वैभव सूर्यवंशी का लिस्ट-ए क्रिकेट में सबसे तेज अर्धशतक, महज 29 गेंदों में 94 रन ठोक दिए
पश्चिम बंगाल के पूर्व मंत्री सुजीत बोस की गिरफ्तारी को लेकर दायर याचिका पर तत्काल सुनवाई की मांग को कलकत्ता उच्च न्यायालय ने स्वीकार करने से इनकार कर दिया है। अदालत ने याचिका पर त्वरित सुनवाई की आवश्यकता पर सवाल उठाते हुए कहा कि इस तरह की जल्दबाजी का क्या औचित्य है।
कोलकाता। पश्चिम बंगाल के पूर्व मंत्री सुजीत बोस की गिरफ्तारी को लेकर दायर याचिका पर तत्काल सुनवाई की मांग को कलकत्ता उच्च न्यायालय ने स्वीकार करने से इनकार कर दिया है। अदालत ने याचिका पर त्वरित सुनवाई की आवश्यकता पर सवाल उठाते हुए कहा कि इस तरह की जल्दबाजी का क्या औचित्य है।
मामला शहरी निकाय भर्ती घोटाले से जुड़ा है, जिसमें प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने 11 मई को सुजीत बोस को गिरफ्तार किया था। उनके वकील ने गिरफ्तारी को चुनौती देते हुए अदालत में याचिका दायर की है और इसे तत्काल सूचीबद्ध करने की मांग की थी।
सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति कृष्ण राव ने सवाल उठाया कि गिरफ्तारी को खारिज करने के लिए इतनी जल्दबाजी क्यों की जा रही है। अदालत ने टिप्पणी की कि यदि गिरफ्तारी पहले ही हो चुकी है, तो इस स्तर पर मामले में और क्या शेष रह जाता है। अदालत ने यह भी कहा कि ऐसी स्थिति में संबंधित पक्ष को जमानत याचिका दायर करनी चाहिए।
इस पर वकील ने दलील दी कि याचिका में गिरफ्तारी की वैधता को ही चुनौती दी गई है, क्योंकि गिरफ्तारी के आधार स्पष्ट नहीं बताए गए हैं। उन्होंने कहा कि इससे पहले अवकाशकालीन पीठ ने ईडी से विस्तृत रिपोर्ट मांगी थी।
हालांकि, अदालत ने स्पष्ट किया कि इस चरण पर तत्काल सुनवाई संभव नहीं है और मामले को जुलाई माह में सूचीबद्ध किया जाएगा। न्यायालय ने कहा कि उचित प्रक्रिया के तहत मामले की सुनवाई आगे बढ़ाई जाएगी।
इस बीच, अदालत ने यह भी निर्देश दिया कि मामले को नियमित बेंच के समक्ष सूचीबद्ध किया जाए। इससे पहले न्यायमूर्ति शम्पा दत्ता पाल की पीठ ने भी मामले को नियमित सुनवाई के लिए भेजा था।
ईडी के अनुसार, सुजीत बोस पर दक्षिण दमदम नगरपालिका में भर्ती प्रक्रिया में अनियमितताओं के आरोप हैं। जांच एजेंसी का दावा है कि लगभग 150 उम्मीदवारों के नाम कथित रूप से अवैध तरीके से सिफारिश सूची में शामिल किए गए थे और इस मामले में वित्तीय लेन-देन के सबूतों की भी जांच की जा रही है।