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भाजपा सांसद को मिला 'बंगविभूषण', बंगाल की राजनीति में नई हलचल
कोलकाता। विधानसभा चुनाव की आहट के बीच शनिवार को कोलकाता के देशप्रिय पार्क से एक ऐसी तस्वीर सामने आई, जिसने राज्य के राजनीतिक समीकरणों को लेकर नई अटकलों को जन्म दे दिया है। अंतरराष्ट्रीय मातृभाषा दिवस के अवसर पर राज्य सरकार द्वारा आयोजित भव्य कार्यक्रम में भाजपा के राज्यसभा सांसद और राजबंशी समुदाय के प्रभावशाली नेता अनंत महाराज न केवल मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के साथ मंच साझा करते नजर आए, बल्कि उन्हें राज्य के सर्वोच्च नागरिक सम्मान 'बंगविभूषण' से भी नवाजा गया। चुनाव से ठीक पहले एक धुर विरोधी दल के सांसद की मुख्यमंत्री के साथ यह नजदीकी भाजपा के लिए असहज स्थिति पैदा करती दिख रही है। शनिवार को देशप्रिय पार्क में आयोजित कार्यक्रम के दौरान माहौल तब पूरी तरह बदल गया जब अनंत महाराज मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के साथ ही कार्यक्रम स्थल पर पहुंचे। दोनों नेताओं ने साथ मिलकर शहीद स्मारक पर श्रद्धांजलि अर्पित की और मंच पर भी अनंत महाराज का स्थान मुख्यमंत्री के ठीक बगल में रखा गया था। राजबंशी समुदाय के सामाजिक और आर्थिक उत्थान में उनके योगदान को रेखांकित करते हुए मुख्यमंत्री ने उन्हें 'बंगविभूषण' प्रदान किया। सम्मान ग्रहण करने के बाद अनंत महाराज ने मंच से राजबंशी भाषा में एक कविता भी सुनाई, जिसे मुख्यमंत्री के प्रति उनके नरम रुख के तौर पर देखा जा रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह घटनाक्रम भाजपा के लिए किसी बड़े झटके से कम नहीं है। एक तरफ जहां प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह लगातार बंगाल दौरे कर तृणमूल सरकार के खिलाफ मोर्चा खोले हुए हैं, वहीं दूसरी ओर उनकी ही पार्टी के सांसद का सरकारी मंच पर सम्मानित होना पार्टी की 'आक्रामक छवि' को प्रभावित कर सकता है। हालांकि, मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि अनंत महाराज को अन्य कार्यक्रमों की व्यस्तता के कारण जल्दी निकलना था, लेकिन उनके संक्षिप्त भाषण और मुख्यमंत्री द्वारा जताए गए आभार ने भविष्य के नए समीकरणों की ओर इशारा कर दिया है। इस पूरे प्रकरण पर भाजपा नेतृत्व ने फिलहाल बेहद सधी हुई और औपचारिक प्रतिक्रिया दी है। केंद्रीय मंत्री सुकांत मजूमदार ने संक्षिप्त लहजे में कहा कि यह राज्य सरकार द्वारा दिया गया सम्मान था जिसे उन्होंने स्वीकार किया। वहीं, प्रदेश अध्यक्ष शमिक भट्टाचार्य ने इसे सामान्य शिष्टाचार बताते हुए कहा कि उनके सहकर्मी को सम्मान मिलना खुशी की बात है। लेकिन पर्दे के पीछे भाजपा के भीतर इस बात को लेकर सुगबुगाहट तेज है कि कहीं यह 'नाराज' चल रहे राजबंशी नेता के दल-बदल की पूर्वपीठिका तो नहीं है। भाषा दिवस के इस मंच ने फिलहाल बंगाल की राजनीति में 'सम्मान' और 'संकेतों' की एक नई बहस छेड़ दी है। आगामी विधानसभा चुनावों में उत्तर बंगाल के राजबंशी वोट बैंक पर पकड़ बनाने की जद्दोजहद में जुटी दोनों प्रमुख पार्टियों के बीच, अनंत महाराज की यह तस्वीर आने वाले दिनों में किसी बड़े सियासी उलटफेर का संकेत हो सकती है।
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