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हाईकोर्ट ने मुख्य चुनाव आयुक्त पर टिप्पणी करते हुए कहा था कि अगर आप आदेश स्वीकार नहीं कर सकते तो इस्तीफा दे सकते हैं।
कोलकाता। पंचायत चुनाव से पहले राज्यपाल सी वी आनंद बोस और ममता सरकार एक बार फिर आमने सामने आ गए हैं। दरअसल, राज्यपाल आनंद ने मुख्य चुनाव आयुक्त राजीव सिन्हा का नियुक्ति पत्र स्वीकार करने से इनकार कर दिया। राज्यपाल के इस फैसले पर सत्ताधारी तृणमूल कांग्रेस आगबबूला हो गई है। टीएमसी ने राज्यपाल के इस कदम को असंवैधानिक और अनैतिक बताया है। दरअसल, बंगाल में 8 जुलाई को पंचायत चुनाव के लिए वोटिंग होनी है। वोटिंग से पहले नामांकन के दौरान राज्यभर से हिंसा की खबरें सामने आ रही हैं। ऐसे में राज्यपाल ने समन भेजकर मुख्य चुनाव आयुक्त राजीव सिन्हा को चर्चा के लिए बुलाया था। लेकिन वे नहीं आए। इसके बाद राज्यपाल आनंद बोस ने राजीव सिन्हा का नियुक्ति पत्र स्वीकार करने से इनकार कर दिया और इसे वापस राज्य सचिवालय भेज दिया। राज्यपाल के इस फैसले पर टीएमसी ने कड़ी आपत्ति जताई है।
तृणमूल सांसद सुखेंदु शेखर रॉय ने राज्यपाल के इस कदम को दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए इसकी निंदा की है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने राज्यपाल के साथ विचार विमर्श कर राजीव सिन्हा को राज्य निर्वाचन आयोग का आयुक्त बनाया था। राज्यपाल के अनुमोदन के बाद ही राजीव सिन्हा ने मुख्य चुनाव आयुक्त का भार संभाला और तबसे वह काम कर रहे थे। उन्होंने कहा, राज्यपाल ने दो बार मुख्य चुनाव आयुक्त राजीव सिन्हा को मिलने के लिए राजभवन बुलाया। लेकिन वे अपनी व्यस्ता के चलते नहीं आ पाए। ऐसे में राज्यपाल को समझना चाहिए। ये कदम असंवैधानिक और अनैतिक है। राज्यपाल भाजपा के इशारों पर काम कर रहे हैं। इससे पहले कोलकाता हाईकोर्ट ने बंगाल में पंचायत चुनाव से पहले हो रही हिंसा पर नाराजगी जाहिर की।
दरअसल, बंगाल में बीजेपी, कांग्रेस और माकपा समेत तमाम विपक्षी पार्टियों ने हाईकोर्ट में एक याचिका दायर की थी। इसमें कहा गया था कि कुछ उम्मीदवारों के नाम कैंडिडेट्स की लिस्ट से गायब हो गए हैं। इसपर बुधवार को हाईकोर्ट ने सुनवाई की और सीबीआई जांच के आदेश दिए। इस दौरान हाईकोर्ट में जस्टिस अमृता सिन्हा ने पंचायत चुनाव की हिंसा पर नाराजगी जाहिर की। उन्होंने कहा कि पंचायत चुनाव में इतनी हिंसा देखी गई। अगर ऐसा ही रक्तपात चलता रहा तो चुनाव को रोक देना चाहिए। उन्होंने कहा था कि ऐसी हिंसा राज्य के लिए शर्म की बात है। इतनी अव्यवस्था क्यों, राज्य चुनाव आयोग क्या कर रहा है? हाईकोर्ट ने मुख्य चुनाव आयुक्त पर टिप्पणी करते हुए कहा था कि अगर आप आदेश स्वीकार नहीं कर सकते तो इस्तीफा दे सकते हैं।