'4 मई को बनेगी सरकार, एक महीने में लौटेगा अधिकार'
कोलकाता। चुनावी सरगर्मी के बीच तृणमूल के दिग्गज नेता और राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी ने एक ऐसा सियासी दांव चला है, जिसने राजनीतिक गलियारों में खलबली मचा दी है। नदिया जिले के करीमपुर में एक विशाल जनसभा को संबोधित करते हुए अभिषेक ने सीधे तौर पर उन लोगों को साधने की कोशिश की, जिनके नाम वोटर लिस्ट से काट दिए गए हैं। उन्होंने मंच से हुंकार भरते हुए वादा किया कि राज्य में ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली सरकार की वापसी के महज 30 दिनों के भीतर वंचित मतदाताओं का वोट देने का अधिकार बहाल कर दिया जाएगा। करीमपुर के रेगुलेटेड मार्केट ग्राउंड में सोमवार को उमड़ी भीड़ के बीच अभिषेक बनर्जी ने इसे पार्टी की शपथ करार दिया। उन्होंने मतदाताओं से अपील की कि वे किसी भी भ्रम में आए बिना सीधे ममता बनर्जी को वोट दें और दावा किया कि 4 मई को राज्य में एक बार फिर तृणमूल की सत्ता में वापसी होगी।
दिलचस्प बात यह रही कि अभिषेक ने सार्वजनिक रूप से यह स्वीकार किया कि यह वादा पार्टी के आधिकारिक चुनावी घोषणापत्र में दर्ज नहीं है, लेकिन उन्होंने इसे अपने दिल की बात बताते हुए जनता को भरोसा दिलाया कि उनकी सरकार इस मुद्दे पर सबसे पहले काम करेगी। अभिषेक बनर्जी के निशाने पर सीधे तौर पर भाजपा रही। उन्होंने एनआरसी के मुद्दे को गरमाते हुए कहा कि बीजेपी बंगाल में लोगों को बेदखल करने की मंशा रखती है, जबकि तृणमूल उनकी सुरक्षा की ढाल बनी हुई है। अपने संबोधन में उन्होंने एक नया नारा उछालते हुए तंज कसा- बीजेपी मतलब डिटेंशन, तृणमूल मतलब नो टेंशन।
उन्होंने विशेष रूप से मतुआ समुदाय का जिक्र करते हुए आरोप लगाया कि जिन लोगों ने पिछली बार बीजेपी पर भरोसा जताया था, उनके ही नाम आज वोटर लिस्ट से गायब हैं, जो उनके साथ बड़ा अन्याय है। भाषण के दौरान उन्होंने केवल वोटिंग अधिकार की बात नहीं की, बल्कि बंगाल की संस्कृति और खान-पान पर होने वाली टिप्पणियों को लेकर भी बीजेपी को घेरा। अभिषेक ने केंद्र सरकार पर बंगाल का जायज फंड रोकने की साजिश रचने का आरोप लगाते हुए कहा कि राज्य की जनता 4 मई को अपने मताधिकार के जरिए इस अपमान का बदला लेगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि तृणमूल की योजनाओं का लाभ बिना किसी भेदभाव के हर नागरिक तक पहुँच रहा है, और अब जनता को यह तय करना है कि वे विभाजनकारी राजनीति को चुनेंगे या विकास और सुरक्षा के वादे को।