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बंगाल में सुनवाई पूरी होने से पहले ही बड़ी कार्रवाई
कोलकाता। बंगाल में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) की प्रक्रिया जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, चुनावी सरगर्मी और कानूनी विवाद दोनों तेज होते जा रहे हैं। ताजा अपडेट के अनुसार, राज्य में सुनवाई की प्रक्रिया अभी पूरी भी नहीं हुई है, लेकिन निर्वाचन आयोग ने लगभग 50 हजार लोगों के नाम मतदाता सूची से हटाने की सिफारिश कर दी है।
चुनाव आयोग के सूत्रों का कहना है कि यह कार्रवाई उन लोगों के खिलाफ की गई है जो बार-बार नोटिस दिए जाने के बावजूद सुनवाई में शामिल नहीं हुए और जिनकी पहचान को लेकर कोई ठोस दस्तावेजी प्रमाण नहीं मिल सके। आयोग द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, राज्य में अब तक 1 करोड़ 51 लाख से अधिक नोटिस भेजे जा चुके हैं, जिनमें से 1 करोड़ 30 लाख मतदाताओं की सुनवाई का काम पूरा हो चुका है। हालांकि, नो-मैपिंग प्रक्रिया के दौरान यह देखा गया कि लगभग 10 प्रतिशत मतदाता अपनी सुनवाई के लिए उपस्थित नहीं हुए। इसके अतिरिक्त, जिन मतदाताओं का नाम पहले से सूची में मैप था, उनमें से भी हजारों लोग अनुपस्थित रहे, जिसके बाद उनके नाम हटाने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। विदेशी क्षेत्रीय पंजीकरण कार्यालय से प्राप्त संदिग्ध सूचियों के आधार पर भी करीब 3 हजार नाम काटे गए हैं।
मुख्य निर्वाचन अधिकारी मनोज कुमार अग्रवाल ने स्पष्ट किया है कि अभी भी राज्य में 10 से 12 लाख मतदाताओं की सुनवाई शेष है। अब तक लगभग 1 करोड़ 6 लाख मतदाताओं के दस्तावेजों को सफलतापूर्वक जांच के बाद पोर्टल पर अपलोड किया जा चुका है। आयोग का तर्क है कि यह पूरी कवायद अस्तित्वहीन और फर्जी मतदाताओं की पहचान के लिए अनिवार्य है। दूसरी ओर, मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने इस पूरी प्रक्रिया और इसमें बाहरी राज्यों के माइक्रो ऑब्जर्वर की भूमिका को लेकर सुप्रीम कोर्ट में मोर्चा खोल रखा है। मुख्यमंत्री का आरोप है कि इस प्रक्रिया के जरिए जानबूझकर वैध मतदाताओं को परेशान किया जा रहा है। अदालती कार्यवाही और राजनीतिक बयानबाजी के बीच निर्वाचन आयोग ने अपना रुख साफ कर दिया है कि वह सभी तथ्यों को राष्ट्रीय स्तर पर अदालत के समक्ष रखेगा। बंगाल में एसआईआर को लेकर अविश्वास का माहौल इस कदर गहरा गया है कि अब हर किसी की नजर आगामी 9 फरवरी को सुप्रीम कोर्ट में होने वाली सुनवाई पर टिकी है।