दार्जिलिंग की आबादी आज बड़े पैमाने पर स्वदेशी और आप्रवासी मजदूरों का बड़ा हिस्सा है
कोलकाता। दार्जिलिंग लोकसभा सीट अपनी खूबसूरती और पर्यटन के लिए विश्व प्रसिद्ध है। 19वीं सदी की शुरुआत में भारत में ईस्ट इंडिया कंपनी के शासन के दौरान दार्जिलिंग की पहचान ब्रिटिश अधिकारियों, सैनिकों और उनके परिवारों के लिए संभावित ग्रीष्मकालीन विश्राम स्थल के रूप में की गई थी।
पर्यटन की दृष्टि से देखें तो दार्जिलिंग को पहाड़ों की रानी कहा जाता है। यूनेस्को द्वारा विश्व धरोहर घोषित दार्जिलिंग हिमालयन रेलवे की ट्वॉय ट्रेन और दार्जिलिंग चाय के लिए पूरी दुनिया में विख्यात है। यहां सालों भर सैलानियों का तांता लगा रहता है। पूर्वोत्तर भारत का गेटवे माना जाने वाले सिलीगुड़ी शहर दार्जिलिंग लोकसभा संसदीय क्षेत्र में ही स्थित है। सिलीगुड़ी को उत्तर बंगाल की अघोषित राजधानी कहा जाता है। सिलीगुड़ी में उत्तर कन्या राज्य का मिनी सचिवालय भी है।
दार्जिलिंग का राजनीतिक दृष्टि के साथ भौगोलिक दृष्टि काफी महत्वपूर्ण स्थान है। पूर्वी हिमालय में स्थित दार्जिलिंग क्षेत्र के पश्चिम में नेपाल, उत्तर में भारतीय राज्य सिक्किम, पूर्व में भूटान, सुदूर उत्तर में चीन का तिब्बत स्वायत्त क्षेत्र और दक्षिण और दक्षिण-पूर्व में बांग्लादेश स्थित है। यह संसदीय सीट नेपाल, भूटान, चीन और बांग्लादेश से करीब होने के कारण कूटनीतिक दृष्टि से भारत के लिए काफी महत्वपूर्ण है। इस लोकसभा सीट से बीजेपी इस सीट पर हैट्रिक लगा चुकी है। साल 2009 में जसवंत सिंह, साल 2014 में एसएस अहलूवालिया और साल 2019 में राजू बिष्ट ने इस संसदीय सीट पर जीत हासिल की है, लेकिन ऐसा नहीं है कि भाजपा ने अपने दम पर इस सीट पर जीत हासिल की है, बल्कि गोरखाओं की पार्टी गोरखा जनमुक्ति मोर्चा के समर्थन से बीजेपी ने इस सीट पर जीत हासिल की है और टीएमसी को मात दी है। फिलहाल राजू बिष्ट से संसदीय सीट से बीजेपी के सांसद हैं और पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता भी हैं। लोकसभा चुनाव 2024 में बीजेपी ने फिर से राजू बिष्ट को उम्मीदवार बनाया है। जबकि तृणमूल ने गोपाल लामा को जबकि कांग्रेस ने डा. मुनीष तमांग को मैदान में उतारा हैं।
2024 के रणभूमि में दार्जिलिंग लोकसभा केन्द्र से कुल 15 उम्मीदवार दावेदारी कर रहे हैं। पर्यटन के लिए महशूर होने के साथ-साथ दार्जिलंग राजनीतिक रूप से संवेदनशील है। यहां बसे गोरखा लंबे समय से अलग गोरखालैंड की मांग कर रहे हैं और अलग गोरखालैंड की मांग को लेकर कई उग्र आंदोलन भी हो चुके हैं, हालांकि राज्य में सत्तारूढ़ पार्टियां लगातार अलग गोरखालैंड की मांग खारिज करती रही है।
दार्जिलिंग की आबादी आज बड़े पैमाने पर स्वदेशी और आप्रवासी मजदूरों का बड़ा हिस्सा है, हालांकि उनकी आम भाषा, नेपाली भाषा है, जिसे सरकार ने मान्यता दी है। साल 2017 को दार्जिलिंग जिले को विभाजित कर अलग कालिम्पोंग जिला बनाया गया था। यह राज्य का 21वां जिला है।
दार्जिलिंग लोकसभा तीन जिलों की विधानसभा सीटों से मिलकर बना है। एक दार्जिलिंग जिला, दूसरा कालिम्पोंग जिला और तीसरा उत्तर दिनाजपुर जिले का चोपड़ा विधानसभा क्षेत्र मिलकर संसदीय सीट बना है। साल 2009 में परिसीमन आयोग की रिपोर्ट के अनुसार दार्जिलिंग संसदीय सीट में कुल सात विधानसभा सीटें हैं। बीजेपी का पांच विधानसभा केंद्रों पर कब्जा है। कलिम्पोंग में बीजेपीएम के रुडेन सदा लेप्चा, दार्जिलिंगमें बीजेपी के नीरज जिम्बा, कर्सियांग में बीजेपी के बिष्णु प्रसाद शर्मा, माटीगाड़ा-नक्सलबाड़ी (एससी) में बीजेपी के आनंदमय बर्मन, सिलीगुड़ी में बीजेपी के शंकर घोष, फांसीदेवा (एसटी) में बीजेपी के दुर्गा मुर्मू, चोपड़ा उत्तर में टीएमसी के हमीदुल रहमान विधायक हैं।
नगरपालिका-जीटीए चुनाव में बदला राजनीतिक समीकरण
साल 2019 के लोकसभा चुनाव और साल 2021 के विधानसभा चुनाव में दार्जिलिंग जिला क्षेत्र में बीजेपी की एकतरफा जीत मिली थी। तृणमूल कांग्रेस एवं क्षेत्रीय दलों का ज्यादा प्रभाव नहीं पड़ा था, लेकिन 2022 में हुए सिलीगुड़ी नगर निगम चुनाव एवं सिलीगुड़ी महकमा परिषद चुनाव दोनों में बीजेपी को पराजित कर टीएमसी ने तृणमूल कांग्रेस की एकतरफा जीत हासिल की है। साल 2022 में ही हुए दार्जिलिंग नगर पालिका चुनाव एवं दार्जिलिंग पहाड़ी क्षेत्र के गोरखालैंड टेरिटोरियल एडमिनिस्ट्रेशन (जीटीए) चुनाव में नयी पार्टी अजय एडवर्ड की हाम्रो पार्टी ने जीत हुई। वहीं, टीएमसी समर्थित अनित थापा के भारतीय गोरखा प्रजातांत्रिक मोर्चा (बीजीपीएम) ने जीटीए और दार्जिलिंग नगर पालिका पर कब्जा जमा लिया है। इस राजनीतिक अर्थ साफ है कि पहाड़ के समीकरण बदल रहे हैं।
दार्जिलिंग की एक तिहाई आबादी ग्रामीण
2011 की जनगणना के अनुमान के अनुसार दार्जिलिंग कुल 2201799 जनसंख्या में से 66.68' ग्रामीण और 33.32' शहरी आबादी है। कुल जनसंख्या में अनुसूचित जाति (एससी) और अनुसूचित जनजाति (एसटी) का अनुपात क्रमश: 17 और 18.99 है। 2021 की मतदाता सूची के अनुसार, इस निर्वाचन क्षेत्र में 16,99,267 मतदाता और 2,371 मतदान केंद्र हैं।
गोरखा जनमुक्ति के समर्थन से बीजेपी ने हासिल की थी जीत
साल 2019 के लोकसभा चुनाव में भाजपा के राजू बिष्ट ने टीएमसी के के अमर सिंह राय को हराकर दार्जिलिंग लोकसभा क्षेत्र में 4,13,443 वोटों के अंतर से जीत हासिल की। राजू राजू बिष्ट को 7,50,067 वोट मिले। उन्होंने 59.19 फीसदी मत मिले थे, जबकि टीएमसी के अमर सिंह राय को 3,36,624 वोट के साथ 26.56 फीसदी मत मिले थे।
कांग्रेस के शंकर मालाकार को 65,186 मत के साथ 5.14 फीसदी और सीपीआई (एम) के समन पाठक 50,524 मत के साथ 3.99 फीसदी मत मिले थे। 2019 के लोकसभा चुनाव में इस सीट पर 78.71' मतदान हुआ था। कुल 17 उम्मीदवारों ने चुनाव लड़ा था। 2019 के संसदीय चुनाव में मतदाता मतदान 78.8' था, जबकि 2014 के संसदीय चुनाव में यह 79.51त्न था। 2019 के संसदीय चुनाव में टीएमसी, बीजेपी, सीपीएम और कांग्रेस को क्रमश: 26.56', 59.19', 3.99' और 5.14' वोट मिले, जबकि टीएमसी, बीजेपी, सीपीएम और कांग्रेस को 25.48', 42.75' वोट मिले। , 2014 के संसदीय चुनाव में क्रमश: 14.64' और 7.89' वोट मिले।
2019 का रिजल्ट
भाजपा : 7,50,067
तृणमूल : 3,36,624
कांग्रेस : 65,186
2021 का रिजल्ट
कलिम्पोंग : बीजीपीएम
दार्जिलिंग : भाजपा
कर्सियांग : भाजपा
माटीगाड़ा-नक्सलबाड़ी : भाजपा
सिलीगुड़ी : भाजपा
फांसीदेवा : भाजपा
चोपड़ा : तृणमूल
2024 के उम्मीदवार
भाजपा : राजू बिस्ट
तृणमूल : गोपाल लामा
कांग्रेस : डा. मुनीष तमांग
मतदाता : 16,99,267
मतदान केन्द्र : 2,371