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मुख्यमंत्री की जांच की चेतावनी के बाद झुके अनीत थापा

24 घंटे के भीतर जीटीए प्रमुख का इस्तीफा

17 Jun 2026

मुख्यमंत्री की जांच की चेतावनी के बाद झुके अनीत थापा

कोलकाता। गोरखालैंड टेरिटोरियल एडमिनिस्ट्रेशन (जीटीए) की सियासत में उस समय भूचाल आ गया, जब इसके मुख्य कार्यकारी अनीत थापा ने अपने पद से अचानक इस्तीफा दे दिया। भारतीय गोरखा प्रजातांत्रिक मोर्चा (बीजीपीएम) के प्रमुख अनीत थापा वर्ष 2022 से इस शक्तिशाली पद पर काबिज थे और उनका कार्यकाल अभी एक वर्ष शेष था। चौंकाने वाली बात यह है कि यह बड़ा फैसला मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी द्वारा जीटीए में हुए कथित भारी भ्रष्टाचार की उच्च स्तरीय जांच कराने की आधिकारिक घोषणा के महज 24 घंटे के भीतर आया है। मुख्यमंत्री ने कर्सियांग दौरे के दौरान कड़ा रुख अपनाते हुए साफ कहा था कि वित्तीय अनियमितताओं की गहन जांच कर दोषियों को जेल भेजा जाएगा और किसी भी भ्रष्टाचारी को बख्शा नहीं जाएगा। इस चेतावनी के अगले ही दिन अनीत थापा ने पद छोड़ दिया, जिसे राजनीतिक हलकों में जांच के डर से उठाया गया कदम माना जा रहा है। 
इस्तीफा देने के बाद अनीत थापा ने एक वीडियो संदेश जारी कर अपनी सफाई पेश की। उन्होंने कहा कि राज्य में नई सरकार के गठन के बाद पहाड़ों के लोगों को काफी उम्मीदें थीं, लेकिन ऐतिहासिक त्रिपक्षीय समझौते के तहत गठित स्वायत्त निकाय जीटीए को वर्तमान सरकार कोई महत्व नहीं दे रही है। उन्होंने तर्क दिया कि जब संस्था को ही दरकिनार किया जा रहा हो, तो ऐसे में उनका पद पर बने रहने का कोई औचित्य नहीं रह जाता। अनीत ने स्पष्ट किया कि उनकी पार्टी अब पहाड़ों के स्थायी राजनीतिक समाधान और अलग गोरखालैंड राज्य की मांग पर नई सरकार की आगामी भूमिका का बारीकी से इंतजार करेगी। मालूम हो कि साल 2022 के जीटीए चुनाव में अनीत थापा की पार्टी ने तत्कालीन सत्ताधारी तृणमूल कांग्रेस के साथ गठबंधन कर 45 में से 27 सीटों पर ऐतिहासिक जीत दर्ज की थी, जबकि गोरखा जनमुक्ति मोर्चा ने इस चुनाव से दूरी बना ली थी।
अनीत थापा के इस नाटकीय इस्तीफे के बाद दार्जिलिंग के पहाड़ी क्षेत्रों में सियासी बयानबाजी तेज हो गई है। दार्जिलिंग के भाजपा विधायक नोमान ने इस फैसले का पुरजोर स्वागत करते हुए कहा कि जिस सरकार के दौर में इस जीटीए का ढांचा तैयार हुआ था, अब वह सत्ता से बाहर है और नई सरकार पहाड़ के स्थायी समाधान के लिए प्रतिबद्ध है, इसलिए यह फैसला बिल्कुल सही है। दूसरी तरफ, इंडियन गोरखा जनशक्ति फ्रंट के नेता अजय एडवर्ड्स ने अनीत थापा पर निशाना साधते हुए कहा कि वे भ्रष्टाचार के आरोपों से बच नहीं सकते। 
गौरतलब है कि साल 2011 में केंद्र, राज्य और गोरखा जनमुक्ति मोर्चा के बीच हुए समझौते के बाद वजूद में आया जीटीए दार्जिलिंग और कालिम्पोंग के शिक्षा, स्वास्थ्य, पर्यटन और लोक निर्माण जैसे 59 महत्वपूर्ण विभागों का प्रशासनिक व वित्तीय संचालन करता है, जिसमें बड़े पैमाने पर धांधली के आरोप लगते रहे हैं।

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