Please wait
वैभव सूर्यवंशी का लिस्ट-ए क्रिकेट में सबसे तेज अर्धशतक, महज 29 गेंदों में 94 रन ठोक दिए Sudhir wins historic अंतरराष्ट्रीय योग दिवस पर रेड रोड में भव्य आयोजन, पीएम मोदी बोले - योग मानव चेतना से जुड़ने का जरिया Sudhir wins historic झारखंड राज्यसभा चुनाव: झामुमो के बैद्यनाथ राम और निर्दलीय परिमल नथवानी विजयी Sudhir wins historic फलता हिंसा पर मुख्यमंत्री का सख्त संदेश, बोले- कोई कानून हाथ में न ले, हमलावरों की संपत्ति भी होगी जब्त Sudhir wins historic वरिष्ठ तृणमूल नेता और पूर्व मंत्री उदयन गुहा गिरफ्तार Sudhir wins historic फुटपाथ पर मुड़ी-घुघनी खाते दिखे मंत्री शंकर घोष Sudhir wins historic पारसी फायर टेम्पल से हटेगा अवैध कब्जा Sudhir wins historic ममता बनर्जी को एक और झटका, पूर्व मंत्री मानस भुइयां ने तृणमूल कांग्रेस छोड़ी Sudhir wins historic असम में 18 वर्ष से अधिक उम्र के लोगों के लिए सीधे आधार नहीं : डॉ. हिमंत बिस्व सरमा Sudhir wins historic असम के जोरहाट में वायु सेना का विमान दुर्घटनाग्रस्त, पांच जवान बलिदान Sudhir wins historic

बिहार जीत से बंगाल भाजपा का उत्साह बढ़ा लेकिन राजनीतिक समीकरणों का सीधा आकलन सरल नहीं

बिहार जीत से बंगाल भाजपा का उत्साह बढ़ा लेकिन राजनीतिक समीकरणों का सीधा आकलन सरल नहीं
 

15 Nov 2025

बिहार जीत से बंगाल भाजपा का उत्साह बढ़ा लेकिन राजनीतिक समीकरणों का सीधा आकलन सरल नहीं

 बिहार में महागठबंधन पर एनडीए की प्रचंड जीत, क्या भाजपा को पश्चिम बंगाल में भी उतनी ही ऊर्जा दे पाएगी कि वह तृणमूल कांग्रेस को कड़ी चुनौती दे सके? इस पर विशेषज्ञों में मतभेद है। राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि अगले वर्ष होने वाले पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव से पहले बंगाल की राजनीति तीन अहम मुद्दों एसआईआर, कल्याणकारी योजनाओं और महिला मतदाताओं के इर्द-गिर्द घूमेगी। इन्हीं मुद्दों की दिशा यह तय करेगी कि बिहार की सफलता बंगाल में कितनी असरदार साबित होगी।

भाजपा नेता गिरिराज सिंह द्वारा “अब बारी बंगाल की” उद्घोषणा करने और शुभेंदु अधिकारी समेत बंगाल भाजपा नेताओं के इस सुर को आगे बढ़ाने के बाद राजनीतिक तापमान बढ़ चुका है। विशेषज्ञों का कहना है कि तृणमूल के पारंपरिक “बंगाल के समीकरण अलग हैं” वाले तर्क से अब अधिक ठोस रणनीति की जरूरत होगी।

राजनीतिक विश्लेषक शुभमय मैत्रा ने कहा कि बिहार में महिलाओं की बड़ी संख्या में भागीदारी और सरकार की ओर से उनके बैंक खातों में 10 हजार रुपये की सहायता राशि ने चुनावी नतीजों को निर्णायक रूप से प्रभावित किया। उन्होंने बताया कि उत्तर बिहार के कोसी और दरभंगा जैसे जिलों में, जहां महिला मतदाताओं की संख्या पुरुषों से 12.5 प्रतिशत और 11.9 प्रतिशत अधिक रही, वहां एनडीए को क्रमशः 77 और 73 प्रतिशत सीटों पर जीत मिली। जबकि दक्षिण बिहार के पटना और मगध क्षेत्रों में, जहां पुरुषों की भागीदारी थोड़ी अधिक रही, एनडीए की बढ़त क्रमशः केवल 30 और 23 प्रतिशत सीटों तक सीमित रही।

मैत्रा ने अनुमान जताया कि ममता बनर्जी भी महिलाओं को लुभाने के लिए नई आर्थिक योजनाओं की घोषणा कर सकती हैं, क्योंकि यह वर्ग बंगाल में उनकी पारंपरिक ताकत रहा है। उन्होंने कहा कि बिहार नतीजों के बाद महिलाओं को केंद्र में रखकर कल्याणकारी राजनीति अन्य चुनावी राज्यों में भी और तेज हो सकती है।

चुनाव विश्लेषक विश्वनाथ चक्रवर्ती का मानना है कि बिहार में एनडीए की “क्लीन स्वीप” से भाजपा को बंगाल में तृणमूल के खिलाफ आक्रामक अभियान का पूरा अवसर मिल जाएगा। उनका कहना है कि केंद्र में भाजपा-नीत गठबंधन की स्थिरता बढ़ने से पार्टी को ममता बनर्जी पर निर्भरता कम होगी और वह पूरे जोर-शोर से चुनावी हमला कर सकेगी।

बंगाल भाजपा नेतृत्व ने बिहार के नतीजों को एसआईआर (विशेष गहन पुनरीक्षण) से जोड़ते हुए दावा किया है कि बंगाल में भी मतदाता सूची की शुद्धि से बड़ा फर्क पड़ेगा। शुभेंदु अधिकारी ने कहा, “जैसे नंदीग्राम ने 2021 में मिसाल पेश की, वैसे ही 2026 में पूरा बंगाल करेगा।” उन्होंने वर्ष 2021 में ममता बनर्जी को नंदीग्राम में हराया था।

चक्रवर्ती इस सरल समीकरण से असहमत हैं। उन्होंने कहा कि वर्ष 2002 में हुए अंतिम एसआईआर के बाद पूर्ववर्ती वाम मोर्चा सरकार ने 2006 में भारी बहुमत से सत्ता में पुनर्वापसी की थी। अगर तब वाम मोर्चा लौट सकता था, तो यह मानने का कोई कारण नहीं कि तृणमूल नहीं लौट सकती।

मैत्रा ने पूर्व न्यायाधीश और भाजपा सांसद अभिजीत गांगुली के हालिया आरोपों का उल्लेख किया, जिनमें उन्होंने दावा किया था कि तृणमूल नेताओं के खिलाफ भ्रष्टाचार के मामलों में जांच एजेंसियां “कड़ाई से कार्रवाई नहीं कर रहीं” और भाजपा के भीतर “बाहरी नेताओं की अधिकता” पार्टी को नुकसान पहुंचा रही है। मैत्रा ने कहा कि भाजपा को पहले यह स्पष्ट करना चाहिए कि वह बंगाल चुनाव को लेकर कितनी गंभीर है, क्योंकि अभी तक एसआईआर के प्रभाव का कोई ठोस डेटा सामने नहीं है।

इस बीच, गिरिराज सिंह ने ममता बनर्जी पर तीखा हमला बोलते हुए आरोप लगाया कि “रोहिंग्या और बांग्लादेशियों के सहारे” उनकी सत्ता कायम है और अब “उसका अंत निकट है।” तृणमूल ने तत्काल प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि भाजपा “जहर का पेड़” है और उसके नेताओं की बातें उसी तरह “जहरीली” हैं। राज्य मंत्री शशि पांजा ने कहा कि बंगाल की सामाजिक एकता को सहन न कर पाने के कारण भाजपा नेता यहां के लोगों को अपमानित कर रहे हैं।

केंद्रीय मंत्री सुकांत मजूमदार ने सोशल मीडिया पर लिखा कि ओडिशा और बिहार के बाद “अब बारी बंगाल की है।”तृणमूल ने संक्षिप्त प्रतिक्रिया दी, “सपने देखते रहो।”

Ad Image
Comments

No comments to show. Log in to add some!

Other Relevant Stories


बिहार जीत से बंगाल भाजपा का उत्साह बढ़ा लेकिन राजनीतिक समीकर
बिहार जीत से बंगाल भाजपा का उत्साह बढ़ा लेकिन राजनीतिक समीकरणों का सीधा आकलन सरल नहीं





Download The Taaza Tv App Now to Stay Updated on the Latest News!


play store download
app store download
app img


Breaking News