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साइबर अपराधियों ने मैनेजमेंट कोटा बताकर मांगे लाखों रुपये
कोलकाता, 31 जनवरी। महानगर के प्रतिष्ठित शैक्षणिक संस्थानों में शुमार मॉडर्न हाई स्कूल फॉर गर्ल्स में मैनेजमेंट कोटा में प्रवेश दिलाने के नाम पर धोखाधड़ी का सनसनीखेज मामला सामने आया है। उन अभिभावकों को निशाना बनाया है, जिनके बच्चों का दाखिला इस साल नहीं हो सका था।
मैनेजमेंट कोटे का झांसा और लाखों की डिमांड
मिली जानकारी के अनुसार, हाल ही में उन अभिभावकों को व्यक्तिगत मेल प्राप्त हुए जिनके बच्चों का नाम स्कूल की आधिकारिक चयन सूची में नहीं आ पाया था। इन मेल्स में दावा किया गया कि मैनेजमेंट कमेटी के विशेष कोटे के तहत छात्रों का दाखिला कराया जा सकता है। इसके लिए एक मुश्त 3.75 लाख रुपये की मांग की गई, जिसमें 2.50 लाख रुपये डोनेशन और 1.25 लाख रुपये एडमिशन फीस के तौर पर बताए गए। जालसाजों ने बकायदा एक बैंक अकाउंट नंबर और भुगतान का पूरा विवरण भी मेल में संलग्न किया था, ताकि यह पूरी तरह से औपचारिक और विश्वसनीय लगे। इसके लिये स्कूल के नाम पर फर्जी ई-मेल भी तैयार किया गया है ताकि छात्रों के अभिभावकों को कहीं कोई संदेह न हो।
वडोदरा से जुड़े तार और डेटा लीक का गहराता संदेह
इस फर्जीवाड़े की खबर जैसे ही स्कूल प्रशासन तक पहुंची, प्रबंधन ने तुरंत सोशल मीडिया और आधिकारिक वेबसाइट पर सर्कुलर जारी कर इन मेल्स को पूरी तरह से फर्जी (फेक) करार दिया। हालांकि, स्कूल की इस सफाई ने अभिभावकों की चिंता कम करने के बजाय और बढ़ा दी है। सबसे बड़ा सवाल डेटा लीक को लेकर उठ रहा है। अभिभावकों का कहना है कि उन्होंने बच्चों का डेटा केवल स्कूल के एडमिशन फॉर्म में भरा था, फिर यह गोपनीय जानकारी बाहरी हाथों में कैसे पहुंची? साथ ही सवाल यह भी खड़ा हो रहा है कि एडमिशन फार्म का सीरियल नंबर भी उन्हें कैसे पता चल गया? क्या स्कूल का सर्वर हैक हुआ है या फिर किसी अंदरूनी कर्मचारी की इसमें मिलीभगत है? प्राथमिक जांच में यह भी पता चला है कि मेल में दिया गया बैंक खाता गुजरात के वडोदरा का है, जिससे इस गिरोह के अंतरराज्यीय होने की आशंका प्रबल हो गई है।
साइबर थाने पहुंची शिकायत, जांच में जुटी पुलिस
मामले की गंभीरता को देखते हुए प्रकरण अब लालबाजार के साइबर सेल और स्थानीय पुलिस तक पहुंच गया है। पुलिस उन आईपी एड्रेस और बैंक खातों की कडिय़ों को जोडऩे में जुटी है, जिनके माध्यम से यह पूरा खेल रचा गया। फिलहाल स्कूल प्रबंधन की ओर से इस विषय पर कोई आधिकारिक विस्तृत बयान नहीं आया है और उनसे संपर्क करने पर उन्होंने कुछ भी कहने से इनकार कर दिया। विशेषज्ञ इसे टारगेटेड फिशिंग मान रहे हैं, जहां अपराधियों को पता होता है कि कौन से अभिभावक अपने बच्चों के दाखिले के लिए मानसिक रूप से परेशान हैं। इस घटना ने महानगर के अन्य निजी स्कूलों को भी सचेत कर दिया है कि वे अपने डिजिटल डेटा बेस की सुरक्षा को और पुख्ता करें।
धोखाधड़ी के इस नए पैंतरे ने न केवल अभिभावकों को वित्तीय असुरक्षा में डाल दिया है, बल्कि स्कूलों में सुरक्षित माने जाने वाले छात्रों के डेटा की गोपनीयता पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। साइबर क्राइम का यह बढ़ता ग्राफ अब महानगर के नामी स्कूलों की दहलीज तक जा पहुंचा है।