विधाननगर अस्पताल का नाम बदला, मुख्यमंत्री ने पूर्ववर्ती सरकार की स्वास्थ्य सेवाओं पर उठाए सवाल
ममता-अभिषेक करेंगे सबसे ज्यादा रैली व जनसभा
कोलकाता। विधानसभा चुनाव के प्रथम चरण के मतदान से पूर्व सत्तारूढ़ तृणमूल ने अपने 40 स्टार प्रचारकों की बहुप्रतीक्षित सूची जारी कर दी है। इस सूची के जरिए पार्टी ने न केवल अपने पुराने दिग्गजों पर भरोसा जताया है, बल्कि नए चेहरों को आगे कर भविष्य की राजनीति का संकेत भी दिया है।
सूची में सबसे ऊपर मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी का नाम है, जो पहले से ही उत्तर बंगाल से लेकर जंगलमहल तक जनसभाओं के जरिए माहौल गरमाए हुए हैं। पार्टी की इस नई रणनीति में दो नाम सबसे अधिक चर्चा का केंद्र बने हुए हैं। पहला नाम बीरभूम के कद्दावर नेता अनुब्रत मंडल उर्फ केश्टो का है, जिनकी लंबे समय बाद मुख्यधारा की राजनीति में आधिकारिक वापसी हुई है। पशु तस्करी मामले में करीब दो साल जेल में बिताने और सितंबर 2024 में रिहाई के बाद यह पहला बड़ा अवसर है, जब उन्हें स्टार प्रचारक जैसी महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी गई है। बीरभूम के अजेय दुर्ग के शिल्पकार माने जाने वाले अनुब्रत की वापसी को पार्टी कार्यकर्ताओं के लिए एक बड़े मनोबल बढ़ाने वाले कदम के रूप में देखा जा रहा है।
राजनीतिक विश्लेषक इसे अनुब्रत के राजनीतिक पुनर्वास पर ममता बनर्जी की अंतिम मुहर मान रहे हैं। वहीं, सूची में दूसरा चौंकाने वाला नाम युवा नेता प्रतीक उर रहमान का है। वामपंथी छात्र राजनीति का चेहरा रहे प्रतीक ने महज दो महीने पहले ही अमतला में अभिषेक बनर्जी की मौजूदगी में तृणमूल का दामन थामा था। पार्टी में शामिल होते समय उन्होंने संगठन के लिए काम करने की इच्छा जताई थी, जिसे सम्मान देते हुए नेतृत्व ने उन्हें सीधे स्टार प्रचारकों की श्रेणी में खड़ा कर दिया है।
इसके अतिरिक्त, हाल ही में राज्यसभा पहुंचीं अभिनेत्री कोयल मलिक का नाम भी सूची में शामिल है, जो ग्लैम फैक्टर के साथ-साथ महिला मतदाताओं को साधने का काम करेंगी। तृणमूल कांग्रेस ने इस बार अनुभवी और युवा नेतृत्व के बीच एक बारीक संतुलन बनाने का प्रयास किया है। प्रथम चरण में राज्य की 152 सीटों पर होने वाले मतदान के लिए पार्टी ने उन चेहरों को प्राथमिकता दी है, जिनका स्थानीय स्तर पर गहरा प्रभाव है। विशेषकर बीरभूम और आसपास के जिलों में अनुब्रत मंडल की सक्रियता भाजपा के लिए कड़ी चुनौती पेश कर सकती है। भाजपा ने हालांकि इस सूची पर तीखा प्रहार करते हुए इसे भ्रष्ट नेताओं का जमावड़ा करार दिया है, लेकिन टीएमसी इसे सांगठनिक मजबूती और वफादारी का इनाम बता रही है। 23 और 29 अप्रैल को होने वाले मतदान से पहले इन स्टार प्रचारकों की सक्रियता बंगाल के सियासी तापमान को नए शिखर पर ले जाने के लिए तैयार है।