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जले हुए मलबे से 27 मानव अवशेष बरामद
कोलकाता। आनंदपुर की उस भयावह रात को बीते छह दिन हो चुके हैं, लेकिन राख के ढेर से निकलती दर्दनाक सच्चाइयां अब भी रोंगटे खड़े कर रही हैं। शनिवार तक जले हुए गोदाम के मलबे से कुल 27 मानव अवशेष बरामद किए गए हैं। हालांकि, प्रशासन के लिए अभी भी यह कहना कठिन है कि मृतकों की वास्तविक संख्या कितनी है, क्योंकि अवशेष पूरी तरह जलकर खाक हो चुके हैं। लापता 27 लोगों के परिजनों के लिए अब केवल फॉरेंसिक रिपोर्ट ही अंतिम उम्मीद बची है, जो यह स्पष्ट करेगी कि मलबे में मिले अवशेष उनके अपनों के हैं या नहीं। बरामद किए गए सभी अवशेषों को अत्यंत सावधानी के साथ फॉरेंसिक साइंस लेबोरेटरी भेज दिया गया है।
पुलिस सूत्रों के अनुसार, अवशेषों की स्थिति इतनी खराब है कि प्राथमिक स्तर पर पहचान करना लगभग असंभव है। बारुईपुर पुलिस जिले के वरिष्ठ अधिकारियों ने बताया कि अब पहचान की पूरी प्रक्रिया वैज्ञानिक पद्धति पर टिकी है। पहले अवशेषों का डीएनए प्रोफाइल तैयार किया जाएगा, जिसके बाद लापता लोगों के परिजनों के खून के नमूनों से उनका मिलान किया जाएगा।
पुलिस अधीक्षक शुभेंद्र कुमार ने भरोसा दिलाया है कि शिनाख्त की इस प्रक्रिया को प्राथमिकता के आधार पर जल्द से जल्द पूरा करने के प्रयास किए जा रहे हैं। इस भीषण त्रासदी पर देश के शीर्ष नेतृत्व ने भी गहरा दुख व्यक्त किया है। शुक्रवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हादसे पर शोक जताते हुए प्रधानमंत्री राष्ट्रीय राहत कोष से सहायता राशि का ऐलान किया। मृतकों के परिजनों को 2 लाख रुपये और घायलों को 50 हजार रुपये की अनुग्रह राशि दी जाएगी। वहीं, पश्चिम बंगाल सरकार की ओर से भी प्रत्येक मृतक के परिवार को 10 लाख रुपये की आर्थिक मदद देने की घोषणा की गई है।
हालांकि, परिजनों के लिए यह सहायता उनके अपनों को खोने के गम के आगे बौनी साबित हो रही है। हादसे की जांच कर रही पुलिस ने कानूनी कार्रवाई भी तेज कर दी है। शुक्रवार को पुलिस ने वाओ मोमो गोदाम के मैनेजर मनोरंजन शिट और डिप्टी मैनेजर राजा चक्रवर्ती को गिरफ्तार कर लिया। दोनों को बारुईपुर महकमा अदालत में पेश किया गया, जहां से उन्हें पांच दिनों की पुलिस हिरासत में भेज दिया गया है। इससे पहले, एक अन्य गोदाम के मालिक गंगाधर दास को भी गिरफ्तार किया जा चुका है। इस मामले में अब तक कुल तीन गिरफ्तारियां हुई हैं। पुलिस अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि क्या सुरक्षा मानकों की अनदेखी जानबूझकर की गई थी और इस लापरवाही के पीछे अन्य कौन से चेहरे शामिल हैं।