एसआईआर के बाद निर्वाचन क्षेत्र का भूगोल बदला
कोलकाता। बंगाल में मतदाता सूची के एसआईआर के बाद दक्षिण कोलकाता की चार प्रमुख विधानसभा सीटों के आंकड़ों में बड़े उलटफेर के संकेत मिले हैं। शनिवार को प्रकाशित आंशिक रूप से अंतिम मतदाता सूची के अनुसार, मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के निर्वाचन क्षेत्र भवानीपुर सहित तीन सीटों पर मतदाताओं की संख्या में गिरावट दर्ज की गई है, जबकि बालीगंज में मतदाताओं का ग्राफ कुछ ऊपर चढ़ा है। हालांकि, चुनाव आयोग ने स्पष्ट किया है कि 78 हजार से अधिक नामों का भाग्य अभी भी विचाराधीन श्रेणी में लटका हुआ है।
हाई-प्रोफाइल भवानीपुर सीट, आधिकारिक सूत्रों के अनुसार, इस हाई-प्रोफाइल सीट पर अब तक कुल 47,094 मतदाताओं के नाम सूची से बाहर कर दिए गए हैं। चुनावी गणित के लिहाज से यह एक बहुत बड़ी संख्या है, जो आने वाले विधानसभा चुनाव की बिसात बदल सकती है। आंकड़ों का विश्लेषण करें तो पता चलता है कि यह छंटनी दो चरणों में हुई है। पहले, खसड़ा (ड्राफ्ट) मतदाता सूची के प्रकाशन के दौरान ही लगभग 44,770 से कुछ अधिक नाम काट दिए गए थे। इसके बाद शनिवार को जारी हुई अंतिम सूची में अतिरिक्त 2,324 नाम और हटा दिए गए। इस प्रकार, कुल मिलाकर 47,094 लोग अब भवानीपुर की मतदाता सूची से बाहर हो चुके हैं। ड्राफ्ट सूची में मतदाताओं की संख्या 1,61,525 से घटकर अब 1,59,201 रह गई है। खसड़ा सूची की तुलना में यहाँ 2,324 नाम कम हुए हैं। गौर करने वाली बात यह है कि अभी भी 14,154 मतदाताओं के दस्तावेजों का सत्यापन बाकी है, जिससे आने वाले दिनों में यह संख्या और भी कम हो सकती है। मेयर फिरहाद हकीम के प्रभाव वाले कोलकाता पोर्ट क्षेत्र में केवल 496 नामों की मामूली गिरावट देखी गई है, लेकिन यहाँ विचाराधीन नामों की संख्या 32,378 है, जो जिले में सबसे अधिक है।
वहीं, रासबिहारी विधानसभा क्षेत्र में 1,066 मतदाताओं के नाम कम हुए हैं और यहाँ 8,157 नामों पर अभी फैसला होना बाकी है। दक्षिण कोलकाता की अन्य सीटों के उलट बालीगंज में मतदाताओं की संख्या में 679 की वृद्धि दर्ज की गई है। यहाँ कुल मतदाताओं की संख्या 1,90,704 पहुंच गई है। हालांकि, यहाँ भी 23,968 नामों के सामने विचाराधीन का टैग लगा हुआ है, जो संकेत देता है कि यह बढ़त स्थायी नहीं भी हो सकती है।
मुख्य निर्वाचन अधिकारी मनोज कुमार अग्रवाल के अनुसार, शनिवार को जारी की गई सूची सुप्रीम कोर्ट के 28 फरवरी वाले निर्देश के अनुपालन में प्रकाशित की गई है। इसे पूर्णत: अंतिम नहीं माना जा सकता। राज्यभर में करीब 60 लाख नाम अभी भी जांच के दायरे में हैं।
कोलकाता हाईकोर्ट द्वारा नियुक्त न्यायिक अधिकारी इन विसंगतियों की गहराई से जांच कर रहे हैं, ताकि चुनावी प्रक्रिया की शुचिता बनी रहे। कुल मिलाकर, दक्षिण कोलकाता के इन 1,093 बूथों पर चल रही नाम काटो-नाम जोड़ो की प्रक्रिया ने सभी राजनीतिक दलों की धड़कनें बढ़ा दी हैं। विशेषकर उन सीटों पर जहाँ जीत का अंतर कम रहता है, वहाँ विचाराधीन नामों का अंतिम फैसला ही 2026 की तकदीर तय करेगा।