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उपराज्यपाल वीके सक्सेना ने इस जांच के लिए मंजूरी दे दी है। एक अन्य मामले में उपराज्यपाल ने भ्रष्टाचार निरोधक शाखा को 60 हजार रुपये की रिश्वत के मामले में दिल्ली सरकार द्वारा संचालित अस्पताल की दो वरिष्ठ महिला नर्सों की भूमिका की जांच के आदेश दिए हैं।
नई दिल्ली। दिल्ली सरकार के वन्यजीव विभाग में हुए 223 करोड़ रुपये के भ्रष्टाचार में दो अधिकारियों की जांच सीबीआई द्वारा की जाएगी।
उपराज्यपाल वीके सक्सेना ने इस जांच के लिए मंजूरी दे दी है। एक अन्य मामले में उपराज्यपाल ने भ्रष्टाचार निरोधक शाखा को 60 हजार रुपये की रिश्वत के मामले में दिल्ली सरकार द्वारा संचालित अस्पताल की दो वरिष्ठ महिला नर्सों की भूमिका की जांच के आदेश दिए हैं। दोनों ही मामलों में उपराज्यपाल ने माना कि आरोपियों के खिलाफ जांच और पूछताछ करना न्याय के हित में है।
जानकारी के अनुसार सीबीआई ने तत्कालीन वन विभाग के कर्मचारियों पारसनाथ यादव और अलम सिंह रावत के खिलाफ मामला दर्ज किया था। पारसनाथ यादव वरिष्ठ लेखा अधिकारी और अलम सिंह सहायक लेखा अधिकारी के पद पर वन्यजीव विभाग में तैनात थे। आरोप है कि पहाड़गंज स्थित बैंक ऑफ बड़ौदा की शाखा के तत्कालीन मैनेजर एल.ए खान के साथ मिलकर उन्होंने वन एवं वन्यजीव विभाग के नकली पत्र के आधार पर गैरकानूनी तरीके से 223 करोड़ रुपये की राशि उसी ब्रांच में दिल्ली शहरी आश्रय सुधार बोर्ड के नाम से खोले गए नकली खाते में भिजवाए।
सीबीआई ने बीते 12 जुलाई को सतर्कता विभाग को इस मामले पर पत्र लिखा था। इसमें बताया गया कि दिल्ली सरकार के वन एवं वन्यजीव विभाग में हुई वित्तीय अनियमितता के मामले में हुई प्राथमिक जांच में दो अधिकारियों की भूमिका सामने आई है। पारसनाथ यादव वर्तमान में दिल्ली सरकार के प्रधान लेखा कार्यालय में वेतन और लेखा अधिकारी हैं। उनके खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 17 ‘ए’ के तहत सीबीआई जांच की मंजूरी के लिए सतर्कता निदेशालय ने फाइल को एनसीसीएसए (राष्ट्रीय राजधानी सिविल सेवा प्राधिकरण) के माध्यम से उपराज्यपाल के पास भेजा था। वहीं अलम सिंह रावत वर्तमान में पीतमपुरा के भगवान महावीर अस्पताल में लेखा अधिकारी के पद पर तैनात हैं।