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चुनावी समर के बीच 'केंद्रीय प्रहार' से गरमायी बंगाल की सियासत

तृणमूल के दो कद्दावर मंत्रियों को ईडी को नोटिस

03 Apr 2026

चुनावी समर के बीच 'केंद्रीय प्रहार' से गरमायी बंगाल की सियासत

कोलकाता। विधानसभा चुनाव की दहलीज पर खड़ा है, लेकिन इस चुनावी शोर के बीच केंद्रीय जांच एजेंसियों की ताबड़तोड़ सक्रियता ने राजनीतिक गलियारों में खलबली मचा दी है। ईडी ने भ्रष्टाचार के विरुद्ध जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाते हुए ममता सरकार के दो कभावर मंत्रियों और उम्मीदवारों सुजीत बोस व रथीन घोष को शिकंजे में लिया है। नगर पालिका नियुक्ति घोटाले की जांच की आंच अब इन दिग्गज नेताओं के दरवाजे तक पहुंच गई है, जिससे राज्य का सियासी पारा सातवें आसमान पर पहुंच गया है। जांच एजेंसी ने सुजीत बोस को आगामी 6 अप्रैल और रथीन घोष को 8 अप्रैल को साल्टलेक स्थित सीजीओ कॉम्प्लेक्स में तलब किया है। गौर करने वाली बात यह है कि ये दोनों ही नेता इस समय चुनाव प्रचार की कमान संभाले हुए हैं। इससे पहले इसी सप्ताह जमीन घोटाले के सिलसिले में देबाशीष कुमार से भी लंबी पूछताछ हो चुकी है। 
अब सबकी नजरें इस पर टिकी हैं कि मतदान से ऐन पहले ये नेता जांच अधिकारी के समक्ष पेश होते हैं या फिर प्रचार का हवाला देकर अतिरिक्त समय की मांग करते हैं। इन कार्रवाइयों ने बंगाल में एक नया वैचारिक युद्ध छेड़ दिया है। तृणमूल ने इसे प्रतिशोध की राजनीति करार देते हुए केंद्र सरकार पर हमला बोला है। 
सत्ताधारी दल का आरोप है कि भाजपा राजनीतिक मैदान में मुकाबला करने के बजाय जांच एजेंसियों का ढाल के रूप में इस्तेमाल कर रही है। तृणमूल नेताओं का तर्क है कि चुनाव के ठीक पहले समन भेजना केवल उनके उम्मीदवारों को मानसिक और सामाजिक रूप से प्रताडि़त करने की एक सोची-समझी रणनीति है। दूसरी ओर, ईडी और अन्य केंद्रीय एजेंसियां अपने तथ्यों पर अडिग हैं। हालिया छापेमारी के दौरान राज्य के विभिन्न ठिकानों से बरामद हुई भारी नकदी और संदिग्ध दस्तावेजों ने जांच की दिशा को और पुख्ता किया है। 
जांच एजेंसियों का स्पष्ट मानना है कि भ्रष्टाचार के इन मामलों के तार बेहद गहरे जुड़े हैं और निष्पक्ष चुनाव से पहले इन कडिय़ों को जोडऩा अनिवार्य है। जैसे-जैसे मतदान की तारीख करीब आ रही है, भ्रष्टाचार बनाम बदले की राजनीति का यह मुद्दा बंगाल के चुनावी विमर्श का केंद्र बिंदु बनता जा रहा है। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि जनता इस एजेंसी बनाम राजनीति की जंग को किस रूप में स्वीकार करती है। 

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