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भाजपा आईटी सेल प्रमुख और पश्चिम बंगाल के केंद्रीय पर्यवेक्षक अमित मालवीय ने झारखंड पुलिस द्वारा उपलब्ध कराई गई मृतक अलाउद्दीन शेख की पोस्टमार्टम रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि रिपोर्ट में मौत का कारण स्पष्ट रूप से आत्महत्या (फांसी) बताया गया है।
कोलकाता। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने शनिवार को आरोप लगाया कि पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद जिले के अल्पसंख्यक बहुल बेलडांगा इलाके में हुई हिंसा पूर्व-नियोजित थी और झारखंड में एक प्रवासी मजदूर की आत्महत्या को हत्या के रूप में पेश कर जानबूझकर अशांति भड़काई गई।
भाजपा आईटी सेल प्रमुख और पश्चिम बंगाल के केंद्रीय पर्यवेक्षक अमित मालवीय ने झारखंड पुलिस द्वारा उपलब्ध कराई गई मृतक अलाउद्दीन शेख की पोस्टमार्टम रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि रिपोर्ट में मौत का कारण स्पष्ट रूप से आत्महत्या (फांसी) बताया गया है।
मालवीय के अनुसार, बेलडांगा में दो दिनों तक चली हिंसा बिना तथ्यों की पुष्टि किए हत्या के झूठे दावों को आक्रामक रूप से फैलाने के कारण भड़की। उन्होंने कहा कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट में किसी भी प्रकार की चोट, खरोंच, फ्रैक्चर या मारपीट के संकेत नहीं पाए गए हैं और मौत का कारण एंटे-मॉर्टम हैंगिंग बताया गया है।
भाजपा नेता ने दावा किया कि इन निष्कर्षों की पुष्टि पलामू जिले की पुलिस अधीक्षक रेशमा रमेशन ने भी की है और झारखंड के स्थानीय मीडिया में इसकी रिपोर्टिंग हुई है। उन्होंने कहा कि मृतक के परिवार ने शव मिलने के बाद झारखंड पुलिस की जांच पर संतोष भी व्यक्त किया था।
मालवीय ने आरोप लगाया कि इसके बावजूद राज्य में एक जबरन थोपा गया नैरेटिव सड़कों पर हावी होने दिया गया, जिससे बेलडांगा को अशांति के हवाले कर दिया गया। उन्होंने यह भी कहा कि झारखंड में मृतक के साथ काम करने वाले किसी भी प्रवासी मजदूर ने हत्या की साजिश का आरोप नहीं लगाया।
उन्होंने बताया कि शव वापस लाने वाले कासिम शेख और मृतक के चचेरे भाई एरशाद शेख ने भी किसी प्रकार की साजिश या हत्या की बात नहीं कही। जांच प्रक्रिया के दौरान परिवार को लगातार जानकारी दी जाती रही, जिसमें वीडियो कॉल के माध्यम से संवाद भी शामिल था। पोस्टमार्टम और इनक्वेस्ट रिपोर्ट में किसी भी प्रकार के हमले की आशंका से इनकार किया गया है।
अमित मालवीय ने हिंसा के पीछे राजनीतिक साजिश का आरोप लगाते हुए कई सवाल खड़े किए। उन्होंने पूछा कि सत्यापन से पहले अफवाहें किसने फैलाईं, हाईवे और रेलवे लाइनों को जाम करने से किसे लाभ हुआ, फॉरेंसिक सच्चाई सामने आने से पहले भीड़ हिंसा को क्यों हावी होने दिया गया और पत्रकारों पर हमले क्यों हुए।
उन्होंने आरोप लगाया कि इन सभी सवालों के जवाब ‘साजिशपूर्ण वोट-बैंक राजनीति’ में निहित हैं।