प्रधानमंत्री मोदी को सेशेल्स का ‘गार्जियन ऑफ द ब्लू होराइजन’ सम्मान
ऐसे में स्थानीय प्रशासन अब दोनों पक्षों के बीच संतुलन साधकर चलने की कोशिश कर रहा है
कोलकाता। बंगाल में सत्ता परिवर्तन के बाद अब नगरपालिका स्तर पर भी राजनीतिक समीकरण तेजी से बदलते दिखाई दे रहे हैं। राज्य में भाजपा सरकार बनने के बाद कई नगरपालिकाओं में ऐसी स्थिति बन रही है, जहां तृणमूल कांग्रेस के चेयरमैन और पार्षद पद पर तो बने हुए हैं, लेकिन नगर सेवाओं और प्रशासनिक फैसलों पर प्रभाव भाजपा विधायकों का बढ़ता जा रहा है। खास बात यह है कि भाजपा फिलहाल तृणमूल के पार्षदों या नगरपालिका प्रमुखों को औपचारिक रूप से पार्टी में शामिल कराए बिना ही स्थानीय प्रशासनिक नियंत्रण अपने हाथ में लेने की रणनीति पर आगे बढ़ती दिख रही है।
दूसरी ओर, तृणमूल कांग्रेस के पार्षद और नगरपालिका प्रमुख भी बदलते राजनीतिक माहौल को देखते हुए अपने-अपने क्षेत्रों में व्यावहारिक रवैया अपनाने लगे हैं। कई जगहों पर भाजपा के नवनिर्वाचित विधायक सीधे पार्षदों और नगरपालिका प्रमुखों से संपर्क कर रहे हैं, बैठकें कर रहे हैं और नागरिक सेवाओं को लेकर निर्देश भी दे रहे हैं। दिलचस्प बात यह है कि अधिकांश मामलों में उन निर्देशों के अनुसार काम भी हो रहा है।
बरानगर में भाजपा विधायक सजल घोष ने कुछ दिन पहले अपने इलाके के दो वार्डों में कूड़े के ढेर लगे देखे। इसके बाद उन्होंने संबंधित वार्डों के तृणमूल पार्षदों को तुरंत सफाई कराने के निर्देश दिए। बताया जा रहा है कि उसी दिन शाम तक दोनों वार्डों में सफाई का काम पूरा भी करा दिया गया। इसी तरह दक्षिण दमदम नगरपालिका में भी भाजपा विधायकों की सक्रियता बढ़ी है। दक्षिण दमदम नगरपालिका का क्षेत्र दमदम, बिधाननगर और राजारहाट गोपालपुर विधानसभा क्षेत्रों में फैला हुआ है। यहां भाजपा विधायक अरिजीत बक्सी, शरद वत मुखोपाध्याय और तरुणज्योति तिवारी ने नगरपालिका की चेयरपर्सन कस्तूरी चौधरी के साथ बैठक की।
सूत्रों के अनुसार चुनाव परिणाम आने के बाद कस्तूरी चौधरी ने नगरपालिका कार्यालय जाना लगभग बंद कर दिया था। भाजपा सूत्रों का दावा है कि विधायक तरुणज्योति तिवारी खुद उन्हें नगरपालिका लेकर गए, जहां तीनों विधायकों ने उनके साथ बैठक कर नागरिक सेवाओं को सुचारु बनाए रखने पर चर्चा की। फिलहाल नगरपालिका प्रशासन भाजपा विधायकों के साथ समन्वय बनाकर काम कर रहा है। बोंगांव में भी इसी तरह की तस्वीर देखने को मिल रही है। वहां नगरपालिका के एकमात्र भाजपा पार्षद देबदास मंडल इस बार हाबड़ा से विधायक चुने गए हैं। कुछ दिन पहले वह बोंगांव नगरपालिका पहुंचे और नगरपालिका प्रमुख से मुलाकात की। उन्होंने शहर की नागरिक सेवाओं को सुचारु रखने पर चर्चा की और भरोसा दिलाया कि किसी भी प्रशासनिक समस्या की स्थिति में वह सरकार और प्रशासन के साथ समन्वय बनाकर मदद करेंगे।
राज्य में बदलते इस राजनीतिक माहौल ने प्रशासनिक तंत्र को भी असमंजस की स्थिति में डाल दिया है। कई नगरपालिकाओं में तृणमूल का बोर्ड अभी कायम है, लेकिन सत्ता परिवर्तन के बाद भाजपा विधायकों का प्रभाव तेजी से बढ़ रहा है। ऐसे में स्थानीय प्रशासन अब दोनों पक्षों के बीच संतुलन साधकर चलने की कोशिश कर रहा है।