उन्होंने तृणमूल नेता कुनाल घोष पर भी निशाना साधते हुए कहा कि वे केवल सुर्खियों में बने रहने की राजनीति कर रहे हैं
कोलकाता। धर्मतल्ला में नीट प्रश्नपत्र लीक के विरोध में निकाले गए छात्र मार्च के दौरान हुई हिंसा और पत्रकारों पर हुए हमलों को लेकर बंगाल सरकार का कड़ा रुख लगातार जारी है। राज्य के मंत्री दिलीप घोष ने रविवार को स्पष्ट किया कि छात्र आंदोलन के नाम पर जिस तरह अराजकता फैलाई गई, उसके लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कानून के तहत कठोरतम कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी पहले ही साफ कर चुके हैं कि दोषियों के खिलाफ गुंडा नियंत्रण कानून (गुंडा एक्ट) के तहत सख्त कदम उठाए जाएंगे और किसी भी आरोपी को बख्शा नहीं जाएगा।
मीडिया से बातचीत करते हुए दिलीप घोष ने कहा कि धर्मल्ला में छात्र आंदोलन की आड़ में पुलिस, पत्रकारों और आम जनता पर हमला किया गया, जिसे किसी भी लोकतांत्रिक व्यवस्था में बर्दाश्त नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने विधानसभा में स्पष्ट कहा है कि जिन्होंने कानून हाथ में लिया है, उनके खिलाफ गुंडा नियंत्रण कानून के तहत कार्रवाई होगी। गिरफ्तारियां शुरू हो चुकी हैं और आगे भी जारी रहेंगी। पश्चिम बंगाल में अब ऐसी अराजकता कतई नहीं चलने दी जाएगी।
केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के सवाल पर उन्होंने कहा कि परिस्थितियों को देखते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उचित और आवश्यक निर्णय लिया। सरकार ने लोकतांत्रिक तरीके से छात्रों से संवाद स्थापित किया और समस्या के समाधान के लिए लगातार बैठकें कर उचित कदम उठाए। दिलीप घोष ने हिंसा में शामिल तत्वों की आलोचना करते हुए कहा कि यह वास्तविक छात्रों का आंदोलन नहीं बल्कि सोची-समझी साजिश और उपद्रव था। उन्होंने तृणमूल नेता कुनाल घोष पर भी निशाना साधते हुए कहा कि वे केवल सुर्खियों में बने रहने की राजनीति कर रहे हैं।
इसके साथ ही, उन्होंने नाम लिए बिना विपक्षी नेतृत्व पर तंज कसते हुए कहा कि इतने बड़े नेता हैं कि जिस पार्टी में जाते हैं, वही पार्टी डूब जाती है। अब छात्र आंदोलन का सहारा लेकर अपना राजनीतिक अस्तित्व बचाने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने दोहराया कि राज्य सरकार कानून-व्यवस्था से किसी तरह का समझौता नहीं करेगी और हिंसा फैलाने वालों पर निष्पक्षता से कानूनी शिकंजा कसा जाएगा।