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'मतदान के दिन घर पर रहें वरना 5 मई को भेजेंगे जेल'
कोलकाता। बीरभूम की धरती सोमवार को उस वक्त सियासी गर्जना से दहल उठी, जब केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने बोलपुर की चुनावी सभा में तृणमूल कांग्रेस के खिलाफ अब तक का सबसे कड़ा रुख अपनाया। कटमनी और सिंडिकेट राज पर प्रहार करते हुए शाह ने दो-टूक शब्दों में चेतावनी दी कि यदि बंगाल में भाजपा की सरकार बनती है, तो भ्रष्टाचार में लिप्त लोगों को उल्टा लटका कर सीधा कर दिया जाएगा।
उन्होंने कार्यकर्ताओं में जोश भरते हुए साफ कर दिया कि सत्ता परिवर्तन के बाद तृणमूल के गुंडों के दिन गिनती के रह जाएंगे। बोलपुर के पल्लीमंगल क्लब मैदान से गरजते हुए अमित शाह ने मयूरश्वर में भाजपा कार्यकर्ताओं पर हुए हालिया हमलों का विशेष जिक्र किया। उन्होंने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि जो लोग हिंसा पर उतारू हैं, वे 23 अप्रैल को घरों में ही रहें, क्योंकि 5 मई के बाद उन्हें जेल की सलाखों के पीछे पहुँचाने की प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी। उन्होंने जनता से आह्वान किया कि वे बम का जवाब बैलेट से दें और घुसपैठ की समस्या को जड़ से खत्म करने के लिए भाजपा को वोट दें। शाह ने वादा किया कि भाजपा एक ऐसा बंगाल बनाएगी जहाँ रात 1 बजे भी महिलाएँ सुरक्षित महसूस कर सकेंगी और आरजी कर जैसी हृदयविदारक घटनाएं इतिहास का हिस्सा बन जाएंगी। अमित शाह ने अपने भाषण में भ्रष्टाचार की लंबी फेहरिस्त पेश की। शिक्षक भर्ती से लेकर राशन घोटाले और मनरेगा से लेकर प्रधानमंत्री आवास योजना तक, उन्होंने राज्य सरकार पर जनता का पैसा हड़पने का आरोप लगाया।
उन्होंने दावा किया कि केंद्र की जल जीवन मिशन जैसी योजनाओं का फंड तृणमूल के नेताओं की जेबों में गया है। इसके साथ ही उन्होंने बंगाल में समान नागरिक संहिता लागू करने का बड़ा वादा भी किया। शाह ने भावुक अपील करते हुए कहा कि शांति निकेतन और रवींद्रनाथ टैगोर की विरासत को जो नुकसान पहुँचाया गया है, उसका हिसाब जनता अपने वोट से लेगी।
दिलचस्प बात यह रही कि जिस वक्त शाह बोलपुर में हुंकार भर रहे थे, उससे कुछ ही दूरी पर सिउड़ी में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी भी अपनी सभा को संबोधित कर रही थीं। जहाँ शाह ने भ्रष्टाचार को मुद्दा बनाया, वहीं ममता ने केंद्र पर बंगाल की उपेक्षा और फंड रोकने का आरोप मढ़कर पलटवार किया।
शाह ने रानीगंज पहुँचकर जितेंद्र तिवारी के लिए वोट मांगते हुए उन्हें भविष्य में बड़ी जिम्मेदारी देने का संकेत भी दिया। बीरभूम का यह चुनावी दंगल अब उस मोड़ पर पहुँच गया है जहाँ एक तरफ सत्ता बचाने की जद्दोजहद है, तो दूसरी तरफ उल्टा लटका देने जैसे सख्त तेवरों के साथ सत्ता छीनने का संकल्प।