इस बेहद करीबी और प्रभाव वाले इलाके में सक्रिय रूप से प्रचार करते हुए नहीं देखा गया है। चुनाव आयोग द्वारा दोबारा मतदान की घोषणा किए जाने के बावजूद उन्होंने अपनी पार्टी के आधिकारिक उम्मीदवार के समर्थन में न तो कोई जनसभा की और न ही किसी रोड शो में हिस्सा लिया। हैरानी की बात यह है कि हमेशा डिजिटल माध्यमों पर सक्रिय रहने वाले अभिषेक बनर्जी ने सोशल मीडिया पर भी फलता उपचुनाव को लेकर पूरी तरह से रहस्यमयी चुप्पी साध रखी है। इसी गंभीर मुद्दे को हवा देते हुए सुजन ने जनता के बीच यह यक्ष प्रश्न खड़ा कर दिया कि आखिर डायमंड हार्बर के इतने कद्दावर सांसद इस संकट काल में कहाँ गायब हैं। उन्होंने कटाक्ष करते हुए कहा कि एक तरफ विपक्ष के तमाम नेता और खुद मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी जमीन पर उतरकर लगातार रैलियां कर रहे हैं, लेकिन भारी-भरकम पुलिस सुरक्षा घेरे और कमांडो के साए में चलने वाले सांसद आज जनता के सामने आने से कतरा रहे हैं।
यह पूरा विवाद इसलिए भी तूल पकड़ रहा है क्योंकि दक्षिण 24 परगना जिले को हमेशा से अभिषेक बनर्जी का सबसे मजबूत राजनीतिक गढ़ माना जाता रहा है। डायमंड हार्बर लोकसभा सीट से सांसद अभिषेक ने पिछले आम चुनाव में करीब 8 लाख वोटों के ऐतिहासिक अंतर से रिकॉर्ड जीत दर्ज की थी, जिसके बाद तृणमूल कांग्रेस की ओर से उनके तथाकथित 'डायमंड हार्बर मॉडलÓ का पूरे देश में ढिंढोरा पीटा गया था। 
विधानसभा चुनाव की घोषणा से पहले भी अभिषेक ने खुले मंच से हुंकार भरी थी कि दक्षिण 24 परगना जिले की सभी विधानसभा सीटों पर तृणमूल का एकतरफा कब्जा रहेगा। लेकिन हाल ही में आए चुनाव परिणामों ने पूरी तस्वीर को उलट कर रख दिया, जहाँ दक्षिण 24 परगना समेत राज्य के बड़े हिस्से में तृणमूल कांग्रेस को करारी शिकस्त का सामना करना पड़ा और भाजपा ने पूर्ण बहुमत के साथ राज्य में अपनी नई सरकार का गठन कर लिया। 
फलता उपचुनाव के प्रचार के आखिरी दिन इस राजनीतिक ड्रामे ने उस वक्त एक बेहद नाटकीय और शर्मनाक मोड़ ले लिया, जब तृणमूल कांग्रेस के घोषित उम्मीदवार और इलाके के रसूखदार नेता जाहांगिर खान ने अचानक एक संवाददाता सम्मेलन बुलाकर चुनावी मुकाबले से हटने का सनसनीखेज ऐलान कर दिया। जाहांगिर खान ने न सिर्फ चुनाव लडऩे से मना किया, बल्कि मंच से नए मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी की कार्यशैली की खुलकर प्रशंसा भी की। राजनीतिक हलकों में इस घटनाक्रम को तृणमूल कांग्रेस के लिए एक और बड़ा झटका माना जा रहा है। अब जाहांगिर खान के इस तरह अचानक आत्मसमर्पण करने को लेकर विपक्ष टीएमसी को चारों तरफ से घेर रहा है। सुजन चक्रवर्ती ने भी इसी संदर्भ में अंतिम प्रहार करते हुए कहा कि अभिषेक बनर्जी के संरक्षण में पलने वाला और इलाके को अपने रसूख के दम पर चलाने वाला नेता आखिरकार नई सरकार के प्रशासनिक हंटर के आगे घुटने टेककर भाग खड़ा हुआ है। फलता में बदले इन अभूतपूर्व समीकरणों और उस पर तृणमूल शीर्ष नेतृत्व की लाचारी भरी चुप्पी ने यह साफ कर दिया है कि आने वाले दिनों में यह मुद्दा राज्य की राजनीति को और अधिक सुलगने के लिए मजबूर करेगा।

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