पश्चिम बंगाल सरकार ने यूसीसी मसौदे के अध्ययन के लिए नौ सदस्यीय समिति की अधिसूचित
बस, इतना कहे जाने के बाद ही राजनीतिक हलकों में चर्चाओं का दौर शुरू हो गया
कोलकाता। मेसी कांड की टीस अभी भी कम नहीं हुई है। अंतरराष्ट्रीय मंच पर किरकिरी झेलने के बाद अब एक साल के भीतर फिर से कोलकाता में टी-20 विश्वकप के मुकाबले होने हैं। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल है कि ईडन गार्डन्स की सुरक्षा को लेकर कोलकाता पुलिस कितनी तैयार है? इसी सवाल पर बुधवार को कोलकाता के पुलिस आयुक्त मनोज वर्मा ने भरोसा दिलाया कि तैयारियां शुरू हो चुकी हैं और सभी संबंधित एजेंसियों के साथ लगातार समन्वय रखा जाएगा। ईडन की सुरक्षा का यही मुद्दा उस वक्त सियासी रंग ले लेता है, जब शुभेंदु अधिकारी और शमिक भट्टाचार्य एक साथ पत्रकारों के सामने आते हैं। शमिक के प्रदेश अध्यक्ष बनने के बाद, शुभेंदु के साथ इस तरह की संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस काफी दिनों बाद देखने को मिली। दोनों ही नेताओं ने युवभारती कांड को लेकर राज्य सरकार, खेल मंत्री अरूप विश्वास और पुलिस प्रशासन पर तीखा हमला जारी रखा। इसी दौरान, ईडन में विश्वकप को लेकर कोलकाता पुलिस की बैठक का जिक्र होते ही शमिक भट्टाचार्य ने शुभेंदु अधिकारी की मौजूदगी में एक इशारों-इशारों में बड़ा बयान दे दिया। शमिक ने कहा कि जून महीने में यह बैठक फिर होगी। आप लोग वहां विरोधी दल के नेता को मौजूद देखेंगे। बस, इतना कहे जाने के बाद ही राजनीतिक हलकों में चर्चाओं का दौर शुरू हो गया।
राजनीतिक विश्लेषकों का एक बड़ा वर्ग मान रहा है कि जिस जून की बात शमिक कर रहे हैं, तब तक तो राज्य में नई सरकार बनने की संभावना है। तो क्या शमिक पहले से ही जीत को लेकर आश्वस्त हैं? और क्या इसका मतलब यह है कि बीजेपी की ओर से मुख्यमंत्री पद का चेहरा शुभेंदु अधिकारी होंगे? सवालों की बौछार शुरू होते ही शमिक भट्टाचार्य ने स्थिति संभालने की कोशिश की। उन्होंने कहा कि बीजेपी चेहरे की राजनीति नहीं करती। जो मंत्रिमंडल बनेगा, उसमें विरोधी दल के नेता शुभेंदु अधिकारी निश्चित रूप से रहेंगे। यानी जीत को लेकर भरोसा साफ झलकता है, लेकिन मुख्यमंत्री चेहरे के सवाल पर वे सीधा जवाब देने से बचते नजर आए। इस पर मुस्कराते हुए शमिक कहा कि वह पुलिस से लड़ते हैं, इसलिए पुलिस अधिकारियों को अच्छे से जानते हैं और पुलिस भी उन्हें पहचानती है। इसी वजह से मैंने वह बात कही। बैठक में उनका होना तो समय की लिखावट है। शुभेंदु अधिकारी ने भी हल्के अंदाज में बात को संभालते हुए कहा कि वह बात असल में प्रतीकात्मक थी। अगर राष्ट्रीय परिदृश्य पर नजर डालें तो एनडीए में कई बार बीजेपी बिना मुख्यमंत्री चेहरे के ही चुनाव लड़ती रही है, हालांकि अपवाद भी रहे हैं। 2021 के विधानसभा चुनाव में भी, दिलीप घोष के प्रदेश अध्यक्ष रहते हुए बंगाल बीजेपी ने बिना किसी घोषित मुख्यमंत्री चेहरे के ही चुनाव लड़ा था। तब पार्टी का दावा साफ था कि एक ही चेहरा है, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी। इस बार भी माना जा रहा है कि बंगाल में बीजेपी का मुख्य चुनावी हथियार नरेंद्र मोदी ही रहेंगे। लेकिन इसके बावजूद शमिक भट्टाचार्य की हल्की-सी टिप्पणी ने शुभेंदु अधिकारी को लेकर नई अटकलों को जन्म दे दिया है। फिलहाल बीजेपी नेतृत्व औपचारिक तौर पर मुख्यमंत्री चेहरे को लेकर चुप्पी साधे हुए है, लेकिन शमिक के बयान ने यह साफ कर दिया है कि शुभेंदु अधिकारी को लेकर पार्टी के भीतर और बाहर, दोनों जगह चर्चाएं तेज हो चुकी हैं। यह महज संयोग था या एक सोची-समझी राजनीतिक चाल इसका जवाब तो आने वाला चुनावी वक्त ही देगा।