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अब शासक का नहीं, कानून का राज: शुभेंदु
कोलकाता। बंगाल की सत्ता संभालते ही मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने भ्रष्टाचार और सिंडिकेट राज के खिलाफ अपनी जंग तेज कर दी है। शनिवार को दक्षिण 24 परगना के डायमंड हार्बर में एक अहम प्रशासनिक बैठक के बाद मुख्यमंत्री ने कड़ा संदेश देते हुए राज्य में 'शासक के कानूनÓ को खत्म कर 'कानून का शासनÓ स्थापित करने का बड़ा ऐलान किया। उन्होंने पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों को भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) का हवाला देते हुए निर्देश दिया कि कटमनी, जबरन वसूली, सिंडिकेट राज और महिलाओं पर अत्याचार करने वालों के खिलाफ अब बिना किसी राजनीतिक पक्षपात के सीधे और सख्त कार्रवाई की जाए।
मुख्यमंत्री ने राज्य की जनता को निर्भीक होने का हौसला देते हुए कहा कि यदि केंद्र या राज्य सरकार की किसी भी जनकल्याणकारी योजना का लाभ उठाने के एवज में किसी से भी रिश्वत मांगी गई है, तो वे बिना डरे सीधे थाने का रुख करें। शुभेंदु अधिकारी ने स्पष्ट किया कि यदि पीडि़तों के पास ऑनलाइन भुगतान, बैंक ट्रांसफर या किसी भी प्रकार का इलेक्ट्रॉनिक और दस्तावेजी सबूत है, तो पुलिस बिना किसी देरी के तुरंत एफआईआर दर्ज कर आरोपियों को सलाखों के पीछे भेजेगी। इसके साथ ही उन्होंने यह चेतावनी भी दी कि राजनीतिक द्वेष के तहत की जाने वाली झूठी शिकायतें बर्दाश्त नहीं की जाएंगी और फर्जी आरोप लगाने वालों के खिलाफ भी कानूनन सख्त कदम उठाए जाएंगे।
सिंडिकेट और अवैध वसूली के नेटवर्क पर प्रहार करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि आज से राज्य में ऑटो, टोटो और फुटपाथ दुकानदारों (हॉकर्स) से किसी भी तरह की अवैध वसूली या रंगदारी नहीं चलेगी। उन्होंने आम जनता और छोटे व्यवसायियों से अपील की कि यदि कोई भी सिंडिकेट उनसे पैसा वसूलने आए, तो तुरंत थाने में शिकायत करें। मुख्यमंत्री ने पिछले पांच वर्षों के दौरान राजनीतिक हिंसा के शिकार हुए लोगों और पुलिसिया उत्पीडऩ का सामना करने वाले नागरिकों से भी आह्वान किया कि वे नए सिरे से अपनी शिकायतें दर्ज कराएं; जिनके पास पुख्ता दस्तावेज नहीं हैं, उनके मामलों की भी निष्पक्ष जांच कराई जाएगी। सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने या पुलिस पर हमला करने वालों को भी उन्होंने सीधे तौर पर सुधर जाने की चेतावनी दी है।
प्रशासनिक सुधारों के साथ-साथ मुख्यमंत्री ने पुलिस महकमे के लिए भी कई महत्वपूर्ण और संवेदनशील फैसले लिए। उन्होंने पुलिस वेलफेयर बोर्ड को भंग करने की अपनी घोषणा को दोहराते हुए कहा कि यह कदम खाकी को राजनीतिक प्रभाव से मुक्त करने के लिए अनिवार्य था। इसके अतिरिक्त, महिला पुलिसकर्मियों की सहूलियत को ध्यान में रखते हुए मुख्यमंत्री ने पुलिस महानिदेशक को निर्देश दिया कि महिला कांस्टेबलों और अधिकारियों की पोस्टिंग उनके गृह जिले या नजदीकी क्षेत्रों में ही की जाए, ताकि उन्हें दूरदराज के जिलों में न भटकना पड़े।
विशेष रूप से 15 वर्ष से अधिक की सेवा पूरी कर चुकी महिला कर्मियों को गृह जिले में तैनाती देने पर सकारात्मक विचार करने को कहा गया है। मुख्यमंत्री के इन फैसलों से साफ है कि वे बंगाल में भयमुक्त, पारदर्शी और जन-हितैषी प्रशासन की नई नींव रख रहे हैं।