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मालदा की चार सीटों पर 'आईपीएस' की नियुक्ति से मचा सियासी घमासान
कोलकाता। विधानसभा चुनाव की सरगर्मियों के बीच मालदा जिला एक नए और गंभीर राजनीतिक विवाद का केंद्र बन गया है। भारत निर्वाचन आयोग द्वारा नियुक्त किए गए 84 पुलिस ऑब्जर्वर्स की सूची में आईपीएस अधिकारी जयंत कांत का नाम आते ही सत्ताधारी तृणमूल ने मोर्चा खोल दिया है। पार्टी ने सीधे तौर पर आरोप लगाया है कि मालदा की चार संवेदनशील सीटों मोथाबाड़ी, वैष्णवनगर, मानिकचक और सुजापुर की जिम्मेदारी एक ऐसे अधिकारी को सौंपी गई है, जिनका परिवार सीधे तौर पर भारतीय जनता पार्टी से जुड़ा हुआ है। इस खुलासे के बाद बंगाल से लेकर दिल्ली तक चुनाव की निष्पक्षता पर सवाल उठने लगे हैं। तृणमूल कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं ब्रात्य बसु और पार्थ भौमिक ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान कुछ तस्वीरें सार्वजनिक करते हुए सनसनीखेज दावा किया। उनके मुताबिक, आईपीएस जयंत कांत की पत्नी बिहार में भाजपा की सक्रिय नेता हैं। पार्टी ने ऐसी तस्वीरें पेश कीं जिनमें संबंधित महिला को बिहार के उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के साथ भाजपा के मंच पर देखा जा सकता है।
तृणमूल का सीधा सवाल है कि जिस अधिकारी का जीवनसाथी एक प्रतिद्वंद्वी राजनीतिक दल का चेहरा हो, वह अधिकारी चुनाव के दौरान पारदर्शी और निष्पक्ष निर्णय कैसे ले सकता है? पार्टी ने इसे लोकतंत्र की मर्यादा के खिलाफ बताते हुए चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली को कठघरे में खड़ा किया है। इस विवाद का एक रणनीतिक पहलू भी सामने आया है। ब्रात्य बसु ने रेखांकित किया कि जिन चार विधानसभा क्षेत्रों की कमान जयंत कांत को दी गई है, वे सभी भौगोलिक रूप से बिहार की सीमा से सटे हुए इलाके हैं।
तृणमूल का आरोप है कि यह कोई इत्तेफाक नहीं, बल्कि एक सुनियोजित साजिश है ताकि सीमावर्ती इलाकों में चुनावी प्रक्रिया को प्रभावित किया जा सके। पार्टी नेतृत्व ने केंद्र सरकार और चुनाव आयोग पर मिलीभगत का आरोप लगाते हुए कहा कि बंगाल की अस्मिता और जनादेश के साथ खिलवाड़ करने की कोशिश की जा रही है। हालांकि, इन तस्वीरों और दावों की अब तक किसी स्वतंत्र एजेंसी द्वारा पुष्टि नहीं की गई है। यह विवाद ऐसे समय में आया है जब मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और अभिषेक बनर्जी पहले ही 73 रिटर्निंग अधिकारियों के तबादले को लेकर आयोग पर हमलावर हैं। तृणमूल नेताओं ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के फैसलों पर तीखी टिप्पणी करते हुए कहा कि इतिहास इन पक्षपाती निर्णयों का हिसाब जरूर लेगा।
पार्टी का मानना है कि केंद्रीय एजेंसियों और अब ऑब्जर्वर्स के जरिए भाजपा बंगाल में बैकडोर एंट्री की कोशिश कर रही है। फिलहाल, मालदा की इन चार सीटों पर तनाव और असमंजस की स्थिति बनी हुई है। तृणमूल कांग्रेस ने इस मामले में आयोग से तत्काल हस्तक्षेप और संबंधित अधिकारी को हटाने की मांग की है। अब सबकी नजरें भारत निर्वाचन आयोग की प्रतिक्रिया पर टिकी हैं क्या आयोग अपनी साख बचाने के लिए इस नियुक्ति पर पुनर्विचार करेगा या फिर यह चुनावी जंग अब कानूनी और संवैधानिक टकराव की ओर बढ़ेगी?