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अमित मालवीय का ममता सरकार पर तीखा हमला, डब्ल्यूबीसीएस अधिकारियों को गुमराह करने का आरोप

अंत में अमित मालवीय ने कहा कि अतिरिक्त पदों के सृजन को बड़े सुधार के रूप में पेश करना वास्तविक समाधान नहीं है

19 Feb 2026

अमित मालवीय का ममता सरकार पर तीखा हमला, डब्ल्यूबीसीएस अधिकारियों को गुमराह करने का आरोप

कोलकाता। वरिष्ठ भाजपा नेता अमित मालवीय ने गुरुवार को सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर एक बयान जारी कर पश्चिम बंगाल सरकार द्वारा डब्ल्यूबीसीएस (एग्जीक्यूटिव) सेवाओं में अतिरिक्त पदों के सृजन और कैडर शेड्यूल में संशोधन के फैसले पर कड़ा सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि इन कदमों को “ऐतिहासिक सुधार” के रूप में पेश करना वास्तव में अधिकारियों को गुमराह करने की कोशिश है। यह सुधार “बहुत कम और बहुत देर से” किए गए हैं।
मालवीय ने आरोप लगाया कि सरकार छोटे-छोटे प्रशासनिक बदलावों को बढ़ा-चढ़ाकर पेश कर रही है, जबकि वर्षों से लंबित मूल समस्याओं को नजरअंदाज किया जा रहा है। उनके अनुसार, वित्तीय वंचना, लंबे समय से चली आ रही पदोन्नति में देरी और प्रशासनिक असुरक्षा जैसे मुद्दों का समाधान किए बिना ऐसे ऐलान केवल दिखावटी साबित होंगे।
उन्होंने कहा कि महंगाई भत्ते (डीए) का भुगतान न होने से डब्ल्यूबीसीएस अधिकारियों को भारी आर्थिक नुकसान हो रहा है। एंट्री-लेवल के एक डब्ल्यूबीसीएस अधिकारी को हर साल लगभग 2.82 लाख रुपये का नुकसान उठाना पड़ रहा है, जबकि स्पेशल सेक्रेटरी स्तर के अधिकारी को सालाना करीब 8.88 लाख रुपये की हानि हो रही है। जब तक इस बुनियादी अन्याय को दूर नहीं किया जाता, तब तक सेवा सुधार की बात करना खोखला है।
अमित मालवीय ने आईएएस में पदोन्नति को लेकर भी गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, तमिलनाडु, बिहार, राजस्थान, गुजरात, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड जैसे राज्यों में राज्य सेवा अधिकारियों को 15 से 17 वर्षों में आईएएस में पदोन्नति मिल जाती है, जबकि पश्चिम बंगाल में डब्ल्यूबीसीएस (एग्जीक्यूटिव) अधिकारियों को 26 से 27 वर्षों तक इंतजार करना पड़ता है।
उन्होंने आगे कहा कि हाल के वर्षों में यह प्रतीक्षा अवधि और बढ़कर 30 से 32 वर्षों तक पहुंच गई है। उदाहरण देते हुए उन्होंने बताया कि 1992–93 बैच के अधिकारियों को 2025 में आईएएस में पदोन्नति मिली, जिनमें से कुछ अधिकारी पदोन्नति के कुछ ही महीनों बाद सेवानिवृत्त हो गए, जिससे उन्हें वास्तविक कैरियर और वित्तीय लाभ नहीं मिल सका।
मालवीय के अनुसार, 56 वर्ष की आयु पार करने के कारण बड़ी संख्या में अधिकारी आईएएस पदोन्नति के लिए अयोग्य हो जाते हैं। इसके चलते कई बैचों के लगभग आधे अधिकारी पदोन्नति से वंचित रह जाते हैं और उन्हें सेवानिवृत्ति के समय भारी वित्तीय नुकसान उठाना पड़ता है, जो वर्षों से लंबित डीए की समस्या से और बढ़ जाता है।
उन्होंने कैडर शेड्यूल में संशोधन के दावों को भी जमीनी हकीकत से परे बताया। मालवीय ने कहा कि सेवाओं के बीच कोई समान कैडर संरचना नहीं है। डिप्टी सेक्रेटरी बीडीओ के रूप में और जॉइंट सेक्रेटरी समान रैंक वाले जिलाधिकारियों के अधीन एडीएम के रूप में काम कर रहे हैं, जो संरचनात्मक विरोधाभास को दर्शाता है।
भाजपा नेता ने कहा कि एसडीओ के रूप में पोस्टिंग को पदोन्नति बताना भ्रामक है, क्योंकि यह केवल एक तैनाती है, न कि रैंक में उन्नति। उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि एंट्री-लेवल पदों की संख्या बढ़ाकर यदि उच्च पदों में समानुपातिक वृद्धि नहीं की गई, तो इससे सेवा में ठहराव और बढ़ेगा।
मालवीय ने आरोप लगाया कि प्रदर्शन मूल्यांकन प्रणाली में राजनीतिक हस्तक्षेप बढ़ रहा है, जिससे प्रशासनिक निष्पक्षता और स्वस्थ कार्यसंस्कृति प्रभावित हो रही है। इसके साथ ही उन्होंने मनमाने तबादलों और पोस्टिंग का मुद्दा उठाते हुए कहा कि स्थापित स्थानांतरण नियम कमजोर पड़ गए हैं, जिससे अधिकारियों में असुरक्षा की भावना गहराई है।
उन्होंने 2014 में लागू ‘डिटेलमेंट’ प्रावधान का भी उल्लेख करते हुए कहा कि यह व्यवस्था मनमाने इस्तेमाल के लिए खुली हुई है और इससे डब्ल्यूबीसीएस अधिकारियों की असुरक्षा और बढ़ती है।
अंत में अमित मालवीय ने कहा कि अतिरिक्त पदों के सृजन को बड़े सुधार के रूप में पेश करना वास्तविक समाधान नहीं है। जब तक डीए के बकाया का भुगतान, पदोन्नति प्रक्रिया का युक्तिकरण, वास्तविक कैडर सुधार और मनमाने प्रशासनिक निर्णयों पर अंकुश नहीं लगाया जाता, तब तक ऐसे कदम केवल प्रतीकात्मक रहेंगे और डब्ल्यूबीसीएस अधिकारियों को वास्तविक न्याय नहीं मिलेगा।

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