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बर्धमान रेलवे स्टेशन पर मौजूद इंफ्रास्ट्रक्चर की देखरेख में बड़ी लापरवाही उजागर हुई है
बर्धमान रेलवे स्टेशन पर बुधवार को वॉटर टैंकर टूटकर गिरने की वजह से हुई तीन लोगों की मौत और 30 लोगों के घायल होने की घटना के बाद कई तरह के सवाल उठ रहे हैं। मामले में रेलवे स्टेशनों पर मौजूद इंफ्रास्ट्रक्चर की देखरेख में बड़ी लापरवाही उजागर हुई है। दावा है कि खराब मटेरियल से इंफ्रास्ट्रक्चर के निर्माण और रखरखाव की कमी की वजह से ऐसी दुर्घटनाएं हो रही हैं। इसकी एक और वजह यह भी है कि ऐसी घटनाओं में कठोर दंड का प्रावधान नहीं है। ऐसा भी नहीं है कि ऐसी दुर्घटना पहली बार हुई है। कुछ महीने पहले बांकुड़ा जिले के निकुंजपुर पंचायत के चुरामणिपुर गांव में एक पानी की टंकी ढह गई।
इसे सबमर्सिबल के माध्यम से वैकल्पिक पेयजल की समस्या को हल करने के लिए पाइप से पानी पहुंचाने के लिए डिज़ाइन किया गया था। घटना के वक्त चुरामणिपुर गांव निवासी गोपाल चट्टोपाध्याय टंकी के ठीक बगल में खड़े थे जो दुर्घटना में मारे गए। 25 जून 2022 को नादिया के गंगनापुर में सजलधारा परियोजना का एक टैंक ढह गया। उद्घाटन से पहले पांच हजार लीटर पानी की क्षमता वाले टैंकर की जांच में पता चला कि टैंकर को घटिया उपकरणों के साथ और उचित सावधानियों के बिना बनाया गया था। इसको लेकर क्षेत्रवासियों ने ग्राम प्रधान के खिलाफ प्रदर्शन किया था।
27 दिसंबर 2022 को हावड़ा में एक पानी की टंकी ढह गई। पुलिस और स्थानीय सूत्रों के मुताबिक, जगाछा थाने के अरूपारा इलाके में हुई इस घटना में 14 मजदूर घायल हो गए। कई लोगों को गंभीर हालत में हावड़ा अस्पताल भेजा गया। 22 जनवरी, 2022 को बांकुरा के सारेंगा में 700 क्यूबिक मीटर की जल भंडारण क्षमता वाला एक ओवरहेड टैंकर ढह गया। यह ढांचा सिर्फ तीन साल पहले 165 करोड़ रुपये की लागत से बनाया गया था। इसकी वजह से 20 गांवों को पानी की कमी का सामना करना पड़ा।
इसके बाद तत्कालीन केंद्रीय मंत्री और भाजपा नेता (अब तृणमूल सरकार में मंत्री) बाबुल सुप्रिया ने ट्वीट किया, ''पानी की टंकी महज दो साल में ढह गई। जहां भी खराब क्वालिटी के मैटेरियल का इस्तेमाल होगा, वहां ऐसी घटनाएं होंगी। पुल टूट रहे हैं, पानी की टंकियाँ टूट रही हैं।” क्या टैंक निर्माण और रखरखाव में पर्याप्त सावधानियां बरती जाती हैं? इस सवाल के जवाब में कोलकाता नगर निगम के पूर्व महानिदेशक, प्रख्यात वास्तुकार दीपांकर सिंह ने कहा, ''''हम यहां केवल टैंकों के बारे में बात नहीं कर सकते। विभिन्न परियोजनाओं के माध्यम से बनाई गई संपत्ति, रखरखाव, लागत, परियोजना बहुत कुछ मायने रखता है।
खास बात ये है कि जिन लोगों पर देखरेख, रखरखाव और मरम्मत की जिम्मेवारी होती है वे लापरवाह बने रहते हैं। उन्होंने बताया कि नई परियोजनाओं पर अधिकारियों का ध्यान ज्यादा रहता है। उसमें अधिक खर्च होता है लेकिन जो परियोजनाएं पहले से लागू हो चुकी है या जो इंफ्रास्ट्रक्चर पहले से बने हुए हैं उनकी देखरेख पर किसी का ध्यान नहीं जाता। यही वजह है कि समय-समय पर ऐसी दुर्घटनाएं होती रहती हैं।