स्टीफन कोर्ट के बाद कोलकाता में दूसरी बार बड़े स्तर पर होगी डीएनए मैपिंग
कोलकाता। आनंदपुर के नाजिराबाद स्थित गोदामों में लगी भीषण आग के बाद मलबे से मौत के अवशेष निकलने का सिलसिला जारी है। गुरुवार को मलबे की सफाई के दौरान चार और जले हुए शव मिलने के बाद इस हृदयविदारक हादसे में मृतकों की कुल संख्या 25 तक पहुंच गई है। पिछले रविवार की रात लगी इस आग ने न केवल संपत्तियों को खाक किया, बल्कि दर्जनों जिंदगियां भी निगल लीं। जैसे-जैसे फॉरेंसिक टीम और बचाव दल मलबे की गहराई तक जा रहे हैं, वैसे-वैसे स्थिति और भी भयावह होती जा रही है। पुलिस प्रशासन के लिए सबसे बड़ी चुनौती मृतकों की शिनाख्त करना है। बरामद हुए सभी शव इस कदर जल चुके हैं कि उनकी सामान्य पहचान करना नामुमकिन है। पुलिस के अनुसार, अब तक केवल एक शव ऐसा मिला है जो आंशिक रूप से सुरक्षित है, हालांकि वह भी 90 प्रतिशत तक झुलसा हुआ है। कपड़ों के आधार पर उसके मोमो कंपनी का कर्मचारी होने का अनुमान लगाया जा रहा है। बाकी अवशेषों की पहचान के लिए राज्य फॉरेंसिक पैथोलॉजी विभाग ने डीएनए मैपिंग की प्रक्रिया शुरू कर दी है। लापता लोगों के परिजनों से अब तक 32 रक्त और लार के नमूने लिए गए हैं, जिनका मिलान शवों के दांतों और हड्डियों से किया जाएगा। इस भीषण लापरवाही के मामले में पुलिस ने अपनी कार्रवाई तेज कर दी है। पुष्पांजलि डेकोरेटर के मालिक गंगाधर दास की गिरफ्तारी के बाद अब मोमो बनाने वाली कंपनी के दो शीर्ष अधिकारियों को भी सलाखों के पीछे भेज दिया गया है। गिरफ्तार किए गए आरोपियों में कंपनी के मैनेजर मनोरंजन शिट और डिप्टी मैनेजर राजा चक्रवर्ती शामिल हैं। गुरुवार को दोनों को बारुईपुर महकमा अदालत में पेश किया गया। पुलिस इन अधिकारियों से सुरक्षा मानकों की अनदेखी और अवैध भंडारण के पहलुओं पर पूछताछ कर रही है।
शहर के इतिहास में यह दूसरा ऐसा मौका है जब अग्निकांड के बाद पहचान के लिए डीएनए मैपिंग अनिवार्य हो गई है। इससे पहले स्टीफन कोर्ट हादसे में शवों के बुरी तरह जल जाने के कारण यह प्रक्रिया अपनाई गई थी। हालांकि ढाकुरिया अमरी अस्पताल हादसे में मृतकों की संख्या अधिक थी, लेकिन वहां मौत का मुख्य कारण दम घुटना था, जिससे शव सुरक्षित थे। आनंदपुर की घटना में शवों और हड्डियों के मलबे में आपस में मिल जाने के कारण फॉरेंसिक विशेषज्ञों को जांच में अधिक समय लग सकता है। अधिकारी इस बार अत्यंत सावधानी बरत रहे हैं ताकि स्टीफन कोर्ट जैसी पहचान संबंधी कोई त्रुटि न हो।