तारातला में निर्माणाधीन गोदाम की छत ढही, 3 मजदूरों की मौत, 18 को बचाया गया
ऊपर से दबाव के कारण नहीं हुआ इलाज, बदलना पड़ा अस्पताल
कोलकाता। सोनारपुर में भारी जनविरोध, धक्का-मुक्की और कीचड़-अंडे फेंके जाने की हिंसक घटना के बाद सांसद अभिषेक बनर्जी की तबीयत बिगड़ गई, जिसके बाद शनिवार शाम उन्हें अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा। घटना के तुरंत बाद उन्हें ईएम बाइपास के पास स्थित एक निजी अस्पताल के आपातकालीन विभाग ले जाया गया, जहां इलाज के दौरान सांसद को व्हीलचेयर पर देखा गया। इस बीच, अस्पताल पहुंचे तृणमूल नेताओं के जमावड़े और ममता बनर्जी के एक सनसनीखेज आरोप के बाद इस पूरे घटनाक्रम ने बेहद नाटकीय और गंभीर मोड़ ले लिया।
प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, अस्पताल परिसर में अभिषेक बनर्जी को व्हीलचेयर पर लाया गया, जहां डॉक्टरों ने उनका प्राथमिक उपचार शुरू किया। घटना की खबर मिलते ही तृणमूल सुप्रीमो ममता बनर्जी कालीघाट स्थित अपने आवास से सीधे अस्पताल पहुंचीं। उनके साथ अभिषेक की मां लता बनर्जी भी थीं। इसके अलावा, तृणमूल के वरिष्ठ नेता शोवन चट्टोपाध्याय और राज्यसभा सांसद डेरेक ओÓब्रायन सहित कई पार्टी पदाधिकारी और समर्थक भारी संख्या में अस्पताल पहुंच गए, जिससे वहां का माहौल बेहद तनावपूर्ण हो गया।
अस्पताल के भीतर कुछ समय बिताने के बाद जब ममता बनर्जी बाहर निकलीं, तो उन्होंने मीडिया के सामने प्रशासन और अस्पताल प्रबंधन पर बड़ा हमला बोला। ममता बनर्जी ने बेहद गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि अस्पताल में अभिषेक का उचित इलाज नहीं किया जा रहा था। उन्होंने दावा किया कि अभिषेक के उपचार में जानबूझकर बाधा डाली गई क्योंकि अस्पताल प्रबंधन पर ऊपर से भारी दबाव था। ऐसी परिस्थितियों में हम कोई जोखिम नहीं ले सकते, इसलिए उन्हें तुरंत दूसरे अस्पताल में स्थानांतरित करने का निर्णय लिया गया।
ममता बनर्जी के इस तीखे बयान के तुरंत बाद अभिषेक बनर्जी को अस्पताल के कपड़ों में ही व्हीलचेयर पर बाहर लाया गया और कड़ी सुरक्षा के बीच मिंटो पार्क स्थित एक अन्य निजी अस्पताल ले जाया गया, जहां उन्हें आगे की चिकित्सा के लिए भर्ती कराया गया है। हालांकि, पहले अस्पताल के अधिकारियों ने मुख्यमंत्री द्वारा लगाए गए ऊपर से दबाव और इलाज न करने के आरोपों पर आधिकारिक रूप से कोई भी टिप्पणी करने से साफ इनकार कर दिया। सोनारपुर में हुए हमले से लेकर देर रात तक अस्पतालों में चले इस सियासी ड्रामे ने बंगाल की राजनीति में लगी आग को और भड़का दिया है। तृणमूल जहां इसे जानलेवा राजनीतिक हमला और विपक्ष के खिलाफ दमनकारी नीति बता रही है, वहीं भाजपा इसे केवल जनता का स्वत:स्फूर्त गुस्सा करार दे रही है। बहरहाल, ममता बनर्जी के इस नए आरोप के बाद अब राजनीति की सुई निजी अस्पतालों की सुरक्षा और उन पर बनने वाले कथित राजनीतिक दबाव की ओर घूम गई है।