विधाननगर अस्पताल का नाम बदला, मुख्यमंत्री ने पूर्ववर्ती सरकार की स्वास्थ्य सेवाओं पर उठाए सवाल
अंत में उन्होंने कहा कि पश्चिम बंगाल की जनता बदलाव चाहती है और आने वाले समय में इसका प्रभाव दिखाई देगा
कोलकाता। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के पश्चिम बंगाल मुख्यालय में आयोजित एक पत्रकार वार्ता में पार्टी के राज्य मुख्य प्रवक्ता अधिवक्ता देबजीत सरकार ने राज्य की कृषि स्थिति, विशेषकर आलू किसानों की समस्याओं तथा मतदाता सूची से जुड़े मुद्दों को लेकर राज्य सरकार की कड़ी आलोचना की।
उन्होंने दावा किया कि पिछले कुछ सप्ताह में पश्चिम मेदिनीपुर जिले में कई आलू किसानों ने आत्महत्या की है। उनका यह भी कहना था कि पिछले लगभग 15 वर्षों में कुल 136 आलू किसानों ने आत्महत्या की है। उनके अनुसार उत्पादन लागत की तुलना में बाजार में उचित मूल्य नहीं मिलने के कारण किसान गंभीर आर्थिक संकट से गुजर रहे हैं।
उन्होंने आरोप लगाया कि आलू के अंतरराज्यीय निर्यात पर रोक से किसानों को नुकसान हुआ है और इससे बिचौलियों का प्रभाव बढ़ा है। उनका कहना था कि किसानों से सीधे खरीद की व्यवस्था के बजाय बाजार को बिचौलियों और संगठित समूहों के माध्यम से नियंत्रित किया जा रहा है।
देबजीत सरकार ने कहा कि किसानों को शीतगृहों में अपनी उपज रखने में भी कई प्रकार की समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है और कई मामलों में आलू खराब हो रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रशासनिक और परिवहन व्यवस्था की कमियों के कारण किसानों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ रहा है और वे कर्ज के जाल में फंसते जा रहे हैं।
उन्होंने किसानों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य लागू करने, फसल बीमा योजना को प्रभावी बनाने तथा प्रभावित किसानों को तत्काल आर्थिक सहायता देने की मांग की। साथ ही प्राकृतिक आपदाओं से फसल नष्ट होने पर उचित मुआवजा देने की भी मांग की।
उन्होंने कहा कि राज्य में दीर्घकालिक कृषि नीति के अभाव और कुप्रबंधन के कारण किसान संकट में हैं। उनके अनुसार आलू, प्याज, धान और जूट सहित कई कृषि क्षेत्रों में इसी प्रकार की समस्याएं देखी जा रही हैं।
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि मत्स्य पालन और पशुपालन क्षेत्र भी उचित नीति के अभाव में उत्पादन और विपणन से जुड़ी कठिनाइयों का सामना कर रहे हैं तथा राज्य के किसान और मछुआरे केंद्र सरकार की योजनाओं का पूरा लाभ नहीं ले पा रहे हैं।
मतदाता सूची से जुड़े प्रपत्र-6 के मुद्दे पर उन्होंने कहा कि यह एक संवैधानिक प्रक्रिया है और इसमें किसी प्रकार की बाधा नहीं आनी चाहिए। उन्होंने चुनाव प्रबंधन से जुड़े प्राधिकरण से यह सुनिश्चित करने की मांग की कि सभी पात्र मतदाताओं के नाम सही तरीके से मतदाता सूची में शामिल हों।
उन्होंने स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव की आवश्यकता पर जोर देते हुए कहा कि इसके लिए सभी आवश्यक कदम उठाए जाने चाहिए। पत्रकारों के सवालों के जवाब में उन्होंने कानून-व्यवस्था, राजनीतिक हिंसा, केंद्रीय जांच एजेंसियों की भूमिका और आगामी विधानसभा चुनावों पर भी अपनी बात रखी।
अंत में उन्होंने कहा कि पश्चिम बंगाल की जनता बदलाव चाहती है और आने वाले समय में इसका प्रभाव दिखाई देगा।