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मैदान से सियासत के अखाड़े तक : गोलकीपर अरिंदम भट्टाचार्य की भाजपा में 'रिएंट्री'
कोलकाता। बंगाल की राजनीति में एक बार फिर फुटबॉल और राजनीति का दिलचस्प मेल देखने को मिल रहा है। भारतीय राष्ट्रीय टीम के पूर्व दिग्गज गोलकीपर अरिंदम भट्टाचार्य ने आगामी 2026 विधानसभा चुनाव से ठीक पहले एक बार फिर भारतीय जनता पार्टी का दामन थाम लिया है।
साल्टलेक स्थित पार्टी के राज्य मुख्यालय में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान प्रदेश अध्यक्ष सुकांत मजूमदार और वरिष्ठ नेता लॉकेट चटर्जी ने उन्हें पार्टी का झंडा थमाया। दिलचस्प बात यह है कि अरिंदम की यह भाजपा में दूसरी औपचारिक पारी है। इससे पहले 2021 के विधानसभा चुनाव से ठीक पहले भी वे मिथुन चक्रवर्ती और अमित मालवीय की उपस्थिति में भगवा खेमे में शामिल हुए थे। हालांकि, पिछले कुछ वर्षों में उनकी राजनीतिक सक्रियता न के बराबर रही थी। अब 2026 की चुनावी जंग से पहले उनकी दोबारा एंट्री को भाजपा की सेलिब्रिटी आउटरीच रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है। भाजपा की सदस्यता लेने के बाद अरिंदम भट्टाचार्य ने स्पष्ट किया कि वे पिछले काफी समय से शीर्ष नेतृत्व के संपर्क में थे। उन्होंने बताया कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात और चर्चा के बाद ही उन्होंने सक्रिय राजनीति में उतरने का अंतिम फैसला लिया।
अरिंदम ने कहा कि 2021 में मैं अपने खेल और पेशेवर प्रतिबद्धताओं के कारण पार्टी को पर्याप्त समय नहीं दे सका था। लेकिन अब मैं सक्रिय खेल से संन्यास ले चुका हूँ और अपना पूरा समय संगठन की मजबूती और बंगाल के फुटबॉल ढांचे में सुधार के लिए देना चाहता हूँ। अरिंदम भट्टाचार्य भारतीय फुटबॉल का एक बड़ा नाम रहे हैं। लगभग 12 वर्षों तक भारतीय टीम की रक्षा पंक्ति की अंतिम दीवार रहे अरिंदम ने कोलकाता के दो सबसे बड़े प्रतिद्वंद्वी क्लबों—मोहन बागान और ईस्ट बंगाल—दोनों का प्रतिनिधित्व किया है। वे आईएसएल में मुंबई सिटी, पुणे सिटी और नॉर्थईस्ट यूनाइटेड जैसी टीमों के लिए भी खेल चुके हैं। हाल ही में इंटर काशी के साथ आई-लीग का खिताब जीतकर उन्होंने अपने पेशेवर करियर को एक नई ऊंचाई दी थी। अरिंदम की इस री-जॉइनिंग को लेकर राजनीतिक गलियारों में चर्चाएं और कटाक्ष भी शुरू हो गए हैं। तृणमूल कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों ने सवाल उठाया है कि जब अरिंदम ने कभी भाजपा छोड़ी ही नहीं थी, तो उन्हें दोबारा शामिल कराने का तमाशा क्यों किया जा रहा है?
आलोचकों का कहना है कि यह भाजपा की संगठनात्मक कमजोरी को दर्शाता है, जहाँ पुराने चेहरों को ही बार-बार नया बताकर पेश किया जा रहा है। वहीं, भाजपा नेतृत्व का मानना है कि अरिंदम जैसे युवाओं के चहेते खिलाड़ी के आने से उत्तर और दक्षिण कोलकाता के युवा मतदाताओं के बीच सकारात्मक संदेश जाएगा। अब देखना यह होगा कि क्या भाजपा इस बार अरिंदम भट्टाचार्य को चुनावी मैदान में उतारकर उन्हें कोई बड़ी जिम्मेदारी सौंपती है या वे केवल एक स्टार प्रचारक की भूमिका तक सीमित रहेंगे।