सीईओ दफ्तर के बाहर संग्राम, तैनात हुए केंद्रीय बल
कोलकाता। बंगाल विधानसभा चुनाव से पहले मतदाता सूची से नाम हटाए जाने के विवाद ने सोमवार को एक बड़ा राजनीतिक मोड़ ले लिया। तृणमूल कांग्रेस के अखिल भारतीय महासचिव अभिषेक बनर्जी भारी लाव-लश्कर के साथ अचानक कोलकाता स्थित मुख्य निर्वाचन अधिकारी (सीईओ) के कार्यालय शिपिंग हाउस पहुंच गए। उनके साथ राज्य की मंत्री चंद्रिमा भट्टाचार्य, शशि पांजा, नैना बंद्योपाध्याय और शांतनु सेन समेत कई वरिष्ठ नेता मौजूद रहे।
अभिषेक ने मतदाता सूची में हुई कथित गड़बडिय़ों और सप्लीमेंट्री लिस्ट की पारदर्शिता को लेकर सीईओ मनोज अग्रवाल से सीधी जवाबदेही मांगी। जैसे ही अभिषेक बनर्जी के सीईओ दफ्तर पहुंचने की खबर फैली, हजारों की संख्या में टीएमसी कार्यकर्ता स्ट्रैंड रोड स्थित कार्यालय के बाहर जमा हो गए। प्रदर्शनकारियों ने चुनाव आयोग और भाजपा के खिलाफ जमकर नारेबाजी की, जिससे इलाके में भारी तनाव फैल गया। स्थिति को बिगड़ता देख चुनाव आयोग के कार्यालय के बाहर केंद्रीय अर्धसैनिक बलों की अतिरिक्त टुकडिय़ों को तैनात करना पड़ा। कोलकाता पुलिस के आला अधिकारी भी मौके पर मौजूद रहे और पूरे इलाके की घेराबंदी कर दी गई। अभिषेक ने बैठक के दौरान एसआईआर प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठाए। टीएमसी का दावा है कि राज्य में करीब 64 लाख वैध मतदाताओं के नाम सूची से हटा दिए गए हैं, जबकि लगभग 60 लाख नाम अभी भी विचाराधीन श्रेणी में रखे गए हैं।
अभिषेक ने मांग की कि आयोग स्पष्ट करे कि अब तक जारी की गई चार पूरक सूचियों में कितने नाम जोड़े गए और किन आधारों पर नाम हटाए गए। उन्होंने आरोप लगाया कि आयोग की इस अपारदर्शी कार्यप्रणाली से लाखों गरीब और ग्रामीण मतदाता अपने लोकतांत्रिक अधिकार से वंचित हो सकते हैं। इससे पहले मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने भी इस मुद्दे पर कड़ा रुख अख्तियार करते हुए इसे लोकतंत्र की हत्या करार दिया था। टीएमसी नेतृत्व का कहना है कि यह एक सोची-समझी साजिश है ताकि चुनावी गणित को प्रभावित किया जा सके। पार्टी ने आरोप लगाया कि केंद्र के दबाव में आयोग उन इलाकों के मतदाताओं को निशाना बना रहा है जहां तृणमूल कांग्रेस मजबूत है। दूसरी ओर, भाजपा ने टीएमसी के इस प्रदर्शन को नौटंकी करार दिया है। नंदीग्राम और भवानीपुर से उम्मीदवार शुभेंदु अधिकारी ने पलटवार करते हुए कहा कि मतदाता सूची का शुद्धिकरण एक संवैधानिक प्रक्रिया है और इसमें किसी भी तरह का राजनीतिक हस्तक्षेप नहीं है। उन्होंने कहा कि कोई भी कानून से ऊपर नहीं है। यदि टीएमसी को लगता है कि वे दबाव बनाकर फर्जी मतदाताओं के नाम सूची में बरकरार रख सकते हैं, तो वे गलतफहमी में हैं। कानून का उल्लंघन करने वालों पर सख्त कार्रवाई होगी। गौरतलब है कि कलकत्ता हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट ने भी इस मामले में संज्ञान लिया है, जिसके बाद आयोग ने पूरक सूचियां जारी करने की प्रक्रिया तेज की है। सोमवार की इस घटना ने साफ कर दिया है कि आने वाले दिनों में बंगाल की चुनावी जंग विकास के मुद्दों से ज्यादा वोटर लिस्ट और संवैधानिक संस्थाओं की साख पर लड़ी जाएगी।