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जानकारों का मानना है कि तृणमूल और विपक्ष के बीच छिड़ी यह जुबानी जंग आने वाले मतदान के चरणों में और भी ज्यादा आक्रामक और दिलचस्प हो सकती है
कोलकाता। चुनावी सरगर्मियों के बीच राजनीतिक बयानबाजी ने अब एक बेहद तीखा मोड़ ले लिया है। तृणमूल के महासचिव अभिषेक बनर्जी ने विपक्ष पर चौतरफा हमला बोलते हुए राजनीति के मैदान में वीडियो बम के जरिए नया विवाद खड़ा कर दिया है। अभिषेक बनर्जी ने विशेष रूप से हुमायूं कबीर और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को अपने निशाने पर लेते हुए गंभीर आरोप लगाए हैं। एक चुनावी जनसभा को संबोधित करते हुए अभिषेक ने दावा किया कि हुमायूं कबीर भाजपा के इशारों और उनके द्वारा दी गई मोटी फंडिंग पर सर्कस कर रहे हैं।
उन्होंने प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अधीर रंजन चौधरी को भी नहीं बख्शा और उन्हें सीधे तौर पर भाजपा की बी-टीम करार देते हुए तंज कसा कि कुछ नेता अपने निजी राजनीतिक स्वार्थ की पूर्ति के लिए लगातार गिरगिट की तरह अपना रुख बदल रहे हैं। यह पूरा विवाद उस समय और गहरा गया जब तृणमूल की ओर से हुमायूं कबीर का एक वीडियो सोशल मीडिया पर साझा किया गया। हालांकि इस वीडियो की आधिकारिक सत्यता की पुष्टि अभी नहीं हो पाई है, लेकिन इसने मुर्शिदाबाद की राजनीति में भूचाल ला दिया है। इस वायरल वीडियो के संदर्भ में जब केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से तीखे सवाल पूछे गए कि क्या भाजपा और हुमायूं कबीर के बीच कोई गुप्त समझौता हुआ है या क्या भाजपा ने उन्हें 1000 करोड़ रुपये की फंडिंग दी है, तो शाह ने इन आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया।
अमित शाह ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि भाजपा और बाबरी बनाने वाली विचारधारा के लोगों के बीच उत्तर और दक्षिण ध्रुव जैसा फासला है और उनके बीच किसी भी प्रकार के संबंध का सवाल ही पैदा नहीं होता। अमित शाह के इस स्पष्टीकरण के तुरंत बाद तृणमूल ने जवाबी कार्रवाई करते हुए साल 2019 का एक पुराना वीडियो जारी कर दिया, जिसमें हुमायूं कबीर कथित तौर पर भाजपा नेताओं के साथ खड़े दिखाई दे रहे हैं।
अभिषेक बनर्जी ने इस वीडियो का हवाला देते हुए ऐतिहासिक संदर्भों को कुरेदा और सवाल उठाया कि 1992 के बाबरी कांड के जिम्मेदार लोगों के साथ हुमायूं कबीर ने हाथ कैसे मिलाया। उन्होंने जनता के बीच यह संदेश देने की कोशिश की कि विपक्ष के कथनी और करनी में बड़ा अंतर है। चुनाव से ऐन पहले मुर्शिदाबाद के इस रणक्षेत्र में आरोपों और प्रत्यारोपों के इस नए दौर ने राजनीतिक तापमान को चरम पर पहुँचा दिया है। जानकारों का मानना है कि तृणमूल और विपक्ष के बीच छिड़ी यह जुबानी जंग आने वाले मतदान के चरणों में और भी ज्यादा आक्रामक और दिलचस्प हो सकती है।