अंकिता, बबीता के बाद अनामिका भी हुई बेरोजगार
कोलकाता, 22 अप्रैल। एक ही पद पर हल साल नौकरी बदल रही है स्थिति ये हैं कि 2022 से 2024 तक एक ही पद पर तीन बार रद्द हुई नियुक्ति हैं। करीब एक साल में तीन बार नौकरी बदल गयी। सोमवार को कलकत्ता हाई कोर्ट की खंडपीठ ने 2016 में हुई नियुक्ति रद्द कर दी हैं। अंकिता अधिकारी, बबीता दास के बाद अनामिका रॉय ने भी अपना नौकरी खो दिया हैं। दरअसल राज्य मंत्री परेश अधिकारी की बेटी अंकिता अधिकारी को 2016 में एसएससी के माध्यम से सहायक शिक्षक के रूप में नियुक्त किया गया था।
अंकिता अधिकारी राजनीति विज्ञान पढ़ाया करती थी लेकिन उन्हें भ्रष्टाचार के जरिये नौकरी मिलने के आरोप में 2022 में अंकिता अधिकारी के खिलाफ कलकत्ता हाई कोर्ट मामला दायर हुआ। हाईकोर्ट में दर्ज मामले के आधार पर सीबीआई ने ना केवल अंकिता अधिकारी बल्कि उनके पिता परेश अधिकारी को भी तलब किया था। मेखलीगंज से ट्रेन पकडऩे के बाद भी वे कोलकाता पहुंचने से पहले ही गायब हो गये। इसके बाद अंकिता की नियुक्ती उसी वर्ष 20 मई को हाईकोर्ट ने खारीज कर दी जिसके बाद अंकिता को सीबीआई जांच का सामना करना पड़ा। भ्रष्टाचार के कारण परेश अधिकारी को भी अपना मंत्री पद भी गंवाना पड़ा। संख्या के आधार पर बबीता दास को अंकिता के पद पर नियुक्त किया गया। गौरतलब है कि बबीता ने अंकिता के खिलाफ कोर्ट में केस दर्ज कराया था। उस केस को जीतकर उन्हें न सिर्फ नौकरी मिली, बल्कि अंकिता द्वारा सैलरी के तौर पर कमाए गए 14 लाख रुपये भी मिले। हालाँकि, ये ख़ुशी ज़्यादा देर तक नहीं टिकी। एक अन्य नौकरी चाहने वाली अनामिका रॉय द्वारा दायर मामले में बबीता ने अगले साल यानी 16 मई 2023 को अपनी नौकरी खो दी।
आरोप है कि उसने आवेदन पत्र में अधिक अंक दर्शाये थे। कोर्ट के आदेश पर बबिता को अपनी नौकरी भी गंवानी पड़ी और फिर बबिता के जगह उसी पद पर अनामिका की नियुक्ति सहायक अध्यापिका के पद पर हुई थी। उन्हें अंकिता के वो 14 लाख रुपये भी मिल गए थे लेकिन अनामिका की खुशी भी ज्यादा दिनों तक नहीं टिकी और एक साल के अंदर ही अनामिका की नौकरी भी चली गई। कोर्ट के आदेश के कारण नौकरी जाने से अनामिका रॉय निराश हैं। अनामिका ने कहा कि बहुत संघर्ष के बाद मुझे नौकरी मिली थी। मैंने नहीं सोचा था कि योग्य लोगों की नौकरी चली जायेगी और अयोग्य लोगों के कारण हमें परेशानी में डाल दिया जायेगा। मैं बहुत निराश हूं कि योग्य होते हुए भी दोबारा परीक्षा देना होगा।
डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के बलिदान दिवस पर मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने दी श्रद्धांजलि