'बदलाव तो होगा, लेकिन आपका'
कोलकाता। बंगाल में चुनावी पारा अपने चरम पर है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा बंगाल में 'परिवर्तन' के आह्वान पर तृणमूल कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी ने जोरदार पलटवार किया है। नदिया के चापड़ा में आयोजित एक भव्य रोड शो के दौरान अभिषेक ने प्रधानमंत्री के 'बदलाव जरूरी' वाले नारे को उन्हीं की ओर मोड़ते हुए कहा कि बंगाल में बदलाव तो होगा, लेकिन वह जनता का नहीं, बल्कि भाजपा के अहंकार का होगा।
प्रधानमंत्री मोदी ने हाल ही में मालदा और हुगली की जनसभाओं में 'बंगाल अब बदलाव चाहता है' का नया नारा दिया था। इस पर प्रतिक्रिया देते हुए अभिषेक ने कहा कि मैं प्रधानमंत्री की इस बात से पूरी तरह सहमत हूं कि बदलाव जरूरी है। लेकिन यह बदलाव उन लोगों का होगा जो पहले अपनी सभाएं 'जय श्रीराम' से शुरू करते थे और अब बंगाल की नब्ज देखकर 'जय मां काली और जय मां दुर्गा' कहने पर मजबूर हो गए हैं। बंगाल के लोग नहीं बदले हैं, बल्कि दिल्ली वालों के सुर बदल गए हैं। अपनी 'रण संकल्प सभा' के दौरान अभिषेक ने केंद्र सरकार पर बंगाल के साथ सौतेला व्यवहार करने का आरोप लगाया।
उन्होंने कहा कि बंगाल के 100 दिनों के काम का पैसा, आवास योजना की छत और पेयजल योजनाओं के फंड को केंद्र ने रोक रखा है। भाजपा बंगाल के लोगों को इसलिए सजा दे रही है क्योंकि उन्होंने पिछले चुनाव में उन्हें नकार दिया था। अभिषेक ने आयोग और जांच एजेंसियों के जरिए लोगों को परेशान करने का मुद्दा उठाते हुए कहा कि वोट का अधिकार छीनने की कोशिशें सफल नहीं होंगी।
नदिया जिले की राजनीतिक समीकरणों पर चर्चा करते हुए अभिषेक ने 2021 के विधानसभा चुनाव के आंकड़ों को दोहराया। उन्होंने कहा कि कृष्णनगर संगठनात्मक जिले में पिछली बार स्कोर 7-1 था। इस बार मेरा लक्ष्य 8-0 का है। अगर आप मुझे इस जिले की सभी सीटें दिलाते हैं, तो पूरे बंगाल में भाजपा को 50 सीटों के नीचे समेटने की जिम्मेदारी मेरी है। पिछले लोकसभा चुनाव और कृष्णनगर सीट की चर्चा करते हुए उन्होंने महुआ मैत्रा के खिलाफ राजपरिवार की अमृता रॉय को उतारने के भाजपा के दांव पर हमला बोला। उन्होंने जनता से पूछा कि प्रधानमंत्री ने खुद फोन पर कहा था कि ईडी द्वारा जब्त पैसा जनता में बांट दिया जाएगा। दो साल बीत गए, क्या किसी के खाते में एक भी रुपया आया? चापड़ा में रोड शो के दौरान राजनीति के बीच अभिषेक बनर्जी का मानवीय चेहरा भी नजर आया। भीषण गर्मी और भीड़ के बीच जब एक बुजुर्ग महिला अचानक बीमार पड़ गई, तो अभिषेक ने तुरंत अपना संबोधन रोक दिया। उन्होंने न केवल महिला के लिए पानी का प्रबंध कराया, बल्कि भीड़ से निकालकर उसे सुरक्षित स्थान पर ले जाने के लिए अपनी ही गाड़ी में बिठाया।