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विस चुनाव 2026 :: नंदीग्राम का दंगल इस बार और दिलचस्प, अपने ही सहयोगी से शुभेंदु का मुकाबला

ग्रामीण मतदाता 96.65 फीसदी हैं, जबकि शहरी मतदाताओं की संख्या केवल 3.35 फीसदी है। वर्ष 2021 में यहां 88.51 फीसदी मतदान हुआ था, जो राज्य में सबसे अधिक मतदान वाले क्षेत्रों में गिना जाता है।

19 Mar 2026

विस चुनाव 2026 :: नंदीग्राम का दंगल इस बार और दिलचस्प, अपने ही सहयोगी से शुभेंदु का मुकाबला

कोलकाता, 19 मार्च (हि.स.)। पूर्वी मिदनापुर जिले की नंदीग्राम विधानसभा सीट पश्चिम बंगाल की राजनीति की सबसे चर्चित और संवेदनशील सीटों में मानी जाती है। इस बार भी सीट पर चुनावी दंगल बेहद खास होने वाला है। 2021 के विधानसभा चुनाव में यहां से मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को अपने ही पूर्व सहयोगी शुभेंदु अधिकारी के सामने हार का सामना करना पड़ा था। तब शुभेंदु उन्हें छोड़कर भाजपा में शामिल हुए थे। इस बार भाजपा ने इस सीट से शुभेंदु को ही उम्मीदवार बनाया है लेकिन ममता बनर्जी यहां चुनाव नहीं लड़ रही हैं। इसके बजाय भारतीय जनता पार्टी के ही नेता और शुभेंदु के सहयोगी रहे पवित्र कर को तृणमूल की ओर से उम्मीदवार बनाया गया है। रविवार को जिस दिन तृणमूल कैंडीडेट्स का ऐलान हुआ उसी दिन पवित्र पार्टी में शामिल हुए।

तामलुक लोकसभा क्षेत्र के अंतर्गत आने वाली इस सीट में नंदीग्राम-1 और नंदीग्राम-2 विकासखंड शामिल हैं। वर्ष 1951 से 1967 तक यह क्षेत्र नंदीग्राम उत्तर और नंदीग्राम दक्षिण नाम से दो अलग विधानसभा क्षेत्रों में विभाजित था, लेकिन 1967 में दोनों का विलय कर वर्तमान नंदीग्राम विधानसभा सीट का गठन किया गया।

नंदीग्राम का नाम आते ही वर्ष 2007 का भूमि आंदोलन सबसे पहले याद आता है। तत्कालीन वाममोर्चा सरकार द्वारा प्रस्तावित रासायनिक केंद्र के लिए भूमि अधिग्रहण के विरोध में हुए आंदोलन के दौरान 14 ग्रामीणों की मौत हो गई थी। इस घटना ने राज्य की राजनीति की दिशा बदल दी। यह आंदोलन तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी के राजनीतिक उत्थान का बड़ा कारण बना। आंदोलन के बाद उनकी लोकप्रियता तेजी से बढ़ी और अंततः वर्ष 2011 में 34 वर्ष पुरानी वाममोर्चा सरकार को सत्ता से बाहर होना पड़ा।

वर्ष 2021 के विधानसभा चुनाव में नंदीग्राम एक बार फिर पूरे देश की नजरों में आ गया, जब मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने अपनी पारंपरिक भवानीपुर सीट छोड़कर यहां से चुनाव लड़ने का निर्णय लिया। उनका मुकाबला उनके पूर्व सहयोगी शुभेंदु अधिकारी से हुआ, जो उस समय भारतीय जनता पार्टी में शामिल हो चुके थे। बेहद कड़े और नाटकीय मुकाबले में ममता बनर्जी को मात्र 1,956 मतों से हार का सामना करना पड़ा। इस जीत के साथ भारतीय जनता पार्टी ने पहली बार इस सीट पर अपना कब्जा जमाया।

वर्ष 2024 के लोकसभा चुनाव में भी नंदीग्राम क्षेत्र में भारतीय जनता पार्टी को बढ़त मिली। इस क्षेत्र में पार्टी ने तृणमूल कांग्रेस पर 8,200 मतों की बढ़त दर्ज की। इसके बाद से यह सीट भारतीय जनता पार्टी के लिए और भी अधिक महत्वपूर्ण मानी जा रही है। अब तक नंदीग्राम में 15 विधानसभा चुनाव हो चुके हैं, जिनमें वर्ष 2009 का उपचुनाव भी शामिल है। शुरुआती दशकों में भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी का यहां मजबूत प्रभाव रहा और उसने नौ बार जीत हासिल की। कांग्रेस और तृणमूल कांग्रेस ने यहां दो-दो बार जीत दर्ज की है, जबकि जनता पार्टी को एक बार सफलता मिली। भारतीय जनता पार्टी ने वर्ष 2021 में पहली बार इस सीट पर विजय प्राप्त की।

मतदाता संरचना और मतदान का रुझानवर्ष 2016 में यहां कुल मतदाताओं की संख्या दो लाख 31 हजार 866 थी। वर्ष 2019 में यह संख्या बढ़कर दो लाख 46 हजार 434 हो गई, जबकि वर्ष 2021 में कुल मतदाता दो लाख 57 हजार 992 दर्ज किए गए। मतदाता संरचना पर नजर डालें तो यहां मुस्लिम मतदाता लगभग 23.60 फीसदी हैं, जबकि अनुसूचित जाति के मतदाता लगभग 16.46 फीसदी हैं। ग्रामीण मतदाता 96.65 फीसदी हैं, जबकि शहरी मतदाताओं की संख्या केवल 3.35 फीसदी है। वर्ष 2021 में यहां 88.51 फीसदी मतदान हुआ था, जो राज्य में सबसे अधिक मतदान वाले क्षेत्रों में गिना जाता है।

कृषि आधारित अर्थव्यवस्था और सीमित औद्योगिक विकासनंदीग्राम हल्दी नदी के दक्षिणी किनारे पर स्थित है और इसके सामने औद्योगिक शहर हल्दिया स्थित है। यहां की भूमि काफी उपजाऊ है और धान, सब्जियां तथा मछली का उत्पादन प्रमुख रूप से होता है। यह क्षेत्र हल्दिया जैसे शहरी क्षेत्रों को ताजा सब्जियां और कृषि उत्पाद उपलब्ध कराता है। हालांकि यहां औद्योगिक विकास सीमित है, लेकिन कृषि और छोटे व्यापार ही स्थानीय अर्थव्यवस्था की मुख्य आधारशिला हैं।

सड़क संपर्क बेहतर, उच्च शिक्षा और स्वास्थ्य के लिए बाहर निर्भरता

नंदीग्राम से सड़क मार्ग द्वारा हल्दिया और तामलुक तक सीधा संपर्क है। सबसे नजदीकी रेलवे स्टेशन महिषादल है, जो यहां से लगभग 19 किलोमीटर दूर है।शिक्षा के लिए यहां सरकारी विद्यालय और कुछ महाविद्यालय मौजूद हैं, लेकिन उच्च शिक्षा और बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं के लिए लोगों को हल्दिया या तामलुक जाना पड़ता है। यह क्षेत्र कोलकाता से लगभग 70 किलोमीटर, तामलुक से 33 किलोमीटर, हल्दिया से 13 किलोमीटर, महिषादल से 19 किलोमीटर और एगरा से 48 किलोमीटर दूर स्थित है। साथ ही नदी के पार दक्षिण 24 परगना जिले से भी इसकी भौगोलिक निकटता है।

2026 में फिर गरमाया नंदीग्राम का चुनावी रणचुनाव आयोग ने बंगाल में दो चरणों में मतदान का ऐलान किया है। 23 अप्रैल को पहले चरण का मतदान होगा और उसी दिन नंदीग्राम में चुनाव होने हैं। जैसे-जैसे वर्ष 2026 के विधानसभा चुनाव नजदीक आ रहे हैं, नंदीग्राम का राजनीतिक तापमान भी बढ़ता जा रहा है। इस बार भारतीय जनता पार्टी ने एक बार फिर शुभेंदु अधिकारी को ही अपना उम्मीदवार बनाया है। वहीं तृणमूल कांग्रेस ने शुभेंदु अधिकारी के पूर्व सहयोगी पवित्र कर को मैदान में उतारा है। उल्लेखनीय है कि जिस दिन तृणमूल कांग्रेस ने अपने उम्मीदवारों की सूची जारी की, उसी दिन पवित्र कर भारतीय जनता पार्टी छोड़कर तृणमूल कांग्रेस में शामिल हो गए।

ममता के चुनाव नहीं लड़ने को मुद्दा बना रही भारतीय जनता पार्टीइस बार मुख्यमंत्री ममता बनर्जी नंदीग्राम से चुनाव नहीं लड़ रही हैं। भारतीय जनता पार्टी इसे बड़ा राजनीतिक मुद्दा बनाते हुए आरोप लगा रही है कि ममता बनर्जी पिछली हार के कारण नंदीग्राम से चुनाव लड़ने से बच रही हैं। हिन्दुस्थान समाचार से विशेष बातचीत में शुभेंदु अधिकारी ने कहा कि ममता बनर्जी को मैंने पिछली बार नंदीग्राम में हराया था और इस बार भी भवानीपुर में भी हराउंगा (वहां से भी शुभेंदु भाजपा का उम्मीदवार हैं।) उन्होंने कहा कि नंदीग्राम में जीत को लेकर पार्टी पूरी तरह से आश्वस्त है और तृणमूल को इस बार ऐतिहासिक हार का सामना करना पड़ेगा। पवित्र से इस बारे में प्रतिक्रिया के लिए संपर्क करने की कोशिश की गई लेकिन बात नहीं हो पाई। हालांकि तृणमूल कांग्रेस का कहना है कि पार्टी संगठन के आधार पर चुनाव लड़ रही है और हर सीट पर मजबूत मुकाबला करेगी।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि पिछली बार मुख्यमंत्री को हराने के कारण शुभेंदु अधिकारी का राजनीतिक कद इस सीट पर काफी बढ़ा है। वहीं सत्तारूढ़ दल भी इस सीट को प्रतिष्ठा का प्रश्न मानकर पूरी ताकत लगा सकता है। ऐसे में वर्ष 2026 का नंदीग्राम चुनाव एक बार फिर राज्य की राजनीति का सबसे चर्चित और दिलचस्प मुकाबला बनने जा रहा है, जहां परिणाम का असर राज्य की व्यापक राजनीतिक दिशा पर भी पड़ सकता है।

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