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'मैं और ममता दोनों ही सर्वहारा'
कोलकाता। आरजी कर मेडिकल कॉलेज में बर्बरता की शिकार हुई महिला डॉक्टर की मां और पनिहाटी से नवनिर्वाचित भाजपा विधायक रत्ना देवनाथ ने सोमवार को पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर अब तक का सबसे तीखा और सीधा हमला बोला है। राज्य सचिवालय नवान्न में मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी से एक बेहद महत्वपूर्ण मुलाकात के बाद उन्होंने सोशल मीडिया पर एक बेहद भावुक और राजनीतिक संदेश साझा कर राजनीतिक हलकों में खलबली मचा दी। ममता बनर्जी पर बड़ा कटाक्ष करते हुए रत्ना देवनाथ ने लिखा कि आज की तारीख में वे और ममता बनर्जी दोनों ही सर्वहारा (सबकुछ गंवा चुके) हो चुके हैं; फर्क सिर्फ इतना है कि उन्होंने अपनी इकलौती लाडली बेटी को खोया है और जनसेवा का संकल्प लिया है, जबकि ममता बनर्जी ने चौदहवीं मंजिल की अपनी सत्ता और मुख्यमंत्री की कुर्सी खो दी है। उन्होंने दावा किया कि आने वाले दिनों में बंगाल की जनता तृणमूल और उनकी पूरी टीम की इससे भी बदतर स्थिति देखेगी। अपने संदेश के अंत में उन्होंने गर्व से लिखा कि उनकी असली पहचान यही है कि वे डॉक्टर देवनाथ की गर्वित मां हैं।
इस हाई-प्रोफाइल मुलाकात के दौरान रत्ना देवनाथ ने मुख्यमंत्री शुभेंदु को एक सीलबंद लिफाफा सौंपा, जिसमें आरजी कर कांड में प्रत्यक्ष और परोक्ष रूप से शामिल कई अन्य रसूखदार संदिग्धों के नाम दर्ज हैं। उनका संगीन आरोप है कि इस जघन्य अपराध को अंजाम देने और सबूतों को मिटाने में कई अन्य लोग भी शामिल थे, जिनके नामों की जानकारी उन्होंने पहले भी केंद्रीय जांच एजेंसियों को दी थी। इधर, मुख्यमंत्री से इस सूची के मिलते ही प्रशासनिक स्तर पर बहुत बड़ी कार्रवाई शुरू हो गई है। सीएम शुभेंदु ने आरजी कर कांड के वक्त कोलकाता पुलिस और सुरक्षा की जिम्मेदारी संभाल रहे तीन तत्कालीन शीर्ष आईपीएस अधिकारी विनीत गोयल, इंदिरा मुखोपाध्याय और अभिषेक गुप्ता के खिलाफ तत्काल प्रभाव से कड़ी विभागीय जांच के आदेश दे दिए हैं। मामले की गंभीरता को देखते हुए इन तीनों ही वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों को फिलहाल निलंबित कर दिया गया है।
प्रशासनिक और कानूनी मोर्चे पर भी यह मामला अब एक नए और निर्णायक मोड़ पर पहुंच गया है। हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने आरजी कर मामले की दोबारा और नए सिरे से व्यापक जांच कराने का एक ऐतिहासिक आदेश जारी किया है। अदालत ने जांच का दायरा बढ़ाते हुए एक विशेष जांच दल गठित करने का निर्देश दिया है, जिसे आगामी 25 जून तक अपनी विस्तृत स्टेटस रिपोर्ट कोर्ट में सौंपनी होगी। विधायक बनने के बाद भी अपनी जिंदगी के खालीपन को बयां करते हुए रत्ना देवनाथ ने कहा कि उनकी दुनिया की सारी खुशियां अब खत्म हो चुकी हैं और विधायक पद मिलने के बाद भी उनका एकमात्र अंतिम लक्ष्य अपनी बेटी के लिए पूर्ण न्याय हासिल करना और दोषियों को फांसी के फंदे तक पहुंचाना है।