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श्रीरामपुर में पूर्व ससुर-दामाद की लड़ाई

कुल आबादी में अनुसूचित जाति (एससी) और अनुसूचित जनजाति (एसटी) 15.39 फीसदी और 0.96 फीसदी हैं

02 Apr 2024

श्रीरामपुर में पूर्व ससुर-दामाद की लड़ाई

कोलकाता। श्रीराम के नाम पर चुनाव भले ही भाजपा लड़ रही हो लेकिन श्रीरामपुर में होने वाली लड़ाई काफी हद राजनीतिक ही नहीं बल्कि पारिवारिक भी हैं। श्रीरामपुर लोकसभा सीट कोलकाता के पश्चिमी हिस्से स्थित में हुगली जिले में स्थित है। श्रीरामपुर की रथ पूजा एवं मेला और मां जगद्धात्री की पूजा काफी प्रसिद्ध है। स्वतंत्रता के पहले से ही श्रीरामपुर लोगों के आकर्षण का केंद्र रहा है। यह क्रिश्चियन मिशनेरीज का केंद्र रहा था और इसे डेफ्रेडरिक्सनगर भी कहा जाता था। यह 1755 से 1845 तक फ्रेडरिकनागोर पुर्तगाल का केंद्र था और यहां एक डेनिश स्कूल भी था। श्रीरामपुर संसदीय सीट के पांच विधानसभा क्षेत्र हुगली और दो हावड़ा जिले में स्थित हैं।

श्रीरामपुर मूल रूप से कृषि प्रधान क्षेत्र है और यहां औद्योगिक इकाइयां भी हैं। श्रीरामपुर हुगली जिले में स्थित है। हुगली जिले का सिंगूर लेफ्ट शासनकाल में काफी सुर्खियों में आया था। उस समय टाटा मोर्टर्स ने सिंगूर में नैनो कार का कारखाना लगाया था, लेकिन विपक्षी नेता ममता बनर्जी ने इसका विरोध किया था। अंतत: टाटा को अपना कारखाना सिंगूर से हटाकर साणंद में स्थानांतरित करना पड़ा था। ममता ने इसे मुद्दा बनाया था और साल 2011 के चुनाव में जीत हासिल की और लेफ्ट को पराजित किया था। 2011 की जनगणना के अनुमान के अनुसार, हुगली जिले की कुल आबादी 2232118 थी। इसमें 26.34' ग्रामीण और 73.66' शहरी थे। कुल आबादी में अनुसूचित जाति (एससी) और अनुसूचित जनजाति (एसटी) 15.39 फीसदी और 0.96 फीसदी हैं। 
हिंदी भाषी वोटर्स  की अहम भूमिका
2021 की मतदाता सूची के अनुसार, श्रीरामपुर में कुल मतदाताओं की संख्या 1883634 हैं। 2591 मतदान केंद्र हैं। श्रीरामपुर और हावड़ा निर्वाचन क्षेत्रों में 25' से अधिक गैर-बंगाली वोटर्स हैं। ये वोटर्ट मूलत: राजस्थान, बिहार या उत्तर प्रदेश से काम के सिलसिले में यहां आये थे और फिर यहीं बस गये हैं। 
राजनीति के साथ-साथ पारिवारिक जंग भी
2021 के बंगाल विधानसभा चुनाव में कबीर शंकर बोस को भाजपा ने श्रीरामपुर से उम्मीदवार बनाया था, लेकिन वह तृणमूल उम्मीदवार डॉक्टर सुदीप्त रॉय से करीब 23 हजार वोट से हार गये थे। उसके बाद वह श्रीरामपुर में नहीं दिखे। बताया जा रहा है कि 2010 में कबीर ने कल्याण बनर्जी की बेटी से शादी की थी। हालांकि, यह शादी अधिक दिनों तक नहीं टिक सकी। 2017 में दोनों का तलाक हो गया। इसके बाद कबीर ने 2019 में राजनीति में प्रवेश किया। इस बार कबीर अपने पूर्व ससुर के खिलाफ चुनावी मैदान में हैं। इससे पहले जब कल्याण बनर्जी ने पार्लियामेंट के बाहर उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ की मिमिक्री की थी, तो उनके पूर्व दामाद ने इसका कड़ा विरोध किया था। 
कल्याण बनर्जी लगा चुके हैं हैट्रिक
कल्याण बनर्जी श्रीरामपुर संसदीय क्षेत्र से टीएमसी के सांसद हैं। टीएमसी ने उन्हें प्रत्याशी बनाया है। वहीं बीजेपी ने कबीर शंकर बोस और आईएसएफ शहराय अली मलिक को उम्मीदवार बनाया है। साल 2019 के लोकसभा चुनाव में टीएमसी के कल्याण बनर्जी को 637,707 मत मिले थे। उन्होंने बीजेपी देबजीत सरकार को हराया था। 2019 के संसदीय चुनाव में 78.54' वोटिंग हुई थी। 2014 के लोकसभा चुनाव में भी तृणमूल कांग्रेस के सांसद कल्याण बनर्जी को 514,933 मत मिले थे और वह दूसरी बार निर्वाचित हुए थे। उन्होंने सीपीआई (एम) तीर्थंकर रॉय को हराया था, जबकि बीजेपी के बप्पी लाहिड़ी तीसरे स्थान पर रहे थे। बीजेपी ने संगीतकार बप्पी लाहिड़ी को उम्मीदवार बनाया था। 

माकपा के गढ़ में टीएमसी ने लगाई थी सेंध
साल 2009 के लोकसभा चुनाव में टीएमसी के कल्याण बनर्जी ने उन्होंने सीपीआई (एम) संतश्री चटर्जी को पराजित किया था। इससे पहले 2004 के लोकसभा चुनाव में माकपा के सांतश्री चटर्जी, 1999 और 1998 के लोकसभा चुनाव में टीएमसी के अकबर अली खोंदकर सांसद बने थे। 1996 में कांग्रेस के प्रदीप भट्टाचार्य और 1991 में माकपा के सुदर्शन राय चौधुरी इस संसदीय सीट से सांसद बने थे। 
श्रीरामपुर संसदीय सीट कांग्रेस और लेफ्ट का गढ़ रहा था। साल 1951 लोकसभा चुनाव में माकपा के तुषारकांति चट्टोपाध्याय ने कांग्रेस उम्मीदवार को पराजित कर जीत हासिल की थी। लेकिन अगले चुनाव में वह कांग्रेस में शामिल हो गये और कांग्रेस की टिकट पर 1957 में जीत हासिल की। 1962 से 1996 तक कभी कांग्रेस तो कभी माकपा के इस संसदीय सीट से सांसद निर्वाचित होते रहे। 1998 और 1999 के लोकसभा चुनाव में टीएमसी ने पहली बार इस सीट से खाता खोला और टीएमसी के अकबल अली खोंदकर यहां से निर्वाचित हुए थे। तब से लगातार यह सीट टीएमसी के पास है। 
2019 का रिजल्ट
तृणमूल: 6,37,707
भाजपा: 5,39,171
माकपा: 1,52,281
2021 का रिजल्ट
जगतवल्लभपूर : तृणमूल
डोमजुर : तृणमूल
उत्तर पाड़ा : तृणमूल
श्रीरामपुर : तृणमूल
चापदानी :  तृणमूल
चंडीतल्ला : तृणमूल
जंगीपाड़ा : तृणमूल 
2024 के उम्मीदवार
तृणमूल: कल्याण बनर्जी
भाजपा: कबीर शंकर बोस
माकपा: दिप्सीता धर
आईएसएफ: सहरयार अली मल्लिक
मतदाता : 18,83,634
कुल बूथों की संख्या : 2,591

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