हेलमेट न पहनने के कुल 1,834 मामले
कोलकाता। नए वर्ष के पूर्व संध्या में लोग जश्न में डूबे हुए थे। ऐसे में कोलकाता पुलिस की टीम ने भी महानगर में निगरानी रखी थी। कोलकाता पुलिस ने सुरक्षा और कानून व्यवस्था बनाए रखने और ट्रैफिक नियमों का उल्लंघन करने वालों और अन्य कानून तोडऩे वालों पर पुलिस ने कड़ी कार्रवाई की। पुलिस रिपोर्ट के अनुसार, 31 दिसंबर को 12000 से अधिक ट्रैफिक उल्लंघन मामले दर्ज किए गए और 436 मनचलों को गिरफ्तार किया गया। इसके अलावा, 9 किलो ग्राम पटाखें और 38.6 लीटर अवैध शराब जब्त किए गए है। ट्रैफिक नियम उल्लंघन पर बड़ा एक्शन लेते हुए पुलिस ने 12,188 मामले दर्ज किए। पुलिस की रिपोर्ट के अनुसार, शराब पीकर गाड़ी चलाने के कुल 138 मामले दर्ज किए गए। इसके अलावा, रैश ड्राइविंग के 267, मोबाइल फोन का उपयोग करते हुए गाड़ी चलाने के 9, और ओवरस्पीडिंग के 389 मामले सामने आए।
वहीं, गलत दिशा में गाड़ी चलाने के 79 और सिग्नल तोडऩे के 1,769 मामलों में चालान किया गया। हेलमेट न पहनने के कुल 1,834 मामले और तीन सवारी लेकर गाड़ी चलाने के 403 मामले भी दर्ज किए गए। जश्न के दौरान अवैध शराब के सेवन और बिक्री पर लगाम लगाने के लिए पुलिस ने विशेष अभियान चलाया। रिपोर्ट के अनुसार, 436 हुड़दग मचाने वालों को गिरफ्तार किया गया और 38.6 लीटर अवैध शराब जब्त की गई। पुलिस अधिकारियों के अनुसार, यह कदम सड़क सुरक्षा को बनाए रखने और दुर्घटनाओं को कम करने के लिए उठाया गया था। नए साल की रात को सड़कों पर अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया। शहरभर में चेकपॉइंट्स लगाए गए, जहां वाहनों की जांच की गई।
इसके अलावा, संवेदनशील क्षेत्रों में सीसीटीवी कैमरों के जरिए निगरानी की गई और पेट्रोलिंग बढ़ाई गई। पुलिस प्रशासन ने नए साल से पहले ही लोगों से अपील की थी कि वे ट्रैफिक नियमों का पालन करें और जिम्मेदारी से जश्न मनाएं। बावजूद इसके, बड़ी संख्या में ट्रैफिक नियमों का उल्लंघन हुआ, जिससे सड़क सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े होते हैं। बता दे कि 27 से 30 दिसंबर 2024 तक यातायात नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की गई। चार दिनों के दौरान 45,927 चालान काटे गए थे।
महानगर कोलकाता में तेज रफ्तार से वाहन चलाने और सिग्नल तोडऩे का चलन काफी पुराना है। अक्सर अत्यधिक गति के कारण वाहन हादसे के शिकार होते हैं और कई बार सिग्नल तोड़कर आगे निकलने की होड़ में भी हादसे हो जाते हैं। बावजूद इसके न तो रफ्तार का शौक कम रहा है और न ही सिग्नल तोडऩे का सिलसिला। कई बार अत्यधिक रफ्तार के कारण सड़क हादसों में मौत की घटना होती है।