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सुंदरबन का जलमार्ग बना घुसपैठ का जरिया
सागरद्वीप। मकर संक्रांति के पावन अवसर पर पुण्य स्नान की लालसा में 47 बांग्लादेशी हिंदुओं द्वारा अवैध रूप से भारतीय सीमा में प्रवेश करने का सनसनीखेज मामला सामने आया है। इस घुसपैठ का खुलासा तब हुआ जब तीन वर्षीय एक बालक अपनी मां से बिछड़ गया और बच्चे को पाने की मजबूरी में महिला को अपनी वास्तविक पहचान उजागर करनी पड़ी। पकड़ी गई महिला नयना दास ने बताया कि वह अपने तीन साल के बेटे रुद्र और 46 अन्य लोगों के साथ एक एजेंट की सहायता से अवैध मार्ग से भारत पहुंची थी। नयना के मुताबिक, उनके साथ आए दल में अधिकांश बुजुर्ग थे जो मकर संक्रांति पर गंगासागर में डुबकी लगाना चाहते थे। भारत में प्रवेश करते ही पहचान छिपाने के लिए सभी लोग अलग-अलग दिशाओं में चले गए थे।
महिला का कहना है कि बांग्लादेश की मौजूदा अस्थिर परिस्थितियों के कारण पासपोर्ट-वीजा मिलना लगभग असंभव है, जिसके चलते उन्हें यह जोखिम उठाना पड़ा। लापता बच्चे को ढूंढने में वेस्ट बंगाल रेडियो क्लब (हैम रेडियो) ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। संस्था के सचिव अंबरीश नाथ बिश्वास ने बताया कि रोता हुआ बच्चा मिलने के बाद जब नेटवर्क के जरिए उसकी मां को तलाशा गया, तो पूछताछ में चौंकाने वाला सच सामने आया। महिला बांग्लादेश के दक्षिण हातिया क्षेत्र की निवासी निकली। मानवीय आधार पर बच्चे को मां से मिलाने के बाद, महिला और बच्चों को स्थानीय पुलिस के सुपुर्द कर दिया गया है। बजरंग परिषद के सेवा मंत्री प्रेमनाथ दुबे ने इस घटना पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि गंगासागर की भौगोलिक स्थिति बांग्लादेश के बेहद करीब है। हर साल बड़ी संख्या में बांग्लादेशी हिंदू सुंदरबन के दुर्गम रास्तों और जलमार्ग से मोटर चालित नावों (भुटभुटी) के जरिए अवैध रूप से यहां पहुंचते हैं। यद्यपि उनका उद्देश्य केवल धार्मिक है, परंतु बिना वैध दस्तावेजों के प्रवेश कानूनन अपराध है। मेला प्रांगण में सेवा शिविर चलाने वाले कार्यकर्ताओं का कहना है कि वे हर तीर्थयात्री का रिकॉर्ड रखते हैं, लेकिन अवैध रूप से आने वाले लोग अक्सर फर्जी दस्तावेजों का सहारा लेते हैं।
बिश्वास ने बताया कि पिछले 36 वर्षों में उन्होंने कई ऐसे मामले देखे हैं जहां बांग्लादेशी नागरिक पहचान छिपाकर मेले में शामिल होते हैं। गंगासागर पहुंचे पुरी के शंकराचार्य निश्चलानंद सरस्वती महाराज ने इस स्थिति पर तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि बांग्लादेश में हिंदुओं पर हो रहे अत्याचार वहां के बहुसंख्यक समाज की अदूरदर्शिता का परिणाम है। उन्होंने जोर देकर कहा कि जब तक हिंदू सुरक्षित नहीं होंगे, तब तक मानवता की सुरक्षा सुनिश्चित नहीं की जा सकती।