'भाजपा को वोट यानी माकपा को समर्थन'
कोलकाता। बंगाल की सियासी तपिश के बीच तृणमूल कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव और सांसद अभिषेक बनर्जी ने शनिवार को मेदिनीपुर की धरती से विपक्षी दलों पर तीखा हमला बोला। चुनावी जनसभा को संबोधित करते हुए अभिषेक ने एक नई राजनीतिक लाइन खींचते हुए दावा किया कि प्रदेश में भाजपा को वोट देने का सीधा अर्थ मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) को ऑक्सीजन देना है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि भाजपा और सीपीएम एक ही सिक्के के दो पहलू हैं। मेदिनीपुर के ऐतिहासिक मैदान से हुंकार भरते हुए अभिषेक बनर्जी ने बिना नाम लिए विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष शुभेंदु अधिकारी पर निशाना साधा। वर्ष 2020 के राजनीतिक घटनाक्रमों का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि मेदिनीपुर वीरों की भूमि है, लेकिन एक गद्दार ने सीबीआई की जांच से बचने के लिए अमित शाह के चरणों में शरण ले ली।
अभिषेक ने भाजपा के सांगठनिक ढांचे पर प्रहार करते हुए कहा कि मेदिनीपुर में भाजपा का मॉडल बेहद स्पष्ट है कि मैदान पर सीपीएम के पुराने हरमाद (बाहुबली) हैं और शीर्ष पर भाजपा के गद्दार बैठे हैं। अभिषेक बनर्जी ने उपस्थित जनसमूह को 34 वर्षों के वामपंथी शासन की याद दिलाई। उन्होंने कहा कि जिन लोगों ने दशकों तक आम जनता और तृणमूल कार्यकर्ताओं पर अत्याचार किया, आज वही लोग भाजपा का झंडा थामे हुए हैं। उन्होंने मंच से पश्चिम मेदिनीपुर के उन कई पदाधिकारियों के नाम गिनाए जो पहले सीपीएम में थे और अब भाजपा के चेहरा बने हुए हैं। अभिषेक ने तंज कसते हुए कहा कि बोतल नई है, लेकिन शराब वही पुरानी है। इन लोगों ने सिर्फ अपनी जर्सी बदली है, नीयत नहीं यदि किसी वार्ड या विधानसभा में भाजपा को बढ़त मिलती है, तो इसका सीधा लाभ उन बचे-खुचे हरमादों को मिलेगा जिन्होंने 34 साल तक बंगाल को लहूलुहान किया। क्षेत्रीय मुद्दों पर बात करते हुए अभिषेक ने घाताल मास्टर प्लान को लेकर भाजपा की मंशा पर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार इस परियोजना में रोड़े अटका रही है, जबकि राज्य सरकार ने इसके लिए पहले ही 500 करोड़ रुपये का आवंटन कर दिया है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि अगले तीन से चार वर्षों के भीतर इस मास्टर प्लान का कार्य पूर्ण कर लिया जाएगा, जिससे क्षेत्र की जनता को बाढ़ की विभीषिका से मुक्ति मिलेगी। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अभिषेक बनर्जी का यह हमला एक सोची-समझी रणनीति का हिस्सा है। दरअसल, तृणमूल कांग्रेस उन मतदाताओं को आगाह करना चाहती है जो सीपीएम के विरोधी हैं लेकिन भाजपा की ओर झुक रहे हैं। उन्हें यह संदेश देने की कोशिश की गई है कि भाजपा को मजबूत करने से अंतत: वही पुराने वामपंथी कैडर दोबारा शक्तिशाली होंगे। मेदिनीपुर की इस सभा से स्पष्ट हो गया है कि तृणमूल कांग्रेस आगामी चुनावों में दोहरे मोर्चे (भाजपा और वामदल) पर अपनी आक्रामक रणनीति जारी रखेगी।