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भावुक होकर बोलीं 'जनता से बहुत प्यार मिला, कोई शिकायत नहीं'
कोलकाता। बंगाल की सियासत में जारी अभूतपूर्व उथल-पुथल के बीच विधाननगर नगर निगम से एक बड़ी खबर सामने आ रही है। तृणमूल की कद्दावर नेता और विधाननगर नगर निगम की मेयर कृष्णा चक्रवर्ती ने गुरुवार को अचानक अपने पद से इस्तीफा दे दिया। उन्होंने नगर निगम आयुक्त को अपना आधिकारिक त्यागपत्र सौंप दिया है। हालांकि, उन्होंने इस बड़े फैसले के पीछे पूरी तरह से व्यक्तिगत कारणों का हवाला दिया है, लेकिन राज्य के मौजूदा राजनीतिक हालात को देखते हुए इस इस्तीफे ने सियासी गलियारों में नई अटकलों को जन्म दे दिया है।
अपने इस्तीफे की घोषणा के बाद मीडिया से मुखातिब होते समय कृष्णा चक्रवर्ती बेहद भावुक नजर आईं। अपनी 16 वर्षों की लंबी प्रशासनिक यात्रा को याद करते हुए उनकी आंखें भर आईं। उन्होंने रुंधे गले से कहा कि मैं हमेशा जनता के प्रति जवाबदेह रही हूं और मैंने पूरी निष्ठा से लोगों के लिए काम किया है। इस सफर में मुझे विधाननगर के नागरिकों से अगाध प्रेम और सम्मान मिला है। यदि काम के दौरान मुझसे अनजाने में कोई भूल हुई हो तो... इतना कहते-कहते वे खुद को संभाल नहीं पाईं और बेहद भावुक हो उठीं। उन्होंने साफ किया कि उन्हें संगठन या किसी व्यक्ति से कोई गिला-शिकवा नहीं है, बल्कि वे सिर्फ और सिर्फ सभी से मिले सहयोग के लिए आभार जताना चाहती हैं।
ममता बनर्जी की बेहद करीबी और भरोसेमंद सहयोगियों में शुमार कृष्णा चक्रवर्ती का विधाननगर नगर निगम में एक लंबा और बेदाग रिकॉर्ड रहा है। वे पिछले 16 सालों से इस निगम के नीति-निर्धारण में अहम भूमिका निभाती आ रही हैं, जहां उन्होंने पहले बोरो चेयरपर्सन और बाद में मेयर पद की कमान संभाली। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि जहां हाल के दिनों में तृणमूल के कई नेताओं को भारी जन-असंतोष और विवादों का सामना करना पड़ा है, वहीं कृष्णा चक्रवर्ती की छवि हमेशा एक सहज, शालीन और जनता की समस्याओं को गंभीरता से सुनने वाली जनप्रतिनिधि की रही है। मेयर पद छोडऩे के बावजूद उन्होंने स्पष्ट किया है कि वे राजनीति से दूर नहीं हो रही हैं और एक पार्षद के रूप में क्षेत्र की जनता की सेवा करती रहेंगी। उन्होंने कहा कि इस समय उन्हें खुद के लिए थोड़े वक्त की जरूरत थी, इसलिए उन्होंने यह निर्णय लिया। बहरहाल, राज्य की प्रशासनिक और सांगठनिक संरचना में आ रहे इन तेज बदलावों के बीच विधाननगर के मेयर का पद खाली होना बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि विधाननगर नगर निगम की कमान किसे सौंपी जाएगी और यहां का नया राजनीतिक समीकरण क्या मोड़ लेगा।