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दिनेश लाल निरहुआ के बयान को गंभीरता से लेते हुए चुनाव आयोग द्वारा इसके जांच के निर्देश दिए गए हैं।
आजमगढ़ सांसद और भारतीय जनता पार्टी से प्रत्याशी दिनेश लाल निरहुआ की मुसीबतें कम होने का नाम नहीं दे रही हैं। दिनेश लाल निरहुआ के बयान को गंभीरता से लेते हुए चुनाव आयोग द्वारा इसके जांच के निर्देश दिए गए हैं।
मामले में इंटरव्यू का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद आजाद अधिकार सेवा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमिताभ ठाकुर द्वारा इस मामले को लेकर शिकायत की गई थी। शिकायत के आधार पर जिलाधिकारी आजमगढ़ को जांच का निर्देश दिया गया है।
अमिताभ ठाकुर द्वारा शिकायत में यह कहा गया था कि आजमगढ़ सांसद दिनेश लाल यादव निरहुआ द्वारा इंटरव्यू में की गई टिप्पणियों पर राजनीतिक विवाह शुरू हो गया। विवाद शुरू होने के बाद उन्होंने इस डीपफेक और एआई जेनरेटेड बताया था।
हालांकि दिनेश लाल यादव निरहुआ का इंटरव्यू लेने वाले पत्रकार द्वारा इसे सही कर दिया गया था। इसके अलावा कई अन्य पत्रकारों द्वारा भी इस मामले को गंभीरता से लेते हुए इसकी सच्चाई प्रकाशित और प्रसारित की गई थी।
अमिताभ ठाकुर द्वारा यह मांग की गई कि यदि वह वीडियो फर्जी है, तो जांच करके वायरल करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए। इसके अलावा यदि वह वीडियो सही है तो उसे फर्जी करार देने वाले के खिलाफ भी कार्रवाई की जानी चाहिए।
अमिताभ ठाकुर द्वारा लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम और आईटी एक्ट की धाराओं में कार्रवाई करने की मांग की है। इस मामले अमिताभ ठाकुर द्वारा शिकायत किए जाने के बाद विशेष कार्य अधिकारी संजय कुमार सिंह द्वारा डीएम आजमगढ़ को नियमानुसार जांच कर आख्या से शिकायतकर्ता तथा उन्हें अवगत कराने का निर्देश दिया गया है।
क्या है पूरा मामला?
दरअसल, बीते दिनों सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हुआ था। वायरल वीडियो में दिखाई दे रहा था कि आजमगढ़ से भारतीय जनता पार्टी के सांसद और प्रत्याशी दिनेश लाल यादव निरहुआ ने एक पत्रकार को बयान दिया था कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के बच्चे नहीं हैं। उन्होंने बेरोजगारी रोक दी है।
इसके अलावा उन्होंने यह भी कहा था कि सरकार कह रही है की जनसंख्या मत बढ़ाओ, रुक जाओ लेकिन कोई मन नहीं रहा है तो जब आठ-आठ बच्चे पैदा करेंगे तो बेरोजगारी बढ़नी ही है।
वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद विपक्षी पार्टियों के नेताओं द्वारा इसे जमकर वायरल करते हुए सवाल उठाया गया था। उसके बाद भारतीय जनता पार्टी के नेताओं और दिनेश लाल यादव निरहुआ द्वारा वीडियो को फर्जी करार दिया गया था।