टीएमसी सांसद कल्याण बनर्जी मानसून सत्र की शेष अवधि के लिए निलंबित
'बागी लौटें, मैं एक घंटे में दे दूंगा इस्तीफा'
कोलकाता। तृणमूल के भीतर मचा घमासान अब एक बेहद नाजुक और आक्रामक मोड़ पर पहुंच चुका है। पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी ने बागी खेमे पर सीधा हमला बोलते हुए उन्हें एक बहुत बड़ी और खुली चुनौती दे डाली है। अभिषेक बनर्जी ने मंच से सार्वजनिक ऐलान किया कि यदि तृणमूल कांग्रेस छोड़कर गए सभी असंतुष्ट और बागी नेता अपनी पुरानी पार्टी में वापस लौट आते हैं, तो वे महज एक घंटे के भीतर अपने पद से इस्तीफा देकर सक्रिय भूमिका से हट जाएंगे। इसके साथ ही उन्होंने दावा किया कि ऐसा कभी नहीं होने वाला है, क्योंकि इन बागी नेताओं की भाजपा के साथ पहले ही एक बड़ी डील हो चुकी है।
कालीघाट स्थित पार्टी कार्यालय में तृणमूल कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए अभिषेक बनर्जी का दर्द और गुस्सा दोनों खुलकर सामने आया। हालिया विधानसभा चुनाव में तृणमूल की करारी शिकस्त के लिए खुद को निशाना बनाए जाने पर पलटवार करते हुए उन्होंने कहा कि यदि हार का ठीकरा उन पर फोड़ा जा रहा है, तो वर्ष 2024 के लोकसभा चुनाव में पार्टी को मिली 29 सीटों की बंपर जीत का सेहरा भी उनके ही सिर बंधना चाहिए। उन्होंने तल्ख लहजे में कहा कि अगर सारी समस्या वे खुद हैं, तो आज 18 तारीख है, जब भी सभी बागी नेता वापस आना चाहें, आ जाएं। उनके लौटते ही वे एक घंटे के अंदर अपना त्यागपत्र नेतृत्व को सौंप देंगे।
अभिषेक ने अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए दावा किया कि कोई भी बागी नेता चाहकर भी घर वापसी नहीं कर पाएगा। उन्होंने संगीन आरोप लगाया कि भाजपा के साथ हुए एक गुप्त समझौते के तहत इन नेताओं को केवल एक ही काम सौंपा गया है और वह है चौबीसों घंटे अभिषेक बनर्जी के खिलाफ जहर उगलना। उन्होंने यह भी कहा कि ईडी और सीबीआई जैसी केंद्रीय जांच एजेंसियों का खौफ दिखाकर तथा जेल भेजने की धमकियां देकर भाजपा ने तृणमूल कांग्रेस के भीतर यह बड़ी फूट डलवाई है।
गौरतलब है कि हाल के दिनों में ममता बनर्जी का साथ छोड़कर बागी रुख अख्तियार करने वाले अधिकांश नेताओं ने पार्टी से अलग होने की मुख्य वजह अभिषेक बनर्जी के कामकाज के तरीके और उनके अत्यधिक बढ़ते प्रभाव को बताया है। बागियों का आरोप है कि चुनाव में पार्टी की लचर रणनीति और चुनावी सलाहकार संस्था आई-पैक के मनमाने हस्तक्षेप के कारण ही तृणमूल को सत्ता गंवानी पड़ी। यहाँ तक कि हाल ही में बागी खेमे का दामन थामने वाले वरिष्ठ नेता मदन मित्र ने भी यह दावा कर सनसनी फैला दी थी कि उन्होंने खुद ममता बनर्जी को सुझाव दिया था कि अभिषेक को संगठनात्मक जिम्मेदारियों से मुक्त कर दिया जाए, लेकिन उनकी बात अनसुनी कर दी गई। अभिषेक बनर्जी के इस आर-पार वाले बयान के बाद बंगाल की सियासत का पारा सांतवें आसमान पर पहुंच गया है।