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धरना मंच से संबोधित करते हुए अभिषेक बनर्जी ने कहा कि बंगाल की जनता को अब भाजपा की राजनीति का जवाब देना होगा। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र और मतदाताओं के अधिकारों की रक्षा के लिए समाज के हर वर्ग को एकजुट होकर भाजपा के खिलाफ खड़ा होना होगा।
मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) और लाखों नामों को “अंडर एडजुडिकेशन” में रखने के मुद्दे को लेकर पश्चिम बंगाल की राजनीति लगातार गरमाई हुई है। इसी मुद्दे पर आयोजित धरना मंच से तृणमूल कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी ने भारतीय जनता पार्टी पर तीखा हमला बोलते हुए लोगों से भाजपा का सामाजिक रूप से बहिष्कार करने की अपील की।
धरना मंच से संबोधित करते हुए अभिषेक बनर्जी ने कहा कि बंगाल की जनता को अब भाजपा की राजनीति का जवाब देना होगा। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र और मतदाताओं के अधिकारों की रक्षा के लिए समाज के हर वर्ग को एकजुट होकर भाजपा के खिलाफ खड़ा होना होगा।अभिषेक बनर्जी ने कहा, “2021 के विधानसभा चुनाव के समय कई सामाजिक संगठनों ने ‘नो वोट टू बीजेपी’ का नारा दिया था। आज हम इस मंच से 10 करोड़ बंगालवासियों को साक्षी मानकर कह रहे हैं कि अब भाजपा का सामाजिक बहिष्कार करना होगा। भाजपा को हर स्तर पर बहिष्कृत करें।”
उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र की सत्ता में बैठी भाजपा लोकतांत्रिक संस्थाओं और केंद्रीय एजेंसियों का इस्तेमाल राजनीतिक विरोधियों को दबाने के लिए कर रही है। अभिषेक ने कहा कि भाजपा के पास प्रवर्तन निदेशालय (ईडी), केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई), आयकर विभाग और अन्य कई संस्थाओं की ताकत है, लेकिन इसके बावजूद वह बंगाल की जनता का समर्थन हासिल नहीं कर पा रही है।उन्होंने कहा कि तृणमूल कांग्रेस के पास ऐसी कोई संस्थागत ताकत नहीं है, लेकिन पार्टी के साथ राज्य की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और बंगाल की जनता का विश्वास है। अभिषेक ने कहा कि यही विश्वास तृणमूल कांग्रेस की सबसे बड़ी ताकत है और इसी के दम पर पार्टी भाजपा की राजनीति का मुकाबला कर रही है।अपने संबोधन में अभिषेक बनर्जी ने भाजपा नेताओं पर यह आरोप भी लगाया कि वे लगातार उन्हें निशाना बनाते रहते हैं। उन्होंने कहा कि जब भी भाजपा के बड़े नेता बंगाल आते हैं, उनके भाषणों में शुरुआत से अंत तक उनका नाम लिया जाता है। उन्होंने व्यंग्य करते हुए कहा कि भाजपा नेताओं को उनसे इतनी परेशानी है कि उनके बिना उनका भाषण पूरा ही नहीं होता।धरना मंच से अभिषेक बनर्जी ने मतदाता सूची में लाखों नामों को “अंडर एडजुडिकेशन” में रखने के मुद्दे पर भी सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि अगर राज्य में लगभग 60 लाख लोगों के नाम विचाराधीन रखे जा सकते हैं, तो यह लोकतंत्र के लिए गंभीर चिंता का विषय है।उन्होंने कहा कि तृणमूल कांग्रेस को “विचाराधीन” शब्द से आपत्ति नहीं है, लेकिन अगर इस प्रक्रिया का इस्तेमाल लोगों के अधिकारों को सीमित करने के लिए किया जाएगा, तो पार्टी इसका विरोध करती रहेगी। अभिषेक ने कहा कि अगर इतने बड़े पैमाने पर लोगों के नाम विचाराधीन रखे जा सकते हैं, तो फिर देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की कुर्सी भी विचाराधीन होनी चाहिए। इस दौरान भाजपा नेता सजल द्वारा पूर्व भारतीय क्रिकेट कप्तान सौरव गांगुली को लेकर दिए गए बयान पर भी अभिषेक बनर्जी ने प्रतिक्रिया दी। उन्होंने भाजपा पर पलटवार करते हुए कहा कि अगर सौरोव गांगुली को लेकर इस तरह की टिप्पणी की जा रही है, तो फिर वर्ष 2021 में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह उनके बेहाला स्थित घर क्यों गए थे।अभिषेक ने कहा कि उस समय अमित शाह ने वहां जाकर उनसे मुलाकात की थी और भोजन भी किया था। उन्होंने कहा कि सौरोव गांगुली एक सम्मानित बंगाली हैं और उन्होंने कभी भी किसी के सामने सिर नहीं झुकाया। इसलिए भाजपा नेताओं को इस तरह के बयान देने से पहले सोच-समझकर बोलना चाहिए।अभिषेक बनर्जी ने अपने भाषण में यह भी कहा कि लोकतंत्र में हर नागरिक को सवाल पूछने का अधिकार है और सत्ता में बैठे लोगों को भी जनता के सवालों का जवाब देना पड़ता है। उन्होंने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का उदाहरण देते हुए कहा कि वह देश की ऐसी नेता हैं जिन्होंने एक सामान्य नागरिक की तरह सुप्रीम कोर्ट में जाकर अपनी लड़ाई लड़ी है।
निर्लज्ज और बेहया है बीजेपी और चुनाव आयोग : ममता
मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को लेकर शुरू हुए धरना कार्यक्रम के पहले दिन पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने भारतीय जनता पार्टी और चुनाव आयोग पर तीखा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि मतदाताओं के अधिकारों के साथ जिस तरह से छेड़छाड़ की जा रही है, वह लोकतंत्र के लिए बेहद चिंताजनक है।धरना मंच से संक्षिप्त संबोधन में ममता बनर्जी ने भाजपा और चुनाव आयोग को “निर्लज्ज” करार दिया। उन्होंने कहा कि जिस प्रकार से लोगों के वोट के अधिकार का हनन किया गया है, वह किसी भी तरह से स्वीकार्य नहीं है। ममता ने कहा, “लोगों के वोट छीनना या उनके नामों को संदेह के दायरे में डालना लोकतंत्र के खिलाफ है। यह अपने आप में पाप से कम नहीं है।”
मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि मतदाता सूची के पुनरीक्षण की प्रक्रिया का इस्तेमाल राजनीतिक उद्देश्य से किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि लाखों लोगों के नामों को “अंडर एडजुडिकेशन” या विचाराधीन बताकर उन्हें असमंजस की स्थिति में डाल दिया गया है, जिससे आम मतदाता परेशान हो रहे हैं।
ममता बनर्जी ने यह भी स्पष्ट किया कि यह आंदोलन लोकतंत्र और आम लोगों के अधिकारों की रक्षा के लिए किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि तृणमूल कांग्रेस हमेशा जनता के अधिकारों के लिए लड़ती रही है और आगे भी लड़ती रहेगी।हालांकि, धरना के पहले दिन उन्होंने अपना संक्षिप्त वक्तव्य ही रखा और कहा कि इस मुद्दे पर वह विस्तृत रूप से शनिवार को अपनी बात रखेंगी। राजनीतिक पर्यवेक्षकों का मानना है कि शनिवार को ममता बनर्जी इस पूरे मामले पर विस्तार से अपना पक्ष रखते हुए केंद्र सरकार और भाजपा पर और तीखा हमला कर सकती हैं।